World Malaria Day: गर्मीं के मौसम में बेपनाह मच्छरों का प्रकोप देखने को मिलता है। ये अपने साथ लाते हैं मलेरिया जैसे जानलेवा बुखार। मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक पैरासाइट से होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। जो पानी में पैदा होने वाले मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से मानव-शरीर तक पहुंचते हैं। इन पैरासाइट के संक्रमण का एक साइकल है, मलेरिया पीड़ित व्यक्ति से एनोफिलीज मच्छर में और संक्रमित मच्छर से स्वस्थ व्यक्ति में पहुंचता है। मादा एनोफिलीज मच्छर जब किसी मलेरिया के मरीज को काटती है तो उस व्यक्ति के खून में मौजूद मलेरिया के प्लाज्मोडियम पैरासाइट को भी चूस लेती है और खुद भी संक्रमित हो जाती है। मच्छर के शरीर में पहुंचे मलेरिया के पैरासाइट 8-10 दिन में मल्टीपल हो दूसरों को अपना शिकार बनाने में सक्षम हो जाते हैं।
जब ये संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं, तो अपनी लार के साथ मलेरिया पैरासाइट व्यक्ति की स्किन के अंदर पहुंचा देते हैं। ये परजीवी स्वस्थ व्यक्ति के लिवर तक पहुंच जाते हैं। वहां तेजी से मल्टीपल होकर 10-12 दिन में व्यक्ति के शरीर को प्रभावित करने लगते हैं। ब्लड मे फैल कर ये पैरासाइट रेड ब्लड सेल्स नष्ट करने लगते हैं। जिससे ब्लड प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं और संक्रमित व्यक्ति मलेरिया की चपेट में आ जाता है।

मलेरिया हमारे देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने पैर जमाए हुए है। मलेरिया के संकट को देखते हुए 25 अप्रैल को ‘वर्ल्ड मलेरिया डे’ मनाया जाता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, पूरी दुनिया में सालाना 6 लाख से अधिक लोगों की मलेरिया से जान चली जाती है और 20.7 करोड़ लोगों को हर साल अपनी चपेट में लेता है। दखिण-एशियाई देशों के कुल मामलों का 75 प्रतिशत मामले भारत में पाए जाते हैं। मलेरिया के मामले भारत के बंगाल, बिहार, झारखंड, यूपी, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा जैसे राज्यों के एंडेमिक एरिया में बहुत ज्यादा मिलते हैं। हमारे देश में हर साल ढाई लाख मौते होती हैं। मलेरिया की गिरफ्त में जन्म से 5 साल तक के तकरीबन 55 हजार बच्चे और 5-14 साल के बीच के 30 हजार बच्चे हर साल दम तोड़ते हैं। जबकि 15-69 साल की उम्र के तकरीबन 1लाख 20 हजार व्यस्क भी मलेरिया के कारण दम तोडते हैं।
कैसे हो मलेरिया की पहचान

संक्रमित होने के 10 दिन बाद मलेरिया के लक्षण नजर आते हैं। मलेरिया के बुखार में उतार-चढाव आते रहते हैं। किसी दिन बुखार बहुत तेज होता है, तो दूसरे दिन मरीज बिल्कुल नाॅर्मल भी हो सकता है। छोटे बच्चों में मलेरिया के लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं, जैसे-दूध न पीना, या पीते ही उल्टी कर देना, बैचेनी, लगातार रोना, दस्त लगना, हाथ-पैर बहुत ठंडे होना, बुखार होना या दौरा पड़ना ।
वयस्क लोगों में मलेरिया के लक्षण, बहुत ज्यादा ठंड लगना, कंपकपाना, इनमें 4-5 डिग्री फेरनहाइट तक तेज बुखार होना देखा जा सकता है। बुखार में आने वाले उतार-चढ़ाव व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है। इम्यूनिटी कम होने से वह बहुत कमजोरी महसूस करता है औैर उसे सिर दर्द, बदन दर्द की शिकायत होती है। बुजुर्गो में मलेरिया का पता नहीं चल पाता, हल्का बुखार आता है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर पाते और बेहोश हो जाते हैं।
क्या है खतरा

बच्चों में मलेरिया काफी गंभीर रूप से होता है। कभी-कभी यह दिमाग पर भी चढ़ जाता है, जिस सेरेब्रल मलेरिया कहते हैं। इसमें बुखार का पता नहीं चल पाता, बच्चा कुछ बता नहीं पाता और बेहोश हो जाता है। उसकी डायग्नोज करने के लिए ब्रेन से पानी निकाला जाता है। बच्चे के ब्रेन पर इसका असर पड़ता है। समयोचित उपचार न होने पर बच्चे की मौत भी हो जाती है। कई बार बच्चों के लिवर और स्पलीन या तिल्ली बढ़ जाता है जिससे उन्हें मलेरिया का बार-बार दौरा पड़ता है। ऐसी स्थिति को क्राॅनिक मलेरिया कहते हैं।
वहीं समुचित उपचार न हो पाने के कारण व्यस्कों को ब्लैक वाटर फीवर हो सकता है। इसमें किडनी फेल हो जाती है। रक्त की लाल कोशिकाएं फट जाती हैं और उनमें लाल रंग का तत्व यानी प्रोटीन पेशाब में आ जाता है। जो दिमाग तक पहुंच सकता है और सेरेब्रल मलेरिया का रूप ले सकता है, लिवर-तिल्ली बढ़ने से क्राॅनिक हो जाता है। एनीमिया, किडनी फेलियर, कार्डिवास्कुलर में गड़बड़ी से पैरालाइसिस, लो ब्लड प्रेशर या फिर सेरेबल मलेरिया भी हो सकता है जिससे पीड़ित व्यक्ति कोमा में पहुंच सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है।
कैसे होता है डायगनोज

डाॅक्टर माइक्रोस्कोपिक ब्लड टेस्ट करके मलेरिया का पता लगाते हैं। इसमें रोगी के ब्लड में प्लाज्मोडियम पैरासाइट के प्रकार का पता लगाने के लिए पैरीफरल स्मीयर स्लाइड टेस्ट किया जाता है। रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरटीडी) भी कराया जाता है जिससे रोगी के ब्लड में प्लाज्मोडियम पैरासाइट की स्थिति या मात्रा का पता चलता है। मलेरिया के शरीर में मलेरिया पैरासाइट द्वारा बनाए गए एंटीजोन की जांच के लिए इम्यून-लाॅजिकल ऑप्टिमल टेस्ट किया जाता है। इनके अलावा मलेरिया की जांच के लिए कार्ड टेस्ट (गर्भवती महिलाओं के लिए), पाॅली मेरास चैन रिएक्शन टेस्ट (डीएनए की जांच के लिए), कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट (ब्लड प्लेट्लेस्स की जांच के लिए) भी कराए जाते हैं। अगर रोगी के ब्लड प्लेप्लेट्स डेढ़ लाख से कम हैं और मलेरिया के लक्षण हैं, तो रोगी को मलेरिया ट्रीटमेंट तुरंत शुरू कर दिया जाता है।
क्या है उपचार

बुखार होने पर आमतौर पर पेरासिटामोल जैसी दवाइयां दी जाती हैं। जो बुखार से तो राहत पहुंचाती हैं, लेकिन समुचित इलाज न कराने पर ये बीमारी खतरनाक भी हो सकती है। मलेरिया बुखार के लक्षणों की पहचान होने पर डाॅक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। मलेरिया की पुष्टि होने पर उपचार तुरंत शुरू कर दिया जाता है। मलेरिया के लिए क्लोरोक्वीन दवाई दी जाती है। आजकल मलेरिया पैरासाइट के क्लोरोक्वीन रेसिस्टेंस होने के कारण मरीज को आरटीसुनेट मेडिसिन भी दी जाती है। रोगी की स्थिति के आधार पर एंटी मलेरियल मेडिसिन का 3-5 दिन का कोर्स कराया जाता है। एंडेमिक एरिया में रहने वाले या कमजोर इम्यूनिटी के लोगो को मलेरिया से बचाव के लिए कीमोप्रोफ्राइलैक्सिस मेडिसिन का कोर्स कराया जाता है। आयरन और विटामिन्स की अतिरिक्त खुराक देनी पड़ती है। वर्तमान में मलेरिया के उपचार के लिए RTS, S/AS01, माॅस्क्यूरिस नामक वैक्सीन भी आ गई है जिसके अच्छे परिणाम देखे जा रहे हैं।
रोकथाम

- मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- यथासंभव शरीर को ढंक कर रखें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- शरीर के खुले अंगों पर ओडोमॉस मॉस्किटो रेप्लिकेंट क्रीम या सरसों, नीम, लैवेंडर जैसे तेल लगाएं।
- ओडोमॉस मॉस्किटो रेप्लिकेंट क्रीम छोटे बच्चों बच्चों की नाजुक त्वचा पर न लगाएं क्योंकि उन्हें रैशेज या इंफेक्शन हो सकता है। उनके पलंग (काॅट) पालना और मच्छरदानी (मसहरी) की लकडी या पाइप पर क्रीम लगाएं जिसकी सुगंध से मच्छर भाग जाएं।
- मलेरिया के मच्छर गंदगी और आसपास जमा पानी में पनपते हैं। अपने घर के आसपास पानी जमा न होने दें और आवश्यक साफ-सफाई रखें। कूलर, गमलों आदि में पानी इकट्ठा न होने दें। गड्ढे वगैरह हो तो मिट्टी, पत्थर से भर दें।
- नालियों, गटर में नियमित तौर पर डीडीटी, बीएचसी पाउडर जैसे कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें। पेट्रोल या केरोसिन ऑयल भी डाल सकते हैं।
- घर में तुलसी, पुदीना, अजवायन, मेंहदी, लेमनग्रास, गेंदा, चमेली जैसे औषधीय पौधे लगाएं। इनकी महक से मच्छर दूर भागते हैं।
- मच्छर काॅयल या मच्छर नाशक स्प्रै का प्रयोग करें जिससे मच्छर घर से बाहर भाग जाएं।
- खिड़कियों-दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर घर में न आ सकें ।
( डाॅ रचना कुचरिया, जनरल फिजीशियन, कुचरिया क्लीनिक, दिल्ली)
