“तो फिर ये आपका आखिरी फैसला है?”विस्मय से भरे नेत्रों से मैंने उससे पूछा तो वो साधारण रूप रंग वाली, डेढ़ पसली की महिला जिसके चेहरे पर चट्टान सी दृढ़ता थी,वो सपाट, भाव विहीन आंखें से मुझे देखते बोली…
“मैम!जहां आत्म सम्मान नहीं,खुद अपनी निगाहों में गिर जाएं उस संबंध को खींचना बेमानी हो जाता है,ईश्वर की असीम कृपा है कि मेरे पेरेंट्स ने मुझे इतनी तालीम दी है कि मैं अपना भरण पोषण सम्मान से कर सकूं।”
उसके जबाव को सुनकर मैं नतमस्तक थी और मुझे संपूर्ण नारी जाति पर गर्व हो आया पर तभी मेरे ध्यान में वो स्त्री आकर खड़ी हो गई जिसकी वजह से आज इस औरत को इतना बड़ा,कठोर और अजीबोगरीब फैसला लेने पर आमदा होना पड़ा था।
पेशे से वकील हूं,न जाने कितने अजीब किस्से रोजाना सुनती हूं,देखती हूं,लड़ती हूं पर इस किस्से ने मुझे हिला दिया था।
कुछ दिनों पहले की ही बात है जब एक अधेड़ सी उम्र का स्मार्ट आदमी और उससे कुछ कम उम्र की खूबसूरत महिला मेरे चैंबर में आए।
“नमस्कार मैम! मैं रजत पुंडीर और ये रेखा,मेरी महिला मित्र!”
उसने हाथ जोड़कर मुझे नमस्ते की।
गहरी निगाहों से उन्हें देखते मैं बोली,”कहिए!क्या सेवा कर सकती हूं?”,दिल में ख्याल आया,फिर घरवाले इन दोनो की शादी में रुकावट बन रहे होंगे,वो ही चक्कर होगा या अलग जाति या स्टेटस का फर्क…और क्या?
“मैम!हम दोनो शादी करना चाहते हैं…” रजत बोला।
“तो समस्या क्या है?कीजिए!!” मुझे हंसी आ गई थी।
“जी, दरअसल बात ये है कि मैं शादीशुदा हूं”,वो सज्जन निगाह नीचे कर बोला।
“और ये आपका एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर?”मैंने माथे पर बल डालते हिकारत से उन्हें देखते हुए कहा।
“जी…!ये मेरी एक्स हैं,किन्हीं कारण वश हम पहले एक न हो सके लेकिन अब होना चाहते हैं…” उसकी निगाह अब भी जमीन पर ही थी।
“तुम्हारी बीबी जिंदा है?”मैंने प्रोफेशनल होते कहा।
“जी..!रूपाली नाम है उसका,हमारी शादी को छह महीने हुए हैं।”
“इतनी जल्दी मन भर गया उससे तुम्हारा?”कड़वाहट भरे शब्दों में पूछा मैंने उससे।
“जी…ऐसा नहीं है…” वो बोला।
“लड़ती है तुमसे?”
“बिल्कुल नहीं”
“सुंदर कम है इससे?”सामने बैठी लड़की को देखते मैं बोली जो खुद सांवली सी,ठिगनी सी हाइट की थी।
“ठीक ही है,सुंदरता ज्यादा मायने नहीं रखती मैम,वो दिल की बहुत अच्छी है…”वो बोला।
“अच्छा!इसीलिए उसे इनाम दे रहे हो दूसरी औरत का…?” मैंने व्यंग करते पूछा।
“जी…ऐसा भी नहीं है..”वो धीरे से बोला।
मेरी आवाज थोड़ी तेज हो गई…”सुंदर भी है,अच्छे दिल की भी है,तुमसे लड़ती भी नहीं फिर भी दूसरी करनी है,आखिर क्यों?”
“तलाक हो गया उससे?”आखिर मैंने उकता के पूछा रजत से, “मैं पेशेवर हूं,मुझे किसी की व्यक्तिगत जिंदगी से क्या मतलब”,टेक्निकल बातों पर आते मैं बोली।
“जी,अभी तो नहीं…” रजत बेशर्मी से बोला।
“तो आप मुझसे क्या चाहते हैं?”झुंझला के मैं कह उठी।
“आप एक महिला हैं,इस रेखा को समझाएं प्लीज!ये कानूनन अपराध है,ये कहती है अगर तुमने मुझसे शादी नहीं की तो जहर खा लूंगी..”
मैंने उस रेखा नामक लड़की को गौर से पहली बार देखा,”क्यों मैडम!क्या नाटक है ये?”
“मैं रजत को बहुत प्रेम करती हूं मैम,इसके बिना मर जाऊंगी…”रेखा बोली।
“जो इसके घर पर रोज इसका इंतजार करती है,खुद को इसे सौंप बैठी है,रूपाली जिसका नाम बताया इसने अभी,वो क्या इससे नफरत करती है?”
“जी मुझे नहीं पता, मैं तो अपना बता सकती हूं न!!”उसने तर्क दिया।
“जब इनकी शादी हो रही थी,तब कहां थीं?जानती हो न एक औरत के लिए उसकी “पति की प्रेमिका” देखना कितना कष्टदायक हो सकता है?”
“ये अपने परिवार के आगे बोल न पाए,जबरदस्ती कराई गईं शादी कोई शादी नहीं होती।”वो अभी भी तर्क दे रही थी।
“तो तुम्हारा भी यही कहना है?”मैंने रजत से पूछा।
“शुरू में मुझे भी यही लगा था पर रूपाली इतनी सीधी,सरल और अच्छी है कि उसने मेरी सारी धारणाएं बदल दी।वो मेरा खुद से ज्यादा ध्यान रखती है और कभी कोई शिकायत भी नहीं करती।”
“तो रेखाजी आप!भूल जाइए आज से इन्हें और इन दोनो को पति पत्नी की जिंदगी जीने दीजिए,आप को पता होना चाहिए कि इनकी औलाद भी आप दोनो की ये ज्यादती बर्दाश्त नहीं कर पाएगी, ऐसी संताने अक्सर उपेक्षा का शिकार होकर समाज को विघटित ही करती हैं।”
“मैंने भी यही समझाना चाहा था इसे पर ये मानती ही नहीं,पिछले हफ्ते कोई कीटनाशक दवाई पी गई थी गुस्से में,वो तो किसी तरह बच गई ये…”
“ऐसा करिए,कल,आप अपनी पत्नी को साथ लाइए,फिर बात करते हैं।”कहकर मैं उसे बाहर भेज कर दूसरे केस में लग गई।
लेकिन मेरा दिल नहीं लगा था उस दिन किसी काम में,कैसे लोग होते हैं,आज पत्नी को छोड़ रहा है,कल प्रेमिका को भी छोड़ नहीं देगा इसकी गारंटी कौन ले सकता है लेकिन नहीं,फिर भी शादी करनी है..!!
दो चार दिन बाद तक मेरे दिमाग से वो बात निकलने लगी थी कि एक दिन वो रजत,अपनी पत्नी रूपाली के साथ मेरे चैंबर में बैठा था।
मैम!रूपाली…मेरी पत्नी!उसने मिलवाया था उससे मुझे।
सादगी की मूरत,बड़ी बड़ी उदास आँखें और सौम्य सी मुस्कराहट से उसने मुझे अभिवादन किया।
सारा किस्सा याद आते ही और उसकी पत्नी देखते ही मुझे गुस्सा सा चढ़ गया..बोली मैं रूपाली से..
“इसे बिल्कुल आजाद मत करना,इस तरह के आदमी समाज में विघटन पैदा करते हैं,अपने शौक पूरे करने के लिए,कई औरतों को बरगलाते हैं,तुम कानूनन इसकी पत्नी हो और तुम्हें पूरा हक है इसे न छोड़ने का..”
रजत अवाक होकर मुझे देख रहा था,”ये क्या कह रही हैं और मैं क्यों यहां आया था?”
तभी रूपाली बोली, मैम जी! मैं तो यहां आपके पास इसलिए आई हूं ताकि इन्हें तलाक देने की प्रक्रिया जान सकूं।
मैंने चौंक के उसे देखा…”तुम इसे तलाक देने को रेडी हो ताकि ये उस औरत के साथ आजादी से गुलछर्रे उड़ाए?”
ये किसके साथ क्या करते हैं,मुझे तब फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन फिलहाल बहुत पड़ता है,इसलिए मैं खुद इनसे आजाद होना चाहती हूं।वो दृढ़ता से बोली।
“मैम!रजत कहने लगा,मेरा एक वन रूम फ्लैट है ,कुछ एफ डी हैं, मैं चाहता हूं ,रूपाली वो सब ले ले ताकि इसका गुजारा हो सके आसानी से पर ये इनकार कर रही है।पूछ लीजिए इससे।”
मैंने पूछा रूपाली से,”तुम्हारे इनकार की क्या वजह है रूपाली?”
“मैम!जिसने मेरे प्यार,सम्मान को ठोकर लगाते वक्त एक बार नहीं सोचा ,वो मुझे चंद रुपए,मकान देकर खुद संतुष्ट होना चाहता है, मैं पढ़ी लिखी हूं,अपने गुजारे भत्ते लायक कमा लूंगी और जिंदा रह लूंगी।”
उसकी बात इतनी गलत भी नहीं थी,मैंने सोचा,पर अभी तक की मेरे वर्किंग पीरियड का ये सबसे नया और अजीब किस्सा था जिसमें एक पत्नी,खुद अपने पति की प्रेमिका को जमीन तैयार कर के दे रही थी कि वो उसके पति से शादी कर ले।
शायद ये भी एक प्रकार का बदला ही था या चेतावनी भी उस औरत के लिए,”जो आज तुम्हारे लिए मुझे,अपनी विवाहित पत्नी को छोड़ रहा है वो कल तुम्हारा फिर ये हश्र किसी अन्य औरत के लिए नहीं करेगा,इसके बारे में जरूर सोच लेना पहले।”
