Manto story in Hindi: मेरी बीबी ने ताहिरा को डांटा, बकवास बंद करो।
‘यह बकवास सिर्फ तलाक से ही बंद होगी,’ यह कह कर ताहिरा टांग हिलाने लगी।
‘सुन लिया तुमने?’ अता मुझसे कह कर फिर टेलीफोन की तरफ बढ़ा। लेकिन मैं बीच में खड़ा हो गया। ताहिरा मेरी बीबी को बताने लगी, ‘मुझे तलाक देकर उस चंडी एक्ट्रेस से ब्याह रचाएगा।’
‘बजा,’ मेरी बीवी ने ताहिरा से पूछा, ‘और तू?’ ताहिरा ने माथे पर बालों के पसीने में भीगी हुई झालर हाथ के ऊपर की, ‘मैं तुम्हारे इस यूसुफ-ए-सानी इनायत खां से।’
‘बस, अब पानी सिर से गुजरा रहा है, हद हो गई है। तुम हट जाओ एक तरफ …’ कहते न कहते अता ने डायरेक्टरी उठाई और नंबर खोजने लगा।
नंबर मिल जाने पर जब वह टेलीफोन करने लगा तो मैंने उसे रोकना उचित नहीं समझा। उसने एक दो बार डायल किया लेकिन नंबर नहीं मिला।
मुझे मौका मिला तो मैंने उसे सख्त लफ्जों में कहा, ‘अपने इरादे को छोड़ दे।’
मेरी बीवी ने भी उससे विनती की मगर वह न माना। इस पर ताहिरा ने कहा, ‘सफिया, तुम कुछ न कहो। इस आदमी के पहलू में दिल नहीं पत्थर है। मैं तुम्हें वे खत दिखाऊंगी जो शादी के पहले इसने मुझे लिखे थे। उस वक्त मैं इसके दिल का चैन और आंखों का नूर थी। मेरी जबान से निकला हुआ सिर्फ एक लफ्ज इसके मुर्दा तन में जान डालने के लिए काफी था। मेरे चेहरे की तरफ एक झलक देखकर यह खुशी से मरने के लिए तैयार था, लेकिन आज इसे मेरी जरा भी परवाह नहीं।’
अता ने एक बार फिर नंबर मिलाने की कोशिश की।
ताहिरा बोलती रही, ‘मेरे बाप के संगीत से भी इसे इश्क था। इसे गर्व था कि इतना बड़ा आर्टिस्ट मुझे अपना दामाद बनाना मंजूर कर रहा है। शादी की मंजूरी हासिल करने के लिए उसने उसके पांव तक दबाए। पर आज उसे उनका कोई ख्याल नहीं।’
अता डायल घुमाता रहा। ताहिरा मुझ से बोली, ‘आपको यह भाई जान कहता है। आपकी इज्जत करता है। कहता था जो कुछ भाईजान कहेंगे मैं मानूंगा। लेकिन आप देख ही रहे हैं। टेलीफोन कर रहा है काजी को, मुझे तलाक देने के लिए।’
मैंने टेलीफोन एक तरफ हटा दिया, ‘अता अब छोड़ो भी।’
‘नहीं।’ यह कह कर उसने टेलीफोन अपनी तरफ घसीट लिया।
ताहिरा बोली, ‘जाने दीजिए भाईजान! इसके दिल में मेरा क्या टूटू का भी खयाल नहीं।’
अता तेजी से पलटा, ‘नाम न लो टूटू का।’
ताहिरा ने नथुने फुलाकर कहा, ‘क्यों नाम न लूं उसका?’ अता ने रिसीवर रख दिया, ‘वह मेरा है।’
ताहिरा उठ खड़ी हुई, ‘जब मैं तुम्हारी नहीं हूं तो वह कैसे तुम्हारा हो सकता है? तुम तो उसका नाम भी नहीं ले सकते।’ अता ने कुछ देर सोचा, ‘मैं बंदोबस्त कर लूंगा।’ ताहिरा के चेहरे पर एकदम जर्दी छा गई, ‘टूटू को छीन लोगे मुझसे?’ अता ने बढ़े दृढ़ स्वर में जवाब दिया, ‘हां।’
‘जालिम।’
ताहिरा के मुंह से एक चीख निकली। बेहोश होकर गिरने ही वाली थी कि मेरी बीवी ने उसे थाम लिया। अता परेशान हो गया। पानी के छींटे, यूडि कोलोन, स्मैलिंग साल्ट, डाक्टरों को टेलीफोन। अपने बाल नोंच डाले। कमीज फाड़ डाली।
ताहिरा होश में आई तो वह उसका हाथ अपने हाथ में लेकर थपकने लगा, ‘जानेमन! टूटू तुम्हारा है। टूटू तुम्हारा है।’ अता ने ताहिरा की आंसुओं भरी आंखों को चूमना शुरू कर दिया, ‘मैं तुम्हारा हूं। तुम मेरी हो। टूटू तुम्हारा ही है, मेरा भी है।’
मैंने अपनी बीवी को इशारा किया। वह बाहर निकली तो मैं भी थोड़ी देर के बाद चल दिया। टैक्सी खड़ी थी हम दोनों बैठ गए। मेरी बीवी मुस्करा रही थी। मैंने उससे पूछा, ‘यह टूटू कौन है?’
मेरी बीवी खिलखिलाकर हंस पड़ी, ‘उनका लड़का।’
मैंने हैरत से पूछा, ‘लड़का?’
मेरी बीवी ने हां में सिर हिला दिया।
मैंने और ज्यादा हैरत से पूछा, ‘कब पैदा हुआ था। मेरा मतलब है….’
‘अभी पैदा नहीं हुआ, चौथे महीने में है।’
‘चौथे महीने….?’
इस घटना के चार महीने बाद मैं खाली दिमाग बाहर बालकनी में बैठा था कि टेलीफोन की घंटी बजनी शुरू हुई। बड़ी बेदिली से उठने वाला था कि आवाज बंद हो गई। थोड़ी देर बार मेरी बीवी आई। मैंने उससे पूछा, ‘कौन था?’
‘यजदानी साहब।’
‘कोई नई लड़ाई थी?’
‘नहीं। ताहिरा को मरी हुई लड़की हुई है।’ यह कह कर वह रोती हुई अंदर चली गई। मैं सोचने लगा, अगर अब ताहिरा और अता का झगड़ा हुआ तो उसे कौन टूटू चुकाएगा।
ताहिरा भी मन से ड्रामा पसंद था। इश्क और शादी से पहले सहेलियों के साथ बाहर शापिंग को जाती थी तो उसके लिए मुसीबत बन जाती थी। किसी गंजे को देखते ही उसके हाथों में खुजली मचने लगती थी। सहेलियों से चिरौरी करती, ‘मैं उनके सिर पर एक धौल तो जरूर जमाऊंगी चाहे तुम कुछ भी करो।’
जहीन थी एक बार उसके पास कोई पेटीकोट नहीं था। उसने कमर के चारों ओर इजारबंद बांधा और उसमें साड़ी उड़स कर सहेलियों के साथ चल दी।
ताहिरा वाकई अता यजदानी के इश्क में फंसी हुई थी या नहीं, इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता था। यजदानी का पहला इश्किया खत मिलने पर उसका व्यवहार कुछ इसी किस्म का था। यूं तो मजबूत चरित्र की लड़की थी यानी जहां तक चरित्रवान होने का संबंध है, लेकिन थी खिलंदड़ तबियत की।
अपने शौहर से उसका यह जो रोजाना लड़ाई-झगड़ा होता था, मैं समझता हूं एक खेल ही था। लेकिन जब हम वहां पहुंचे और हालात देखे तो मालूम हुआ कि यह खेल बड़ी खतरनाक सूरत अख्तियार कर चुका था।
हमारे दाखिल होते ही वह शोर मचा कि समझ में ही न आए यहां हुआ क्या है।
ताहिरा और यजदानी दोनों ऊंचे-ऊंचे सुरों में बोलने लगे थे, शिकवे, ताने-तोहमतें। पुराने मुर्दों पर नई लाशें, नई नाशों पर पुराने मुर्दे। जब दोनों थक गए तो आहिस्ता-आहिस्ता लड़ाई की कुछ-कुछ वजह समझ में आने लगी।
ताहिरा की शिकायत थी कि अता स्टूडियो की एक वाहियात एक्ट्रेस को टैक्सियों में लिए-लिए फिरता है।
यजदानी का कहना था कि यह सरासर गलत है।
ताहिरा कुरान उठाने के लिए तैयार थी कि अता का उस एक्ट्रेस से नाजायाज रिश्ता है। जब यजदानी ने इसे सरासर गलत बताया तो ताहिरा ने बड़ी तेजी के साथ कहा, ‘कितने पारसा बनते हो, यह आया जो खड़ी है, क्या तुमने इसे चूमने की कोशिश नहीं की थी….वह तो मैं अंदर से आ गई….’
यजदानी ने कहा, ‘बकवास बंद करो।’ इसके बाद वही शोर फिर मचा जो हमारे वहां पहुंचने के समय मच रहा था। मैंने समझाया मेरी बीबी ने समझाया। मगर कोई असर न हुआ। अता को मैंने डांटा भी, ‘यह सरासर तुम्हारी ज्यादती है। माफी मांगो और यह किस्सा खत्म करो।’
अता ने बड़ी संजीदगी के साथ मेरी तरफ देखा, ‘सआदत, यह किस्सा यूं खत्म नहीं होगा। मेरे बारे में यह औरत बहुत कुछ कह चुकी है, लेकिन मैंने इसके बारे में एक शब्द भी मुंह से नहीं निकाला। इनायत को जानते हो तुम?’
‘इनायत?’ मैंने पूछा, ‘कौन इनायत?’
‘प्ले बैक सिंगर।’ अता ने खुलासा किया।
‘हां-हां जानता हूं।’ मैंने हामी भरी।
‘अव्वल दर्जे का छंटा हुआ बदमाश है…. मगर…. यह औरत हर रोज उसे यहां बुलाती है। बहाना यह है कि……’
ताहिरा ने उसकी बात काट दी “बहाना-वहाना कुछ नहीं, बोलो तुम क्या कहना चाहते हो?”
अता ने बहुत ही नफरत के साथ कहा, ‘कुछ नहीं।’
ताहिरा ने अपने माथे पर से बालों की झालर एक तरफ हटाई, ‘इनायत मेरा चाहने वाला है-बस।’
अता ने इनायत को मोटी-सी और ताहिरा को छोटी-सी गाली दी।
फिर शोर मचा…. एक बार फिर वही कुछ दोहराया गया जो पहले कई वार कहा जा चुका था। मैंने और मेरी बीवी ने बीच-बचाव किया मगर नतीजा वही सिफर। मुझे ऐसा मालूम होता था जैसे अता और ताहिरा दोनों को अपने झगड़े से तसल्ली नहीं हुई है। लड़ाई के शोले एकदम भड़कते थे और कोई बिना किसी नतीजे पर पहुंचे ठंडे हो जाते थे। थोड़ा थम कर दोनों फिर भड़कते थे लेकिन होता-हवाता कुछ नहीं था।
मैं बहुत देर तक सोचता रहा कि अता और ताहिरा चाहते क्या हैं, मगर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। मुझे बड़ी उलझन हो रही थी। दो घंटे से बक-बक और झक-झक जारी थी। लेकिन अंत खुदा जाने कहां भटक रहा था।
तंग आकर मैंने कहा, ‘भई, अगर तुम दोनों की आपस में नहीं निभ सकती तो बेहतर यही है कि अलग हो जाओ।’
ताहिरा खामोश रही। लेकिन अता ने कुछ क्षण गौर करने के बाद कहा, ‘अलग नहीं-तलाक।’
ताहिरा चिल्लाई, ‘तलाक, तलाक, तलाक। देते क्यों नहीं तलाक। मैं कब तुम्हारे पांवों में लौटी हूं कि तलाक न दो।’ अता ने बड़े दृढ़ स्वर में कहा, ‘दे दूंगा और बहुत जल्द।’
ताहिरा ने अपने माथे पर से बालों की झालर एक तरफ हटाई, ‘आज ही दो।’
अता उठकर टेलीफोन की तरफ बढ़ा, ‘मैं काजी से बात करता हूं।’
जब मैंने देखा मामला बिगड़ रहा है तो उठकर अता को रोका, ‘बेवकूफ न बनो, बैठो आराम से।’
ताहिरा ने कहा, ‘नहीं, भाई जाना। आज मत रोकिए।’
