Toxic Foods for Brain: हम अक्सर मस्तिष्क को अछूता मानते हैं, हम सोचते हैं कि यह शरीर के बाकी हिस्सों को प्रभावित करने वाली टूट-फूट से सुरक्षित रहता है। लेकिन क्या आप यह जानती हैं कि हमारे मस्तिष्क के लिए सबसे खतरनाक क्या है? आइए आज इस आर्टिकल में जानते हैं उन फूड्स के बारे में, जो हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद खतरनाक हैं।
आर्टिफ़िशियल स्वीटनर

हम में से अधिकतर लोग यह सोचते हैं कि इसका सेवन हमारी सेहत के लिए खराब नहीं है, जबकि सच तो यह है कि आर्टिफ़िशियल स्वीटनर हमारी सेहत, खास तौर से मस्तिष्क के लिए बिल्कुल भी सही नहीं हैं। आर्टिफ़िशियल स्वीटनर में मौजूद एस्पार्टेम को ब्रेन केमिस्ट्री में होने वाले बदलाव से जोड़ा गया है। हालांकि, इस बारे में विज्ञान अभी तक ठोस जानकारी नहीं दे पाया है, लेकिन कई न्यूरोलॉजिस्ट इसके अधिक सेवन के लिए मना करते हैं, खास तौर पर बच्चों और मूड डिसऑर्डर वाले लोगों को। इसलिए डाइट सोडा पीने से पहले दो बार सोचना जरूरी है।
रिफाइंड शुगर
मीठे स्नैक से आपको कुछ देर के लिए नशा जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन अधिक चीनी का सेवन हिप्पोकैम्पस की प्लास्टिसिटी को कम करने से जुड़ा है। यह मस्तिष्क का लर्निंग सेंटर है। ब्लड शुगर में लगातार वृद्धि ब्रेन टिशू में सूजन पैदा कर सकती है, जिससे कॉग्निटिव गिरावट में तेजी आती है। रिफाइंड शुगर सॉस, ड्रेसिंग, यहां तक कि ब्रेड में भी छिपी होती है, इसलिए सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि बहुत कुछ छोड़ना जरूरी हो जाता है।
ट्रांस फैट

कई बेक्ड गुड्स, फ्राइड फूड्स और मार्जरीन में पाए जाने वाले ट्रांस फैट पर कई देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन वे फिर भी प्रोसेस्ड फूड्स में पाए जाते हैं। दिल को नुकसान पहुंचाने के साथ ही, ट्रांस फैट मस्तिष्क के मेमोरी सेंटर में सिकुड़न से भी जुड़ा है। कुछ समय बाद ये ब्रेन सेल्स के बीच के कनेक्शन को खराब कर सकते हैं, जिससे आप स्लो, कम अलर्ट और अधिक भुलक्कड़ महसूस कर सकते हैं।
अधिक शराब
एक गिलास वाइन खराबी नहीं करती है, बल्कि फायदेमंद भी हो सकती है। लेकिन यदि आप रोजाना शराब का सेवन करते हैं, तो यह न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन में बाधा डाल सकती है और मस्तिष्क के फ्रन्टल लोब को लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकती है, जो निर्णय लेने और सेल्फ कंट्रोल के लिए जरूरी है। कम उम्र में भी बहुत अधिक शराब पीने से याददाश्त और इमोशनल रेगुलेशन में स्थायी कमी आ सकती है।
अधिक प्रोसेस्ड फूड्स

इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स, फ्लेवर्ड स्नैक्स, फ्रोजन मील हर जगह मिल जाते हैं लेकिन इनमें मौजूद सोडियम, चीनी और एडिटिव ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। ये सब मस्तिष्क ब्रेन फॉग और डिप्रेशन से जुड़े हुए हैं। ये फूड्स आंत के माइक्रोबायोम को भी बदल सकते हैं, जो ब्रेन हेल्थ से जुड़ा हुआ है।
मर्करी हेवी मछली
समुद्री भोजन को अक्सर ब्रेन फूड कहा जाता है, लेकिन सभी मछलियां इस कैटेगरी में नहीं आती हैं। किंग मैकेरल, स्वोर्डफिश और कुछ तरह के टूना मछली में मर्करी का हाई लेवल जमा हो जाता है। यह हेवी मेटल ब्लड ब्रेन बैरियर को पार करके न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर विकासशील मस्तिष्क में। यदि आपको समुद्री भोजन का सेवन पसंद है, तो सैल्मन, सार्डिन या ट्राउट चुनें।
अधिक रेड मीट

आयरन मस्तिष्क के कामकाज के लिए जरूरी है, लेकिन जो लोग रेड मीट का ज्यादा सेवन करते हैं, उनमें आयरन अधिक मात्रा में हो सकता है। यह बिल्डअप ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ावा दे सकता है और समय के साथ न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए कम मात्रा में लीन मीट को भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट युक्त सब्जियों के साथ खाने की सलाह दी जाती है।
