Short Story in Hindi: कविता और नयनतारा… नाम अलग, लेकिन रूह एक जैसी। लखनऊ की पुरानी गलियों में पली-बढ़ी ये दोनों लड़कियाँ ज़िंदगी के हर मोड़ पर एक-दूसरे का हाथ थामे रहीं। स्कूल के पहले दिन से लेकर कॉलेज की आखिरी परीक्षा तक, हर खुशी, हर आंसू, हर राज़ उन्होंने एक-दूसरे के साथ बांटे। नयनतारा हमेशा से चुलबुली, बातूनी और थोड़ी सी फिल्मी थी। वहीं कविता शांत, गहराई से सोचने वाली और किताबों में खोई रहने वाली लड़की थी। उनके स्वभाव अलग जरूर थे, लेकिन दिल एक जैसा सच्चा, मासूम और बेहद वफ़ादार।

कॉलेज के तीसरे साल में, उनकी जिंदगी में आया आरव मल्होत्रा। नया गेस्ट लेक्चरर, जो सॉफ्ट स्किल्स पढ़ाने आया था। उम्र कोई 28 के आस-पास, गहरी आवाज़, हल्की दाढ़ी और वो आंखें जैसे सीधे दिल में उतर जाएं।

पहले नयनतारा की नजरें उस पर पड़ीं। उसने कविता की कोहनी मारी, “देख तो, कॉलेज में हीरो आया है!”

कविता हंस दी। लेकिन जब आरव ने क्लास में पहली बार बोलना शुरू किया, कविता को कुछ हुआ। ऐसा कुछ, जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था।

समय बीतता गया। नयनतारा आरव की क्लास के बाद बहाने ढूंढकर उससे बात करने लगी। वही चुलबुला अंदाज़, वही फिल्मी हरकतें और आरव भी उसकी बातों पर मुस्कुरा देता।

कविता दूर से ये सब देखती रही। उसे लग रहा था कि शायद नयनतारा और आरव की बन सकती है। लेकिन उसकी आंखें हर दिन थोड़ी और उदास होती जा रही थीं।

एक शाम, जब दोनों सहेलियाँ छत पर बैठी थीं, नयनतारा ने कहा, “कविता, मुझे लगता है… मुझे आरव से प्यार हो गया है।”

कविता का दिल जैसे किसी ने मरोड़ दिया हो। लेकिन उसने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया। “वो अच्छा है, और तुम उसे खुश रख सकोगी।”

“तू कुछ छुपा रही है, ना?” नयनतारा ने उसकी आंखों में झांका।

कविता का गला भर आया। “मैं भी… शायद उसे चाहने लगी हूं।”

खामोशी छा गई। चांदनी के नीचे, दो सखियों की रूहें किसी अनकहे तूफान से गुज़र रही थीं।

अगले कुछ दिनों तक दोनों थोड़ी अजनबी-सी हो गईं। एक-दूसरे से नज़रे चुराने लगीं। लेकिन फिर एक दिन, कॉलेज में आरव ने कविता को अकेले में बुलाया।

“कविता, मैं जानता हूं तुम्हारी और नयनतारा की दोस्ती कितनी गहरी है। लेकिन मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।”

कविता का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

“मुझे नयनतारा बहुत प्यारी लगती है, पर तुम… तुम मुझे समझती हो। तुम्हारी आंखों में जो सच्चाई है, वो कहीं और नहीं दिखती। मैं तुम्हें पसंद करता हूं।”

कविता कुछ बोल नहीं पाई। उसके लिए ये इमोशन खुशी का भी था और गिल्ट का भी।
उसी रात उसने नयनतारा को सब बता दिया।

नयनतारा बहुत देर तक चुप रही। फिर बोली “तो अब क्या होगा? क्या हमारी दोस्ती एक लड़के के लिए टूट जाएगी?”

“नहीं,” कविता की आंखें भर आईं, “मैं आरव से कह दूंगी कि ये मुमकिन नहीं।”

“और अगर मैं कहूं कि तुम पीछे मत हटो?” नयनतारा ने आंखें पोंछते हुए कहा।
“क्या तुम मुझसे ये उम्मीद करती हो कि मैं तुम्हारे लिए खुद को अधूरा कर दूं?”

कविता हैरान थी। “तू… क्या सच में…?”

“हां,” नयनतारा मुस्कराई। “शायद मुझे उससे इश्क नहीं हुआ था, बस एक आकर्षण था। पर जो रिश्ता हमने सालों में बनाया है, वो किसी नए रिश्ते से कम नहीं।”

कुछ महीने बाद, कविता और आरव की शादी हो गई — बेहद सादगी से, नयनतारा की मौजूदगी में। शादी में सबसे ज़्यादा चमक नयनतारा की मुस्कराहट में थी।

वक्त बीतता गया। नयनतारा ने खुद को अपने करियर में झोंक दिया। विदेश गई, वहीं उसे अपने जीवन का असली हमसफर मिला अयान, जो उसे उसकी पूरी आत्मा के साथ समझता था।

जब कविता माँ बनी, सबसे पहले नयनतारा ही उसके पास थी और जब नयनतारा की शादी हुई, तो कविता ने उसकी विदाई में वही गाना गाया जो दोनों बचपन में मिलकर गाया करती थीं।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...