sach se jhooth bada
sach se jhooth bada

देखते-देखते शहर में दंगा हो गया। हिंदू मुस्लिम के खून के प्यासे और मुस्लिम हिंदू के खून के प्यासे हो गये। दोनों गुटों के बीच होड़ मच गयी लोगों को मारने की। शहर हर तरफ से हर-हर महादेव और अल्लाह हो अकबर के नारों से गूंजने लगा। शहर का वर्षों का आपसी सौहार्द कब का खत्म हो चुका था। सभी घरों की खिड़कियां बंद थीं मानो कोई रहता ही नहीं।

इतने में पकड़ो-पकड़ो करके हिंदू धर्म के लोगों के गुट ने एक नवयुवक का पीछा किया। नवयुवक अपने प्राण की रक्षा के लिये जोरों से भागा। शहर के बाहर मंदिर था। मंदिर में शरण लेने के सिवा कोई चारा नहीं था। उससे दूर चले जाने पर पकड़ा जाना निश्चित था। वह मंदिर में जा घुसा। मंदिर में पुजारी उस समय हनुमान जी की विशाल मूर्ति के सामने पूजा-अर्चना कर रहे थे। नवयुवक आते ही पुजारी को प्रणाम कर कातर स्वर में बोला “बचा लीजिये, महाराज- “लोग मेरा पीछा कर रहे हैं। पुजारी ने नवयुवक को मूर्ति के पीछे छुप जाने का इशारा किया। नवयुवक ने इशारा समझा और मूर्ति के पीछे जा छुपा। इतने में भीड़ मंदिर के सामने आकर पुजारी से पूछने लगी- महाराज, आपने किसी मुस्लिम नवयुवक को देखा है। पुजारी ने पूजा-अर्चना में व्यस्तता का ढोंग रचाया और रूक कर कहने का इशारा किया।

पूजा-अर्चना समाप्त हुई तो पुजारी बाहर निकला। उत्तेजित भीड़ को शांत करते हुए उसने प्रश्न किया- “क्या मुस्लिम- हिंदू के मंदिर में घुस सकता है? भीड़ पुजारी के निरूत्तरित प्रश्न को सुनकर छँट चुकी थी। मुस्लिम नवयुवक बाहर निकला और पुजारी को लाख-लाख शुक्रिया देने लगा। उसकी आँखों से खुशी के आँसू बह रहे थे। उसने दूसरा जन्म पाया था। उसने जाते-जाते पुजारी से प्रश्न किया “महाराज, आपने जान-बूझकर झूठ क्यों बोला? पुजारी ने उत्तर दिया “कभी-कभी झूठ सच से बड़ा होता है, जब किसी की जान बचायी जाती है, क्योंकि वह सत्य का ही रूप होता है। धर्म जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। “पुजारी की महानता पर वह युवक नतमस्तक हो गया। मन में और अनेक प्रश्न लिए वह नवयुवक धीरे-धीरे जाने लगा। भीड़ दूर जा चुकी थी।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)