Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

आज नहीं तो कल-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Hindi Story: दिल्ली की रौनक में एक लड़की रोज़ दिखाई देती थी, नाम था नम्रता। वो मन ही मन एक लड़के को पसंद करती थी। हल्की दाढ़ी और शांत आँखों वाला निशांत उसे अक्सर दिखाई दे जाता था। उसे देखकर नम्रता हर बार एक ही बात सोचती थी, बस एक बार कैसे भी इससे […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, सामाजिक कहानियाँ (Social Stories in Hindi), हिंदी कहानियाँ

आलू टमाटर की सब्जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: आज बाबूजी की तेरहवीं है। नाते-रिश्तेदार इकट्ठे हो रहे हैं। उनकी बातचीत, हँसी मज़ाक देख-सुनकर उसका मन उद्दिग्न हो रहा है..”कोई किसी के दुख में भी कैसे हँसी मज़ाक कर सकता है? पर किससे कहे,किसे मना करे,, सभी तो एक जैसे हैं”वह बाबूजी की तस्वीर के सामने जाकर आँख बंद करके […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

एक कप चाय-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: सुबह के सात बज रहे थे। रसोई से उठती चाय की तेज़ खुशबू पूरे घर में फैल रही थी। सविता ने दो कप में चाय डाली एक अपनी, और दूसरा कप अपनी बेटी नंदिनी के लिए। पर जैसे ही उसने दूसरा कप ट्रे में रखा, मन ही मन कहा, अब तो उसे […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

रिश्तों का पता..कृष्णा निवास-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: मुंबई की भीड़भाड़ वाली गली में खड़ा था एक चार मंज़िला पुराना मकान ‘कृष्णा निवास’। चारों ओर ऊँची-ऊँची इमारतें, ट्रैफिक की आवाज़ें और तेज़ रफ्तार ज़िंदगी थी, लेकिन इस मकान के अंदर कुछ अलग ही दुनिया थी एक संयुक्त परिवार की, जहाँ हर मंज़िल पर अलग कहानी बसती थी, मगर सबकी […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

एक पिता-सा ससुर-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: सुबह का आँगन हमेशा की तरह चुप था। बहू राधा झाड़ू लगाते-लगाते बार-बार खिड़की की तरफ देख रही थी, जैसे मन कहीं और भटका हो। उसकी उँगलियों में आज भी मेहंदी के पुराने निशान थे, पर उन्हीं उँगलियों से वह कभी कागज पर रंग बिखेरती थी ये बात घर में बस […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

हर उम्र में एक नई मां-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: सुबह की धूप हल्के से पर्दों के आर-पार कमरे में उतर रही थी। निकिता ने चाय का प्याला हाथ में लिया और अपने बेटे आरव को देखा, जो टेबल पर झुका हुआ कुछ लिख रहा था। उसकी आँखों में वही एकाग्रता थी जो कभी तीन साल की उम्र में खिलौनों को […]

Posted inप्रेरणादायक कहानियां, लघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

कंबल- गृहलक्ष्मी की कहानियां     

Hindi Motivational Story: सर्दियों की वह रात थी, जब कोहरे ने पूरे कस्बे को सफेद चादर में लपेट लिया था। हवा में ठंडक ऐसी कि सांसें धुएं की तरह दिखतीं।रेलवे स्टेशन के एक कोने में बूढ़ा गोपाल बैठा था—झुका हुआ, काँपता हुआ, पर आंखों में अब भी एक शांति थी। उसके पास बस एक पुराना […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

धूप के उस पार तुम- गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: पहाड़ी शहर की सुबहें हमेशा धुंध से ढकी रहती थीं, लेकिन आज की धुंध कुछ ज्यादा ही नरम लग रही थी मानो बादल भी किसी मीठे रहस्य को छिपाए हों। आर्या अपनी स्केचबुक लेकर झील के किनारे बैठी थी। पेंसिल चलती तो थी, लेकिन रुक-रुक कर… जैसे उसके मन में कोई […]

Posted inप्रेम कहानियां, लघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

एक फैसला, दो ज़िंदगी – गृहलक्ष्मी की कहानियां

Love Story in Hindi: नव्या को कभी नहीं लगा कि ज़िंदगी उसे ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करेगी जहाँ दिल और दुनिया आमने-सामने होंगे। वह सुलझी हुई, आत्मनिर्भर और अपने फैसलों को लेकर साफ़ सोच रखने वाली महिला थी। उम्र के उस पड़ाव पर, जहाँ समाज अक्सर औरत से समझौते की उम्मीद करता है, वहीं […]

Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

जब चुप्पी टूट गई-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: शहर के एक छोटे से मोहल्ले में दो बहनें रहती थीं, राधिका और मीरा। राधिका बड़ी थी, गोरी, तीखे नैन-नक्श वाली, हर त्योहार और हर भीड़ में सबकी नज़र उसी पर टिक जाती। मीरा छोटी थी, साँवले रंग की, साधारण चेहरे वाली, मगर उसकी आँखों में एक ऐसी गहराई थी, जो […]

Gift this article