Digital Arrest News
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Digital Arrest News: फरीदाबाद की रहने वाली मोनिका रिटायर्ड लेबर वेलफेयर कमिश्नर हैं। हर दिन की तरह अपने घर में अपनी 90 वर्षीय मां के साथ शांतिपूर्वक समय बिता रही थीं। लेकिन एक दिन, एक फोन कॉल ने उनकी जिंदगी को एक ऐसे भंवर में धकेल दिया, जिससे उबरने में उन्हें हफ्तों लग गए।

फोन पर दूसरी तरफ से एक गंभीर आवाज आई—”आपके नाम पर मुंबई के एक बैंक में खाता खुला है और करोड़ों का लेनदेन हुआ है।” यह सुनते ही उनकी दुनिया मानो थम गई। इससे पहले कि वे कुछ समझ पातीं, कॉलर ने उन्हें एक मुंबई पुलिस अधिकारी से जोड़ा। वीडियो कॉल पर वह अधिकारी उनके खिलाफ एक गिरफ्तारी वारंट दिखा रहा था।

मोनिका ने घबराकर सफाई दी कि उन्होंने ऐसा कोई खाता नहीं खोला है। लेकिन कथित पुलिस अधिकारी ने मामले को और गंभीर बनाते हुए कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घोटाले से जुड़ा है, और वह अब जांच के घेरे में हैं। वह अधिकारी इतना विश्वसनीय लग रहा था कि मोनिका को हर शब्द सच लगा।

इसके बाद, उन्हें “जांच में सहयोग” के नाम पर घर में नजरबंद रहने का आदेश दिया गया। यह सिर्फ नजरबंदी नहीं थी, बल्कि उनके जीवन का सबसे कठिन दौर शुरू होने वाला था। ठगों ने उनकी हर गतिविधि पर नज़र रखने के लिए व्हाट्सएप कॉल को 24 घंटे चालू रखने की शर्त रखी।

इन 18 दिनों में, मोनिका ने न किसी से बात की, न बाहर गईं। ठगों ने धीरे-धीरे उनके बैंक खाते से 40 लाख रुपये निकाल लिए, यह वादा करते हुए कि जांच पूरी होते ही सब लौटा दिया जाएगा।

मोनिका की चुप्पी में उनका डर और अकेलापन छिपा था। उनकी 90 वर्षीय मां उनके साथ घर में थीं, लेकिन उन्हें भी कुछ बताने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

18वें दिन, ठगों ने अचानक उनसे संपर्क करना बंद कर दिया। कोई कॉल नहीं, कोई जवाब नहीं। यही वह क्षण था जब मोनिका को एहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।

हालांकि डर के कारण उन्होंने तुरंत शिकायत नहीं की, लेकिन आखिरकार 15 दिनों बाद हिम्मत जुटाकर पुलिस में मामला दर्ज कराया।

मोनिका की कहानी दुखद और भयावह है, लेकिन यह हमें सिखाती है कि ऐसी परिस्थितियों में कैसे सतर्कता बरतनी चाहिए। अगर शुरुआत से ही मोनिका कुछ कदम उठातीं, तो वे ठगी से बच सकती थीं। आइए समझते हैं कि ऐसे मामलों को सही तरीके से कैसे संभालना चाहिए:

मोनिका को सबसे पहले कॉलर की पहचान वेरिफाई करनी चाहिए थी।

  • यदि कोई खुद को TRAI या पुलिस अधिकारी बताता है, तो तुरंत संबंधित विभाग की आधिकारिक हेल्पलाइन पर कॉल करके इसकी पुष्टि करें। आधिकारिक संस्थाएं कभी भी व्हाट्सएप या निजी कॉल्स के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं करतीं।

कभी भी आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, ओटीपी या अन्य निजी जानकारी फोन पर शेयर न करें।

  • मोनिका को ठगों द्वारा दी गई जानकारी को जांचे बिना मानने के बजाय इसे गहराई से जांचना चाहिए था।

ठग अक्सर डराने या दबाव डालने की रणनीति अपनाते हैं।

  • यदि कोई गिरफ्तारी या जांच की धमकी दे, तो इसे सीधे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करें। मोनिका को कॉल के दौरान ठगों की बातों को शांत दिमाग से सुनकर, किसी करीबी पर भरोसा करना चाहिए था।

ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल को तुरंत रिकॉर्ड करें और स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम सेल को रिपोर्ट करें।

  • भारत में साइबर अपराध की रिपोर्ट के लिए हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध है।

मोनिका को तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके अपने अकाउंट की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए थे।

  • बैंक खाते में ट्रांजैक्शन को फ्रीज करना या अलर्ट सेट करना ठगी से बचाव करता। उन्हें हर लेनदेन की नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए थी।

ठग अक्सर शिकार को चुप रहने की सलाह देते हैं ताकि वे ज्यादा देर तक उन्हें भ्रम में रख सकें।

  • मोनिका को अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों से इस मामले में चर्चा करनी चाहिए थी। कई बार दूसरों की राय और अनुभव बड़ी मददगार हो सकती है।

यदि आपको किसी कॉल पर संदेह हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।

  • जैसे ही मोनिका को गिरफ्तारी की धमकी मिली, उन्हें सीधे पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल से संपर्क करना चाहिए था।
  • ऑनलाइन और फोन पर वित्तीय या कानूनी जानकारी को लेकर जागरूक रहें। सरकारी या बैंकिंग अधिकारियों के नाम पर आने वाले कॉल्स को हमेशा संदेह की दृष्टि से देखें।

मोनिका की चुप्पी और डर ने ठगों को उनके पैसे हड़पने का मौका दिया। अगर वे शुरू में ही अधिकारियों से संपर्क करतीं या परिवार से सलाह लेतीं, तो वे इस जाल में फंसने से बच सकती थीं।

इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कॉल को नजरअंदाज न करें। सतर्कता और समय पर कार्रवाई आपको ठगी से बचा सकती है। याद रखें, डर और दबाव में लिया गया हर गलत निर्णय आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...