मेरी सगाई हो चुकी थी और उस समय मुझे ऑनलाइन शॉपिंग का नया-नया चस्का चढ़ा था। ससुरजी का जन्मदिन आया तो मैंने उनके लिए एक शर्ट ऑनलाइन ऑर्डर कर दी। बर्थडे वाले दिन मैंने उन्हें विश किया और गिफ्ट के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, ‘थैंक्यू! शर्ट बहुत सुंदर है। पर बेटी, इतना महंगी शर्ट भेजने की क्या जरूरत थी? उस समय तो मुझे कुछ समझ नहीं आया। फोन रखने के बाद मैंने सोचा, पापाजी को कैसे मालूम हुआ कि शर्ट बहुत महंगी थी। मैंने अपना ऑर्डर चैक किया तो सिर थामकर रह गई। जल्दी-जल्दी में मैंने ‘पेमेंट ऑन डिलीवरी पर क्लिक कर दिया था। बिल का भुगतान मेरे अकाउंट से नहीं, उनकी जेब से हुआ था। ये जान कर शर्म के मारे मैं लंबे समय तक उनसे आंखें मिलाने का साहस नहीं कर पाई।
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