raaja ke prati sammaan
raaja ke prati sammaan

एक बार एक राजा अपनी प्रजा का हालचाल जानने के लिए आम आदमी की तरह राज्य में घूम रहा था। एक गाँव में उसने एक किसान को देखा, जो एक खेत में बैठा तरबूज तोड़ रहा था। राजा को भूख लगी थी, उसने किसान से तरबूज देने के लिए कहा।

किसान ने कहा कि वह कोई भी तरबूज, ले सकता है। राजा अच्छा सा तरबूज छाँटने लगा तभी उसकी नजर कुछ दूरी पर रखे एक बड़े से तरबूज पर पड़ी। राजा ने उससे वही तरबूज देने के लिए कहा। किसान ने किसी भी कीमत पर उसे वह तरबूज देने के लिए मना कर दिया। राजा ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि वह कल यह तरबूज ले जाकर अपने राजा को उपहार में देगा।

राजा ने उसे बहुत प्रलोभन दिए, लेकिन वह तरबूज उसे देने के लिए तैयार न हुआ। इस पर राजा चिढ़कर बोला कि यदि राजा ने तुम्हारा तरबूज स्वीकार नहीं किया तो? किसान लाठी उठाकर बोला कि तब मैं इस लाठी से उसका सिर फोड़ दूँगा। राजा हंसा और उससे दूसरा तरबूज लेकर चला गया। अगले दिन किसान तरबूज लेकर राजा के दरबार में पहुँचा तो राजा को देखते ही पहचान गया। फिर भी उसने तरबूज राजा की ओर बढ़ाया। राजा बोला, तुमने मुझे पहचान लिया हैं, अब अगर मैं तुम्हारी यह भेंट स्वीकार न करूं तो ? किसान ने अपनी लाठी उठाई और बोला कि आप भी तो इसे पहचान गए होंगे। उसकी सहजता पर राजा को हंसी आ गई और उसने तरबूज लेकर, उसे बहुत से उपहार देकर ससम्मान विदा किया। सारः सरलता किसी का भी मन मोह लेती है।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)