Hindi Story: जैसे ही जगत के दोस्तों को मालूम हुआ कि उसने कॉलेज की परीक्षा में टॉप किया है तो उसके घर मुबारक देने वालों की लाइन लग गई। जगत के घरवाले भी बड़ी ही खुशी से सभी आने वालों का स्वागत करने के साथ उन्हें मिठाइयां खिला रहे थे। सबसे बड़ी खुशी की बात यह थी कि जगत अपने इलाके का पहला ऐसा सौभाग्यशाली लड़का था जिसे इतनी बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी।
इतनी बढ़िया खबर सुनते ही जगत की गली में रहने वाले शराबी अंकल के नाम से मशहूर एक पड़ोसी भी बधाई देने आ पहुंचे। जगत के पिता ने नशे की हालात में बुरी तरह से चूर उस पड़ोसी से कहा कि लगता है आज तो पूरी बोतल खत्म करके आ रहे हो। उस नशेड़ी ने कहा कि आज मजबूरी में मुझे सारी बोतल खत्म करनी पड़ी वरना मैं इतनी शराब कभी नहीं पीता। जगत के पिता ने कहा कि ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि तुम्हें पूरी बोतल ही पीनी पड़ गई। शराबी अंकल ने बताया कि आज जब मैंने दारू पीनी शुरू की तो उस बोतल का ढ़क्कन कहीं गुम गया। बस फिर मैं क्या करता, मजबूरी में मुझे सारी बोतल पीनी पड़ी। शराबी अंकल की इन ऊलजलूल हरकतों को देख कर वहां बैठे सभी लोग हंस रहे थे।
खुशी भरे इस माहौल में किसी को पता ही नहीं लगा कि कब दिन ढल गया और शाम हो गई। सांझ ढलते ही जगत के कुछ दोस्तों ने उसके आगे फरमाइश रख दी, आज रात को एक बढ़िया-सी पार्टी करेंगे। कुछ दोस्तों ने कहा कि अब इतनी जल्दी पार्टी का इंतजाम करना तो मुश्किल है, हम किसी होटल में चल कर इस खुशी का जश्न मनाते हैं। जब जगत ने अपनी मम्मी-पापा से इस बारे में जिक्र किया तो पहली बार में तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। परंतु जगत के दोस्तों के बार-बार जिद्द करने पर उन्होंने सभी लड़कों को इस शर्त पर पार्टी में जाने की इजाजत दे दी कि आप लोग वहां पर दारू बिल्कुल नहीं पीयोगे। कुछ ही देर में जगत अपने सभी साथियों के साथ शहर के एक बड़े होटल में पार्टी का लुत्फ उठा रहा था। पार्टी शुरू होने के कुछ ही देर बाद जगत के अधिकतर दोस्त दारू न पीने के अपने वादे को भूलकर नशे में झूम रहे थे। अपने करीबी दोस्तों के बार-बार कहने के बावजूद जगत ने दारू के गिलास को छुआ तक नहीं, बल्कि एक गिलास में कोल्ड ड्रिंक और सोडा मिला कर ऐसा पेय बना लिया जो दूर से देखने में बिल्कुल असली दारू की तरह लग रहा था। देर रात तक मौज-मस्ती करने के बाद सभी लोग धीरे-धीरे अपने घर की ओर निकल गये। उधर सारी रात इंतजार करने के बाद भी जब जगत न तो अपने घर पहुंचा और न ही उससे कोई बात हो पाई तो उसके मां-बाप ने सभी दोस्तों को सम्पर्क करना शुरू किया। एक-दो दोस्तों ने तो यहां तक कह डाला कि उसने रात को बहुत अधिक शराब पी ली थी। इसलिये हो सकता है कि वो वहीं होटल में ही सो रहा हो।
जब जगत के घरवाले उसे तलाशने के लिये होटल की ओर निकले तो रास्ते में सड़क के किनारे उसकी मोटरसाइकिल गिरी पड़ी थी। जब थोड़ा नजदीक गये तो पास के एक दुकानदार ने बताया कि रात में किसी जवान लड़के का बहुत बुरी तरह से एक्सीडेंट हो गया था। एक्सीडेंट के बाद पुलिस वाले उस लड़के को तो अस्पताल ले गये थे। जगत के मम्मी-पापा घबराए हुए जब अस्पताल पहुंचे तो वहां जाते ही डॉक्टर ने उन्हें बताया कि आपका बेटा बहुत ही गंभीर स्थिति में है। अपने बेटे की यह हालात देख कर जगत की मम्मी का रो-रो कर बुरा हाल था। उनका जवान बेटा बेहोशी की नींद में उनके सामने लेटा हुआ था। बेटे के चेहरे की ओर देखते हुए जगत की मां को ऐसा महसूस हुआ कि जैसे जगत उनसे कह रहा है कि मां मुझे अच्छे से याद है कि आपने मुझे नशा करने से मना किया था, इसलिये मैंने अपना वादा निभाते हुए किसी भी प्रकार के नषे को हाथ तक नहीं लगाया। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि मैंने भी सदा आपके द्वारा दिखाई हुई राह पर चलने का प्रयत्न किया। मैं जानता हूं कि आपने आज तक जो कुछ भी कहा है वो सदा मेरे भले के लिये ही कहा है। कल रात भी मैं पूरी जिम्मेदारी और सभी नियमों का पालन करते हुए अपनी मोटरसाइकिल पर घर लौट रहा था। अचानक दूसरी ओर से एक कार बहुत ही तेजी से आई और उसने मुझे टक्कर मार दी। जैसे ही मैं सड़क पर गिरा, मुझे एक पुलिस वाले की बात सुनाई दी कि कार वाले ने बहुत अधिक शराब पी रखी है। अगले ही क्षण पुलिस वाले ने उस कार मालिक से कुछ रुपये लेने के बाद कहा कि तुम आराम से जाओ मैं यही केस बना दूंगा कि इस लड़के ने शराब पीकर एक्सीडेंट किया है। मां आज मैं दूसरों की गलती की कीमत चुका रहा हूं। मां मेरे शरीर से बहुत खून बह रहा है, मुझे बहुत तकलीफ हो रही है। काश उस समय तुम वहां होती और यह सब देखती कि कैसे एक पल में किसी दूसरे की भूल के कारण एक बेकसूर को उसकी सजा भुगतनी पड़ रही थी।
मां मैं अभी भी कसम खा कर कहता हूं कि मेरे सभी दोस्तों ने दारू पीने के लिये बहुत जोर डाला था, लेकिन मैंने आपकी बात मानते हुए शराब को छुआ तक नहीं। मां मैं इस समय बहुत तकलीफ में हूं और जिस कार वाले ने शराब पीकर मुझे टक्कर मारी थी, वो तो शायद अपने घर में चैन से सो रहा होगा। इस समय मेरे मन में बस यही ख्याल बार-बार आ रहा है कि काश उस आदमी की मां ने भी उसे समझाया होता कि दारू पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिये। यदि इतनी-सी बात उसने समझ ली होती तो आज उसकी गलती के कारण मुझ जैसे निर्दोष इंसान को उसके गुनाह की सजा नहीं भुगतनी पड़ती। मां मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि इतनी चोटें लगने के बाद मैं कभी बिस्तर से उठ भी पाऊंगा या नहीं।
मुसीबत की इस घड़ी में मैं तुमसे एक सवाल पूछना चाहता हूं कि जब मैंने कोई गलती नहीं की तो फिर दूसरों की गलती के कारण मुझे यह कष्ट क्यूं उठाना पड़ रहा है? जगत और उसके परिवार की पीड़ा को महसूस करते हुए जौली अंकल की आंखों के आंसू, नशा करके गाड़ी चलाने वालों से यही कह रहे हैं कि यदि आप किसी के जीवन की राह में फूल नहीं बिखेर सकते तो आपको कांटें बिछाने का भी कोई हक नहीं बनता। दुनिया वाले चाहे कुछ भी कहते रहे, लेकिन जगत की मां के कानों में बार-बार अपने बेटे के यही शब्द गूंज रहे थे कि मां मैंने शराब नहीं पी, मां मैं शराबी नहीं। सभी लोगों की सुनें, पर अपने दिल की बात केवल कुछ खास ही लोगों से कहें।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
