googlenews
गृहलक्ष्मी की कहानियां -मेरा अंडा गिर गया
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां – एक बार वो एक खिलौना (मुर्गी) लाए, जो दबाने पर अंडे देती थी। आदतानुसार मैं उनके साथ उस मुर्गी से खेल रही थी तभी अचानक मेरे हाथ से एक अंडा गिर गया। मैं जोर से चिल्लाई, ‘अरे मेरा अंडा गिर गया।’ मेरे देवर ने सुन लिया जोकि बहुत ही हाजिर जवाब है, वो वहीं खड़ा था। वो तुरंत बोला, ‘अरे भाभी, अंडा आपका या मुर्गी का है।’ उसकी बात का अर्थ समझते ही मैं शर्म से लाल हो गई। आज इतने सालों बाद भी कभी अंडे का जिक्र आता है तो मैं शर्म से लाल हो जाती हूं।

गृहलक्ष्मी की कहानियां -मेरा अंडा गिर गया
Stories of Grihalakshmi
1- गंजी बना दो भगवान

बात तब की है जब मेरे सिर के बाल बहुत झड़ रहे थे। कभी-कभार बाल टूटकर दाल-सब्जी में भी गिर जाते और पतिदेव नाराज हो जाते थे। एक दिन पति महोदय खाने पर बैठे थे। मैंने खाना परोसा तो एक कौर लेकर वे उठ खड़े हुए और मंदिर के सामने आंखें मूंदे खड़े हो गए। अपने नास्तिक पति को ऐसा करते देख मैंने आश्चर्य से इसकी वज़ह पूछी तो वो बोले, ‘भगवान से विनती कर रहा हूं कि तुम्हें गंजी बना दे ताकि सिर के बाल खाने न पड़ें।’ उनकी बात सुनकर मुझे बहुत शर्म आई और मैंने फिर कभी उन्हें शिकायत का मौका नहीं दिया।

गृहलक्ष्मी की कहानियां -मेरा अंडा गिर गया
Stories of Grihalakshmi
2- दूसरे की पत्नी को पसंद कर लिया

बात काफी पुरानी है। मेरे विवाह को चार वर्ष ही बीते थे। मेरे पति के घनिष्ठ मित्र का घर गांव में होने के कारण उनकी तीन बहनें परीक्षा आदि के लिए हमारे घर पर रहकर ही दिया करती थीं। जब शादी-विवाह की बातें होने लगीं तो मित्र बोले कि लड़के को लड़की हमारे घर पर ही दिखा देते हैं।
लड़के वाले आए, मैं लड़की के बराबर में जाकर बैठ गई। लड़के ने लड़की को देखते ही ‘हां’ कर दी। सभी खुश थे, यही चाहते थे कि दोनों दूसरे कमरे में जाकर एक-दूसरे से बात कर लें। जैसे ही लड़की उठी लड़का चिल्लाया मैंने इन्हें नहीं बल्कि बराबर वाली लड़की यानि की मुझे पसंद किया है। उस समय मेरी हालत देखने लायक थी। जब सबको पता चला कि मैं शादीशुदा हूं तो सभी ठहाका मार कर हंसने लगे और मैं शर्म से लाल हो गई।

यह भी पढ़ें –मैं भी प्रेग्नेंट हो गई हूं