Hindi Story: रेखा ने अपने बेटे से पूछा कि वैसे तो तुम हर समय पढ़ाई से जी चुराते रहते हो, आज ऐसा क्या हो गया कि सारे काम छोड़ कर बड़े ध्यान से पढ़ाई कर रहे हो? बेटे ने जवाब दिया कि मैं आज स्कूल की लाइब्रेरी से यह नई पुस्तक लेकर आया हूं कि बच्चों को कैसे पाला जाये? रेखा ने कहा- ‘लेकिन तुम्हें यह पुस्तक पढ़ने की क्या जरूरत आन पड़ी, यह किताब तो मां-बाप के लिये बनी है।’ रेखा के नटखट बेटे ने कहा कि मैं यह देखना चाहता हूं कि आप लोग मुझे ठीक से पाल रहे हो या नहीं।
रेखा ने हैरान होते हुए कहा कि तुम्हें ऐसा क्यूं लग रहा है कि हम तुम्हारा लालन-पालन ठीक ढंग से नहीं कर रहे। बेटे ने मां को आंख दिखाते हुए जवाब दिया कि मुझे एक बात तो यह समझ नहीं आती कि जब मैं सो रहा होता हूं तो उस समय आप मुझे जागने के लिये कहती हो। जब कभी मैं अपने दोस्तों के साथ खेल रहा होता हूं तो उस समय आप मुझे बार-बार सोने के लिये कहती हो। रेखा ने बेटे से कहा-‘जब तुम थोड़ा बड़े हो जाओगे तो तुम्हें यह सारी बातें धीरे-धीरे समझ आयेगी।’
रेखा की आंख के तारे ने अपनी मां से कहा कि आप सुबह से शाम सारा दिन तो हमें हर काम जल्दी-जल्दी से करने के लिये कहती हो। जब हम किसी विषय के बारे में कुछ बात करते हैं तो हमें सदा एक ही जवाब मिलता है कि यह सब कुछ धीरे-धीरे होता है। बेटे के मुंह से यह जवाब सुनते ही रेखा को कहना पड़ा कि न जानें आजकल कौन तुम्हारे कान भरने लगा है। अभी तुम जिंदगी की ऊंच-नीच के बारे में कुछ जानते नहीं और तुम्हारा दिमाग अभी से आसमान पर चढ़ने लगा है। इससे पहले की रेखा अपने बेटे की अक्ल ठिकाने लगाती, उसकी नज़र दरवाजे पर खड़े ससुर जी पर पड़ी। उन्हें देखते ही वो अपने गुस्से को खून का घूंट समझ कर पी गई।ससुर जी ने कहा कि मैं काफी देर से आप दोनों की बातें सुन रहा हूं। ससुर ने रेखा के सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देते हुए कहा कि बेटी कभी भी किसी प्रकार की आलोचना से मत घबराओ, क्योंकि जो कुछ नहीं कर सकता वह सिर्फ दूसरों के दोष ढूंढता है। जीवन में सबसे आसान काम है बोलना और शिकायतें करना, सबसे कठिन है कुछ करके दिखाना। यह बहुत अच्छी बात है कि तुम्हारा यह छोटा-सा बेटा इस उम्र में इतना कुछ जानना और सीखना चाहता है। जहां तक मैं समझता हूं कि इतना तो तुम भी जरूर जानती होगी कि अगर किसी को अवसर ही न मिले तो फिर चाहे उसमें कितनी बड़ी से बड़ी प्रतिभा और अच्छे से अच्छे गुण हो वो भी कभी निखर नहीं पाते।
दादा ने अपने पोते को अपने पास बिठाते हुए कहना शुरू किया कि जब मैं भी तुम्हारी तरह छोटा था तो मेरे मन में भी इसी तरह के कई सवाल उठते थे। एक दिन मैंने भी अपने दादाजी से पूछा था कि हम सब कुछ जल्दी-जल्दी क्यूं नहीं कर सकते? हमें हर चीज को पाने में इतना समय क्यूं लगता है? जानते हो मेरे दादा ने मुझे समझाया कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली सूर्य और चांद है। लेकिन यह दोनों भी धीरे-धीरे से आते हैं और धीरे-धीरे ही ढल जाते हैं। जब मैंने कहा कि मैं कुछ ठीक से नहीं समझा तो उन्होंने मुझे एक टोकरी में नदी से पानी लाने को कहा। मैंने हंसते हुए कहा कि टोकरी में पानी कैसे लाया जा सकता है, इसमें तो हजारों सुराख हैं।
उनके बार-बार कहने पर मैं उस टोकरी को लेकर नदी की ओर बढ़ गया। जब कुछ देर तक उस टोकरी को नदी में रख कर वापिस लाया तो वो बिल्कुल खाली थी। मेरे दादा ने अगले दिन फिर से उस टोकरी में पानी भर कर लाने को कह दिया। यह सिलसिला कई दिनों तक लगातार चलता रहा। एक दिन मैंने तंग आकर कहा कि आखिर आप मुझे इस प्रकार तंग क्यूं कर रहे हो? आपने जो कुछ भी समझाना है उसे सीधे ढंग से क्यूं नहीं बता देते? दादाजी ने बड़े ही प्यार से मुझे टोकरी दिखाते हुए कहा कि पहले दिन जब तुम टोकरी नदी में लेकर गये थे तो यह बहुत सख्त थी। अब इसे हाथ लगा कर देखो यह कितनी मुलायम हो चुकी है। पहले दिन इस में एक बूंद भी पानी नहीं रुकता था, लेकिन बार-बार इसे नदी में रखने से इसमें मिट्टी और रेत के कई कण जमा हो गये है। जिस कारण से अब इस टोकरी में काफी हद तक पानी रुकने लगा है। यह सारा काम एक दिन में संभव नहीं था, यह सब कुछ धीरे-धीरे करने से ही मुमकिन हो पाया है। ससुर ने रेखा और उसके बेटे को समझाते हुए कहा कि आप दोनों ही प्रतिक्रिया देने में बहुत जल्दी करते हो। हमें इससे सदा बचना चाहिये, इससे बहुत हद तक कटुता खत्म हो जाती है।
एक बात और दूसरों के साथ-साथ स्वयं को जितनी अच्छी तरह समझोगे, जीवन में शांत व सुखी रहना उतना ही सहज हो जाएगा। बेटे जीवन में कुछ भी सीखने के लिये अनुभव का बहुत महत्त्व होता है, असफलता के बाद ही आप जीवन में अनुभवी कहलाते हैं। तुम्हारी यह ज्ञान प्राप्ति की इच्छा मुझे बहुत अच्छी लगी है, इसे कभी भी अंतिम क्षण तक नहीं छोड़ना। ससुर ने रेखा के घर से चलते हुए उससे कहा कि बेटी बच्चे तो हर काम में जल्दी करते ही हैं। परंतु आपको गुस्सा करने की बजाए उसे धीरज से समझाना चाहिये क्योंकि जब कभी आप क्रोध करते हैं तो उससे आपके स्वभाव के साथ आपका पारिवारिक जीवन भी बिगड़ने लगता है।
दादा जी की अनमोल बातें सुन कर जौली अंकल ने भी आज यह ज्ञान प्राप्त कर लिया है कि अपनी मेहनत का फल जल्दी पाने के लिए कभी भी बेचैन नहीं रहना चाहिये वरना आपको ऐसे दुःख होगा जैसे कच्चा और कड़वा फल खा लिया हो। इसलिए तो विद्वान लोग कहते हैं कि सहज पके यानी धीरे-धीरे पकने वाला फल ही मीठा होता है। जीवन में सुखी रहने के लिये धीरे-धीरे अपनी जुबान, आदत और गुस्से पर काबू करना जरूरी है।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
