Hindi Motivational Story: एक बार एक आदमी किसी राजा के दरबार पहुँचा और बोला, “महाराज मेरे पास दो रत्न हैं, जिनमें से एक बेशक़ीमती हीरा और दूसरा साधारण काँच का टुकड़ा है। यदि आपके दरबार में किसी ने यह बता दिया कि कौन-सा काँच है और कौन-सा सच्चा हीरा, तो मैं हीरा आपके ख़ज़ाने में दे दूँगा, अन्यथा आपको 5 हजार स्वर्ण मुद्राएँ मुझे देनी होेंगी।
राजा को यह चुनौती पसंद आई और दरबारियों को हीरे और काँच में फ़र्क़ करने का आदेश दिया। बड़े से बड़ा सूझबूझ वाला दरबारी आया, लेकिन कोई भी हीरे की परख नहीं कर पाया। अंत में राजा ने हार मान ली और उसे 5000 स्वर्ण मुद्राएँ दी।
अब वह आदमी दूसरे राज्य पहुँचा और वहाँ भी उसने यही शर्त रखी लेकिन वहाँभी कोई फ़र्क़ नहीं कर सका और शर्त के मुताबिक़ राजा को 5000 सोने की मुद्राएँ देनी पड़ी।
इसी प्रकार वह आदमी कई राज्यों का भ्रमण करता और अपनी शर्त रखता। हर बार वह स्वर्ण मुद्राएँ जीत कर आगे बढ़ जाता। उस समय ठंड का समय था और राजा ने अपना दरबार खुले मैदान में लगाया था ताकि दरबारी धूप का आनंद लेते हुए कामकाज निपटा सकें।
वह आदमी दरबार में पहुँचा और अपनी शर्त दोहराई। यहाँ भी राजा ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली। राजा ने विद्वानों को भी असली और नकली हीरे से फ़र्क़ करने का आदेश दिया। लेकिन यहाँ भी कोई फ़र्क़ नहीं कर सका। राजा उदास हो गया और उसने खजांची को ख़ज़ाने से 5000 मुद्रा लाने का आदेश दिया। तभी एक दरबारी जो जन्म से अंधा था, उसने कहा, “महाराज खजांची को भेजने से पहले एक बार मुझे इन हीरों को परखने का अवसर दिया जाए।” राजा तैयार हो गया। वह अंधा दरबारी बारी-बारी से दोनों को छूकर एक टुकड़े की तरफ़ इशारा करके बोला, “महाराज, यह है सच्चा हीरा और दूसरा वाला साधरण काँच का टुकड़ा है।
हीरा वाले आदमी की आँखें चमकी और वह बोला, “बिल्कुल सही कहा आपने। लेकिन आपने इसे पहचाना कैसे?”
उस अंधे आदमी ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर वहाँ राजा सहित सभी की आँखें खुली की खुली रह गईं। वह बोला, “जो भी सच्चा हीरा होता है, वह धूप में भी ठंडा रहता है जबकि साधारण काँच थोड़ी सी गर्मी मिलते ही गर्म हो उठता है, बिल्कुल हम इंसानों की तरह।”
दोस्तों, यदि हम बड़ी सफलता मिलने पर दिमाग से शांत रहते हैं, तो हम उच्च कोटि के इंसान हैं और यदि हमारा दिमाग थोड़ी-सी सफलता मिलते ही सातवें आसमान पर उड़ने लगे तो यह समझने की ज़रूरत है कि कहीं हम उस सस्ते और साधारण काँच की तरह तो नहीं। यदि हम इस फ़र्क़ को समझ पाएं तो हमारी छवि एक बेहद लोकप्रिय मित्र की होगी ।
ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Naye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)
