गृह प्रवेश

    कमरे के बिछौने पर बिछे चादर जिस पर महीनों से आनन्द के उन पलों की एक सिलवट ना थी, उसे ठीक करती हुई पद्मा लेट गई.हर‌ रात वो बिस्तर के एक सिरे पर चुपचाप यूं सिमट जाती मानों पूरे बिस्तर पर कांटे निकल आए हो.कोमल सा दिखने वाला यह शय्या उसे शूल की तरह चुभने लगता. उसके जीवन का खालीपन उसके कमरे के सन्नाटे को बढ़ा ,उसे भयभीत करने लगता और पद्मा की रैन आंखों ही आंखों में कट जाती.

    कई रातों से पद्मा सोई नहीं थी. मन में चल रहे अंतरद्वन्द पर आज उसने विराम लगा  दिया.घर पर अपना फैसला सुनाते ही‌ सासू मां की भौंहें तन गई, लेकिन अगले ही क्षण पद्मा के असहनीय पीड़ा का एहसास होते ही वे पद्मा के फैसले के संग आ खड़ी हुई.पद्मा के सर पर अपना हाथ रखती हुई बोली- ” बेटा तेरा निर्णय ही अंतिम होगा.मैं तेरे हर फैसले  के साथ हूं”.सासू मां का इस तरह पद्मा के पक्ष आ‌ खड़ा होना, पद्मा को भीतर से अपने फैसले के प्रति सशक्त बना रहा था.

    श्याम संग जुड़े अपने रिश्ते जो अब केवल बंधन थे,आज पद्मा अपने आप को उससे मुक्त पा‌ रही थी.कल अपने फैसले को साकार रूप देना है यह सोचती हुई पद्मा के नयनों में कब निद्रा समां गई उसे पता ही नहीं चला.

    चिड़ियों की चहचहाहट और लालिमा बिखेरती सूरज की पहली किरण के साथ पद्मा की नींद खुली. बड़े दिनों बाद आज वो चैन की नींद सोई‌ थी.भोर होते ही घर के आंगन में खूबसूरत सी रंगोली बना,गेंदे के फूलों से ‌बनी वंदन माला घर के मुख्य दरवाजे पर सजा,घर को प्यार भरी नजरों से निहारने लगी.

    दस बसंत का लम्बा सफर तय किया है उसने इस घर के आंगन में,जीवन के हर मौसम को बड़े करीब से देखा है,पर कभी विचलित नहीं हुई.जब से ‌ब्याह कर आई है, घर के हर कोने को अपने प्यार और स्नेह से सींचती रही.ना जाने कहां चूक हुई…..?इस बार जो पतझड़ आया ठहर ही गया उसके जीवन में.

    श्याम महीनों बाद घर लौट रहे थे. उनके जाने के बाद पद्मा धैर्यपूर्वक हर परिस्थिति का‌ सामना करती रही.हिम्मत दिखाती‌ हुई उसनेे पूरे घर को संभाल रखा था.अन्दर से टूट‌  चुकी पद्मा ने कभी अपने घर को बिखरने नहीं दिया.श्याम के बगैर उसकी जिंदगी जलते हुए अंगारों पर चलने जैसा था.पद्मा अपने ही ख्यालों में खोई घर की‌ ओर देख रही थी, तभी‌ बाली पद्मा से लिपटती हुई बोली-“भाभी मैंने पूजा ‌की सारी तैयारियां कर ली है.पूजा की सामग्री पूजा स्थान पर रख दिया है.आप चल कर देख लें और हां एक  most important बात,मां ने आप को जल्दी तैयार होने को कहा है.पंडित जी आने ही वाले हैं”.

    बाली के गालों को थपथपाती ,पद्मा मुस्कुराती हुई बोली-“बस मैं अभी रेडी‌‌ होती हूं. पहले तुम बताओ बाबू जी जागे या नही”.

    “बाबू जी तो कब का जाग गए,पर आप से नाराज़ हैं ना इसलिए मुंह फुलाए बैठे हैं.”

    यह सुन पद्मा के चेहरे का रंग उड़ गया और वो उदास हो गई.पद्मा की उदासी को भांप बाली कहने लगी-“भाभी आप क्यों दुखी होती है.आप चिंता ना करे,सब ठीक हो जाएगा.बाबूजी तो बस परी और उसके गृह प्रवेश की बात को लेकर परेशान हैं”.

    “जानती हूं बाबू‌‌जी मुझ से नाराज़ हैं, लेकिन मैं यह भी जानती हूं वे सब से ज्यादा प्यार भी मुझसे ही करते हैं.मुझे पूर्ण विश्वास है,हम सब ने जैसे सच्चाई स्वीकार कर ली है, बाबूजी भी परी की सच्चाई स्वीकार कर उसे अवश्य अपना लेंगे”.इतना कह पद्मा रसोई‌ की ओर बढ़ गई.

    हाथों में गर्म चाय की प्याली लिए पद्मा बाबूजी के कमरे में पहुंची.बाबूजी को आंखें बंद कर आराम कुर्सी पर बैठा देख,पद्मा चाय की प्याली सामने रखे टेबल पर रखती हुई बोली-“बाबूजी आप की चाय.आस पड़ोस और नाते रिश्तेदारों के आने का समय हो  चला.”

    इतना कह जब पद्मा जाने लगी बाबूजी ने धीरे से कहा-“रुको, मेरे पास आओ बेटा”.

    पद्मा बाबूजी के समीप आ घुटनों के बल बैठ अपना सर बाबूजी की गोद में रखती हुई बोली-” क्या आप मुझसे नाराज़ हैं “

    “नहीं बेटा…क्या मैं तुमसे नाराज़ हो सकता हूं? मैं तो बस इतना चाहता हूं तुम दोबारा अपने निर्णय पर विचार करो”.

    ” पुनः विचार की अब कोई गुंजाइश नहीं रही.बाबूजी आप मेरी ताकत हैं.ऐसा कह मुझे कमजोर मत बनाइए”.

    बाबूजी बिना कुछ कहे पद्मा के सिर पर हाथ फेरने लगे,पद्मा थोड़ी देर बाबूजी की गोद पर अपना सर रख यूं ही बैठी रही फिर अपने कमरे में आ गई.

    वार्डरोब से डिज़ाइनर सिल्क साड़ी निकाल पद्मा तैयार होने लगी.तैयार हो जैसे ही उसने माथे पर कुमकुम लगाने के लिए डिबिया उठाई,उसके सामने श्याम और उसकी कही बातें चलचित्र की भांति चलने लगी-

    “मैं तुम से प्यार नहीं करता‌.मैं जा रहा हूं.”

 यह सुनते ही पद्मा के पैरों तले जमीन खिसक गई.वो समझ ही नहीं पाई‌ आखिर श्याम ऐसा क्यों कह रहे हैं.प्यार नहीं करते… इसका क्या मतलब? इतने सालों से जो‌ उनके बीच था वो प्यार नही था….तो क्या था? उसकी गलती क्या‌ है…?ऐसे कई सवाल पद्मा के होंठों पर आ कर ठहर गए और वो जड़ सी खड़ी, श्याम को अनवरत सुनती रही. 

    श्याम बिना रुके कहे जा रहा था -” मैं अपने ऑफिस की सहकर्मी रती से प्यार करता हूं .हमारी दो साल की बेटी भी है,और अब मैं उन्हीं के साथ रहूंगा.तुमने कभी अपने आप को शीशे में देखा है.तुम्हें तो सलीके से ‌साड़ी पहननी भी नहीं आती.मैं और तुम्हारे साथ अपना जीवन नहीं गुज़ार सकता.मेरा तुम से और इस घर से अब को‌ई वास्ता नहीं.मैं जा रहा‌‌ हूं.”

   श्याम को जाता देख मां उसकी बांहें पकड़ गिड़गिड़ाने लगी-“बेटा हमें इस तरह छोड़ कर मत जाओ.तुम्हारे बाबूजी टूट जाएंगे.यह सब कहते वक्त मां करीब करीब श्याम‌ के पैरों में गिर पड़ी.बाबूजी शांत बैठे सब देख रहें थे मानों उनकी आंखों पर पत्थर पड़ ग‌ए हो. बाली मिन्नतें करती रही.”भैया  please मत जाओ.भाभी का क्या होगा,आप के दोनों बच्चों का क्या होगा?” लेकिन श्याम चला गया.

       कुछ महीनों बाद श्याम के मोबाइल नंबर से फोन देख,पद्मा चौंक ग‌ई .फोन किसी अजनबी का था.उस‌ने बताया सड़क दुघर्टना में श्याम बुरी तरह घायल हो गया है.उसकी हालत गंभीर है.यह सुन पद्मा भागती हुई अस्पताल पहुंची तो पता चला श्याम के साथ जो महिला थी उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई, साथ में एक छोटी बच्ची ‌भी थी जिसकी देखभाल के लिए कोई नहीं था इसलिए उसे अनाथालय भेज दिया गया. अचानक बाली की आवाज से पद्मा वर्तमान में लौट आई.

       “भाभी सब आ ग‌ए है.भैया‌ भी, चलिए पूजा शुरू होने वाली है.”

       “तुम ‌चलो मैं आती हूं ” कह पद्मा कुमकुम की डिबिया एक ओर रख, अपनी साड़ी से मैच करता बिंदी लगा पूजा स्थान पर  पहुंची.पद्मा को क़रीने से साड़ी में लिपटा  देख श्याम उसे देखता ही रह गया.पद्मा के मुख मंडल की आभा‌ में अलग ही चमक थी. पहली बार पद्मा को कुमकुम के बदले डिज़ाइनर बिंदी में देख बाली के लबों पर मुस्कान दौड़ गई.

         पंडित जी को पूजा प्रारंभ करता देख पद्मा,पंडित जी की ओर मुखातिब होती हुई कहने लगी_” पंडित जी ज़रा रूकिए, हमारे परिवार के एक और सदस्य का आना अभी बाकी है “.यह सुन वहां उपस्थित सभी एक दूसरे को आश्चर्य से देखने लगें.

         उसी वक्त एक महिला छोटी सी बच्ची को अपने साथ लिए वहां पहुंची और पद्मा की ओर देखती हुई बोली-” पद्मा जी ये परी के‌‌ एडाप्सन ‌के कुछ पेपर्स है, जिसमें आप के हस्ताक्षर की जरूरत है. पद्मा उन पेपर्स पर ‌हस्ताक्षर कर परी के माथे को चूमती हुई पूजा पर मौजूद सभी नाते रिश्तेदारों को संबोधित करती हुई बोली_”ये परी है मेरी बेटी और हमारे परिवार की नई सदस्य”

         पद्मा की बातें सुन श्याम मन में ग्लानि और कृतज्ञता का भाव लिए कहने लगा-“पद्मा  मैं आजीवन तुम्हारा ऋणी रहूंगा.तुमने इस बिन मां की बच्ची को आंचल में ले मुझे माफ़ कर…..”

         पद्मा बीच में ही श्याम को रोकती हुई बोलीं-“तुम्हारे कर्मों की सज़ा इस मासूम बच्ची को क्यों मिलें.मैंने केवल परी को अपनाया है.तुम्हें माफ़ ‌नहीं किया है.जब तक तुम पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते इस घर में एक बूढ़े मां-बाप के बेटे, एक बहन के भाई और इन बच्चों के पिता बन कर रह सकते हो लेकिन उसके बाद तुम्हें जाना होगा क्योंकि अब तुम मेरे पति नहीं रहे और किसी पराए   पुरुष के लिए मेरे घर में कोई स्थान नहीं….।

श्रीमति प्रेमलता यदु