agyaan ko jaan gaya
agyaan ko jaan gaya

यूनान की देवी डेम्फी ने एक बार घोषणा की-यूनान में सबसे बड़ा ज्ञानी सुकरात है। लोगों ने सुना। वे झूम उठे। कुछ लोग सुकरात को बधाई देने गए। सुकरात विस्मित था। उसने पूछा- “आप लोगों को हो क्या गया? आप मुझे किस बात की बधाई दे रहे हैं?” एक व्यक्ति बोला- ‘आप हमारे देश में सबसे बड़े ज्ञानी हैं। यह बात हमको देवी डेम्फी ने बताई है। सुकरात बोला-आप सब भ्रान्ति में हैं। आपको जो कुछ कहा गया है-वह बिल्कुल गलत है। लोग दौड़कर देवी के पास गए और बोले, माँ! तुमने जो कुछ कहा, सुकरात उसे अस्वीकार कर रहा है। देवी ने कहा- जो कुछ कहा, सत्य कहा है। लोग फिर सुकरात के पास आकर बोले- ‘हमारी देवी ईश्वर का रूप है। वह कभी गलत नहीं कहती।

आप हमें झुठलाएं नहीं और हमारी बधाई स्वीकार करें। सुकरात के सामने समस्या खड़ी हो गई। उससे निपटने की दृष्टि से वह बोले- ‘दो दिन पहले यह बात मेरे सामने आती तो मैं स्वयं इसे स्वीकार कर लेता। पर अब नहीं कर सकता। क्योंकि मैंने अपने आपको पहचान लिया। मैं अपनी भूलों और अज्ञान को जानता हूँ। ऐसी स्थिति में स्वयं को महाज्ञानी कैसे मान सकता हूँ।’

कुछ लोग फिर देवी के पास पहुँचे। उन्होंने सुकरात के कथन को दोहरा दिया। देवी बोली जो व्यक्ति अपने अज्ञान को जानता है, वही सबसे बड़ा ज्ञानी हो सकता है।” जो अपने अज्ञान को नहीं जानता उसके रंग बिगड़ जाते हैं। जो अपने अज्ञान को जानता है, वह अपने आपको जानता है। अपने आपको जानने वाला निष्काम बन जाता है।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)