Water Poisoning
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Water Poisoning: इंटरनेट पर वायरल हो रहे फिटनेस ट्रेंड ‘75 हार्ड’ चैलेंज को फॉलो करने के चक्कर में पिछले दिनों कनाडा की एक महिला मिशेल फेयरबर्न अस्पताल पहुंच गई। सोशल मीडिया चैलेंज के तहत 12 दिनों तक चार लीटर पानी पीने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस चैलेंज में शामिल होने वाले लोगों को वर्कआउट और हेल्दी डाइट फोलो करने के साथ 75 दिनों तक नियमित रूप से एक गैलन (लगभग 4 लीटर) पानी पीना शामिल था। निःसंदेह यह वॉटर पॉयजनिंग या जल विषाक्तता है जो अत्यधिक मात्रा में पानी पीने के कारण होने वाली स्थिति है और सबसे गंभीर मामलों में यह घातक हो सकती है। मिशेल भी अत्यधिक मात्रा में पानी पीने से वह अस्वस्थ महसूस करने लगीं थी जिसके चलते 12वें दिन उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दरअसल, ज्यादा पानी पीने से उसके शरीर में सोडियम की कमी हो गई थी। तुरंत इलाज न किए जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती थी।

कब हो सकती है वॉटर पॉयजनिंग

Water Poisoning
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अमूमन हमारी किडनी 24 घंटे में 15 लिटर पानी फिल्टर करती है। एक घंटे में करीब 800 मिली पानी ही फिल्टर कर सकती है। जब कोई व्यक्ति बहुत जल्दी-जल्दी एक घंटे में 2-5 लिटर पानी पी ले तो उसे वॉटर डिटॉक्सिफिकेशन की समस्या हो सकती है। ज्यादा पानी पीने पर शरीर में मौजूद सोडियम निकलने लगता है।

किन लोगों को हो सकता है खतरा

छोटे बच्चों या किसी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति जिनकी किडनी कॉम्प्रोमाइज या किडनी भी प्रभावित होती है, खिलाड़ियों या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट करने वालों में यह समस्या देखने को मिलती है।

पानी पीना है जरूरी, लेकिन…

देखा जाए तो एक स्वस्थ शरीर के वजन का 70 प्रतिशत हिस्से में पानी है जिसमें से 10 प्रतिशत खून में है। यह पानी न केवल हमारे पाचन में मदद करता है बल्कि पूरे शरीर के संचालन, यहां तक कि खून के प्रवाह को सुचारू बना कर शरीर के तापमान को स्थिर बनाए रखने में भी मदद करता है। डॉक्टरों के मुताबिक 50-60 किलो वजन के एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना 8-10 गिलास पानी पीना अनिवार्य है। गर्मी के मौसम में तो पानी की जरूरत और बढ़ जाती है क्योंकि पिए गए पानी की एक बड़ी मात्रा पसीने और यूरिन के जरिये शरीर से बाहर निकल जाती है। अगर एक व्यस्क व्यक्ति दिन भर में डेढ से दो लिटर पानी पीता है तो इससे पाचन क्रिया बूस्ट होती है जिसके चलते कब्ज, पेट में दर्द, गैस बनना जैसी समस्याएं नहीं होती।

जरूरत से ज्यादा पानी पीने के नुकसान

अति हमेशा नुकसानदेह साबित होती है। पानी के लिए भी यह उक्ति ठीक बैठती है। हालांकि शरीर के सभी अंगों को काम करने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है- डायजेशन, ब्लड सर्कुलेशन, बॉडी टैम्परेचर मेंटेन, ब्रेन को सुचारू रूप से चलाने, स्किन और बालों को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। लेकिन प्यास लगने पर हम कई बार जरूरत से ज्यादा पानी पीते हैं लेकिन यह भी सही नहीं है। एक तो इससे पेट भरा महसूस होता है और भूख कम लगने से शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी हो जाती है, यूरिन की समस्या होती है- सो अलग।

जरूरत से ज्यादा पानी पीना ओवर हाइड्रेशन के नाम से जाना जाता है। वॉटर पॉयजनिंग, इंटॉक्सिकेशन और दिमाग से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अनुसंधानों से यह साबित हो चुका है कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने से शरीर में वॉटर रिटेंशन होना शुरू हो जाता है। यानी कि ज्यादा पानी शरीर में इकट्ठा होकर सूजन और मोटापा बढ़ाता है। जिसे दूर करने के लिए कभी-कभी सर्जरी तक का सहारा लेना पड़ता। सीरिंज के जरिये पीड़ित व्यक्ति के शरीर से पानी निकाला जाता है।

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ज्यादा पानी पीने से शरीर के सेल्स के हाइपरटोनिक एनवायरनमेंट में पानी का हाइपरटोनिक एनवायरनमेंट आने से दिमाग और शरीर की कोशिकाओ में एडिमा यानी सूजन आने लगती है। सबसे ज्यादा असर दिमाग पर पड़ता है। दिमाग में इंट्राकैनियल प्रेशर बढ़ जाता है जिससे न सिर्फ दिमाग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है, शरीर के दूसरे हिस्सों में भी प्रेशर पड़ता है। प्रेशर पड़ने से दिमाग की दिमाग की कोशिकाओं में सूजन आ जाती पड़ता है। जिससे व्यक्ति को सोचने की क्षमता प्रभावित होती है, व्यक्ति को कन्फ्यूजन, नींद आना, सिर दर्द, बेहोशी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

एकसाथ ज्यादा पानी पीने से कई बार पेट अफर जाता है, कुछ खाते नहीं बनता और पेट की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीने से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव भी पड़ता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीने से शरीर में सोडियम का लेवल घटने लगता है और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ने लगता है। जिससे शरीर में मौजूदा फ्ल्यूड कोशिकाओं के अंदर चला जाता है। इससे कोशिकाओं में सूजन आने लगती है। ऐसा करने से नमक या सोडियम कर मात्रा कम होने से खून डाईल्यूट हो जाता है यानी पतला होने लगता है। इससे आपकी किडनी और उसके फिल्टरेशन प्रक्रिया पर असर पड़ता है। उसेे अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालने के लिए काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्मोन रिएक्शन होता है जिससे व्यक्ति स्ट्रेस और थके हुए महसूस करते हैं। व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है, मांसपेशियों में क्रैम्प्स आने लगते हैं। स्थिति गंभीर होने पर व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।

रखें ध्यान

कोशिश करें कि अपनी शारीरिक संरचना और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर पानी पिएं। आपके शरीर में पानी की आपूर्ति डाइट में लिए जाने वाले कई खाद्य पदार्थो के जरिये भी होती है। बहुत जरूरी हो, हमेशा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में या एक बार में एक लिटर से कम पानी पीना बेहतर है।

(डॉ जे रावत, जनरल फिजीशियन,सहगल नियो अस्पताल, दिल्ली)