झटका इतनी जोर से लगा कि बस की रेलिंग से मेरा हाथ छूटा और मैं दरवाजे के पास वाली सीट पर बैठे लड़के की गोद में गिर पड़ी। दो मिनट तक तो मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ था। तभी वह लड़का अपना मुंह मेरे कान के पास लाते हुए बोला, ‘सोनयो, हुण उठ वी जाओ कि सारी जिंदगी एंदा ही कटनी है।’ (अब उठ भी जाओ या सारी जिंदगी ऐसे ही बितानी है।) ये सुनते ही मेरा चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया, क्योंकि बस में बैठी सभी सवारियां मेरी ओर देखकर मुस्कुरा रही थी।

2-मौन रहना बेहतर
मैं पेशे से एक शिक्षिका हूं तथा इन दिनों अपने मूल विद्यालय में ना होकर प्रतिनियुक्त शिक्षिका के रूप में दूसरे विद्यालय में सेवा दे रही हूं। अभी कुछ दिनों पहले मैं अपने मूल विद्यालय के प्रधानाध्यापक से पहली बार रू-ब-रू हुई। उन्होंने बातचीत के क्रम में कहा, ‘अरे, मैंने आपको अब तक देखा नहीं था, परंतु आपके वेतन के लिए हस्ताक्षर मेरे ही होते हैं।’ मैंने तुरंत अपनी वाक-पटुता प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘सर तो क्या हुआ, वेतन कोई चेहरा देखकर दिया जाएगा क्या?’ मेरी बात पर जब वहां उपस्थित अन्य शिक्षक हंसने लगे तो मुझे बेहद झेंप महसूस हुई तथा मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।

3-देखकर नहीं चल सकते
एक दिन मैं बाजार से अंडे लेकर अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी। तभी पास से निकलते हुए एक लड़के का मुझे धक्का लगा और मेरे हाथ से अंडे की थैली छूटकर नीचे गिर गई और सारे अंडे टूट गए। मैं उस लड़के पर जोर से चिल्लाई, ‘भगवान ने दो-दो आंखें दी हैं, फिर भी देखकर नहीं चल सकते। तुम्हारे कारण मेरे सारे अंडे टूट गए।’ तभी मैंने देखा, मेरे आसपास खड़े लोग मेरी ओर देखकर हंस रहे हैं।
जब मुझे अपनी कही बात समझ में आई तो मैंने वहां से चले जाने में ही अपनी भलाई समझी।
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