Meditation

सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा स्थापित, ईशा फाउंडेशन, मानव क्षमता के विकास के लिए पूर्ण समर्पित, एक स्वयंसेवी, अंर्तराष्ट्रीय लाभ-रहित संस्था है। यह फाउंडेशन एक मानव-सेवी संस्था है, जो हर व्यक्ति के अंदर दूसरों को सशक्त करने की संभावना को स्वीकार करता है और व्यक्तिगत रूपांतरण और प्रेरणा के माध्यम से एक सार्वभौमिक संप्रदाय का निर्माण कर रहा है। फाउंडेशन की गतिविधियों में सबसे प्रमुख – विशेष रूप से तैयार की गयी योग विधियां हैं, जिन्हें ईशा-योग कहा जाता है।

सद्ïगुरु ने ‘ईशा-क्रिया को एक सरल और शक्तिशाली विधि के रूप में पेश किया है। योग विज्ञान के शाश्वत ज्ञान का हिस्सा है ‘ईशा-क्रिया। ईशा का अर्थ है, ‘वह जो सृष्टि का स्रोत है और क्रिया का अर्थ है, ‘आंतरिक कार्य। ईशा-क्रिया का उद्देश्य मनुष्य को उसके अस्तित्व के स्रोत से संपर्क बनाने में सहायता करना है, जिससे वह अपना जीवन अपनी इच्छा और सोच के अनुसार बना सके। ईशा-क्रिया के दैनिक एवं नियमित अभ्यास से जीवन में स्वास्थ्य, कुशलता, शांति और उत्साह बना रहता है। यह आज के भागदौड़ वाले जीवन के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक प्रभावशाली साधन है।
ईशा-क्रिया, सरल व नि:शुल्क है। इसका आसानी से अभ्यास किया जा सकता है। वीडियो में बताई गई विधि के साथ यह ध्यान सीखा जा सकता है और इसे डाउनलोड किया जा सकता है। जो लोग अपने व्यस्त जीवन में से चंद मिनट का समय निकालने को तैयार हैं, उन सभी का जीवन रूपांतरित करने की शक्ति इसमें है।

ईशा क्रिया की तैयारी
पूर्व दिशा की ओर चेहरा कर पालथी लगाकर बैठें। अपनी पीठ आराम से सीधी रखें। अपके हाथ जांधों पर खुले हुए, हथेलियां ऊपर की ओर हों। जरा सा ऊपर उठे चेहरे के साथ अपनी आंखे बंद करके बैठें। अपनी भौंहों के बीच हल्का सा ध्यान (फोकस) रखें।

 Meditation

ध्यान
यह ध्यान तीन चरणों में होगा।
पहला चरण

  • आराम से धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।
  • हर बार सांस लेते समय अपने मन में कहें: ‘मैं यह शरीर नहीं हूं और इस विचार के साथ सांस अंदर लेते रहें।
  • हर बार सांस छोड़ते समय अपने मन में कहें: ‘मैं यह मन भी नहीं हूं और इस विचार के साथ सांस छोड़ते रहें।
  • इसे 7 से 11 मिनट तक करें।

दूसरा चरण
मुंह खुला रखकर ‘आ… (आऽऽऽ) की लंबी आवाज निकालें। आवाज नाभि के ठीक नीचे से आनी चाहिए। आपको इसे बहुत जोर से नहीं बोलना है, बस इतना हो कि आप इसका कंपन महसूस कर सकें। इसे 7 बार करना है। हर बार यह ध्वनि करते हुए पूरी सांस छोडि़ए।

तीसरा चरण
अपने चेहरे को थोड़ा-सा ऊपर की ओर उठा हुआ रखें, अपना ध्यान भौंहों के बीच में रखते हुए 5-6 मिनट तक बैठें। यह पूरा अभ्यास 12 से 18 मिनट के बीच होगा। अगर आप चाहें तो ज्यादा देर तक बैठ सकते हैं। सांस ऐसे ही लेना और छोडऩा है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

कृपया ध्यान रखें

  • जब आप ईशा क्रिया के लिए बैठें, शरीर और मन की हरकतों पर ध्यान न दें। आपके शरीर और मन में जो भी चल रहा हैं, उनकी परवाह किए बिना, बस वहां बैठे रहें।
  • अभ्यास के दौरान आराम न करें। बीच में आराम करने से ऊर्जा के पुनर्गठन की प्रक्रिया बिगड़ जाती है।
  • हर बार जब आप यह क्रिया करें, इसे कम से कम 12 मिनट तक करें और 48 दिनों तक दिन में दो बार करें। (48 दिन का एक मंडल होता है।) या फिर 90 दिनों तक दिन में एक बार करें। आपको यह संकल्प लेना है। यही आपकी गुरु दक्षिणा है।
  • इस क्रिया का अभ्यास कोई भी कर सकता है और इसके फायदे उठा सकता है। बिना कोई बदलाव किए केवल निर्देशों का पालन करें। यह एक सरल पर बहुत शक्तिशाली क्रिया है।
  • आप अपने को दिन में किसी भी समय यह याद दिला सकते हैं- ‘मैं यह शरीर नहीं हूं और ‘मैं यह मन भी नहीं हूं।

लाभ

यह क्रिया आपके और आपके शरीर, आपके और आपके मन के बीच एक दूरी बनाती है। आप जीवन में जूझ इसलिए रहे हैं, क्योंकि आपने इन सीमित रूपों के साथ अपनी पहचान बना ली है। ध्यान की खासियत यह है कि आप और जिसे आप अपना ‘मनÓ कहते हैं, उनके बीच एक दूरी बन जाती है। आप जिस भी पीड़ा से गुजरते हैं, वह आपके दिमाग की रचना है, क्या ऐसा नहीं है? अगर आप खुद को दिमाग से दूर कर लेते हैं, क्या आपके भीतर पीड़ा हो सकती है? यहीं पीड़ा का अंत हो जाता है।
जब आप ध्यान करते हैं, आपके और आपके दिमाग के बीच एक दूरी पैदा हो जाती है, और आप शांतिपूर्ण महसूस करने लगते हैं। पर समस्या यह है कि जैसे ही आप अपनी आंखें खोलते हैं, आप फिर से अपने दिमाग के साथ उलझ जाते हैं।

अगर आप रोज ध्यान करेंगे, एक दिन ऐसा आएगा जब आप अपनी आंखे खोलेंगे और तब भी आप अनुभव करेंगे कि आपका दिमाग वहां है और आप यहां हैं। यह तकलीफों का अंत है। जब आप अपने शरीर और अपने मन के साथ अपनी पहचान बनाना बंद कर देते हैं, आप अपने भीतर सृष्टि के स्रोत से जुड़ जाते हैं। जैसे ही ऐसा होता है, आपके ऊपर कृपा होती है।

चाहे आप कहीं रहें, यहां या किसी दूसरे लोक में, अब तकलीफों का अंत हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि अपने कर्मों की पूरी गठरी-अपने अतीत और अचेतन मन-को किनारे कर दिया है। आपके ऊपर इनका कोई असर नहीं होता। जैसे ही पिछले कर्मों का आपके ऊपर असर समाप्त हो जाता है, तब जीवन एक विशाल संभावना बन जाता है।

हर सांस आपके जीवन में एक महत्त्वपूर्ण संभावना बन जाती है, क्योंकि अब आपके वजूद पर आपके अतीत का कोई असर नहीं होता। जब आप यहां बैठते हैं, आप भरपूर जीवन होते हैं। जिंदगी सहज हो जाती है।

अन्य योग और ध्यान
कुछ प्रमुख योग और ध्यान कार्यक्रमों के बारे में यहां जानकारी दी जा रही है।
ईशा योग प्रोग्राम- सद्ïगुरु द्वारा प्रस्तुत किए गए प्राथमिक कार्यक्रम, ईशा योग प्रोग्राम में, शामभवी महा मुद्रा से परिचित कराया जाता है जो गहरे आंतरिक रूपांतरण की एक सरल लेकिन शक्तिशाली क्रिया है।
भाव-स्पंदन- यह चार दिवसीय आवासीय कार्यक्रम है। सद्ïगुरु द्वारा डिजाइन भाव-स्पंदन कार्यक्रम लोगों को एक ऐसा अवसर प्रदान करता है, जहां वे शरीर और मन की सीमाओं से परे, चेतना के उच्च आयामों को अनुभव करते हैं। यह असीम प्रेम व आनंद अनुभव करने का एक अवसर प्रदान करता है।

हठ योग

हठ योग चेतना को जागृत करता है और शरीर को स्थिरता प्रदान करता है। यह एक ऐसा शानदार तरीका है जिसकी मदद से आप ईश्वरीय कृपा हासिल कर सकते हैं। हर आसन, हर मुद्रा, सांस लेने का हर तरीका, हर चीज का लक्ष्य यही है कि आपको अपनी परम प्रकृति में पहुंचाने में आपकी मदद करे।

शून्य-इंटेन्सिव

इस चार दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में शक्ति-चलन क्रिया का अभ्यास सिखाया जाता है, जो एक स्वास्थ्य-केंद्रित प्राणायाम है। यह प्राण-ऊर्जा को सुषुम्ना नाड़ी में ले जाने में सहायक होता है। साथ ही इसमें ‘शून्य-ध्यानÓ में दीक्षा दी जाती है। वे लोग जो गहरे ध्यान का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए शून्य-ध्यान एक विशुद्ध और सहज ध्यान प्रक्रिया है। यह दोनों क्रियाएं मिल कर शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक विकारों से मुक्ति दिलाती हैं जिससे प्राण-ऊर्जा स्वाभाविक रूप से सक्रिय हो जाती है।

सम्यमा

सम्यमा आठ दिन का एक बहुत ही गहन आवासीय कार्यक्रम है, जो सद्ïगुरु द्वारा ईशा योग केंद्र में कराया जाता है। इसमें भाग लेने वाले लोग चेतना के उच्च स्तरों को छूने के काबिल हो जाते हैं तथा ध्यान की विस्फोटक अवस्थाओं को अनुभव करते हैं। सम्यमा आपको जागरूकता के एक नये आयाम में प्रवेश दिलवाता है।