Toxic Food: हम रोजाना कई तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते है। लेकिन इनमें कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते हैं जिनमें मौजूद विषैले तत्व या टाॅक्सिक प्रकृति के कारण फायदे के साथ नुकसान अधिक पंहुचा सकते हैं। जाने-अनजाने ऐसे टाॅक्सिक खाद्य पदार्थों का सेवन करने से हम न केवल डायजेस्टिव और नर्वस सिस्टम संबंधी कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, बल्कि कई बार कोमा में या मौत की गिरफ्त में भी चले जाते है।
चेरी

चेरी के बीच छोटी-सी सख्त गुठली होती है जिसे अक्सर निकाल दिया जाता है। चेरी की यह गुठली खाने लायक नहीं होती क्योंकि इसमें जहरीला प्रूसिक एसिड या हाइड्रोजन साइनाइड पाया जाता है जो हमारी हेल्थ के लिए नुकसानदायक होती है। लेकिन इसमें घबराने वाली बात नहीं है क्योंकि गलती से चेरी की गुठली निगली जाती है, तो वह डायजेस्टिव सिस्टम में होती हुई बाहर निकल जाती है। बशर्ते कि उसे चबाया न जाए।
सेब के बीज
सेब के बीजों में भी जहरीला साइनाइड एसिड पाया जाता है। हालांकि इन बीजों पर छिलका होता है जो आपको साइनाइड एसिड के खतरे से बचाता है। बेहतर है कि सेब खाते समय इन्हें निकाल देना चाहिए क्योंकि साइनाइड के सेवन से व्यक्ति को घबराहट, चक्कर आना, सांस तेज-तेज चलने, स्ट्रोक भी हो सकता है, जिसमें उसकी मौत भी हो सकती है।
जायफल

मसाले के रूप् में प्रयोग किया जाने वाला जायफल व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। जिसे आमतौर पर व्यंजन पकने के बाद ऊपर से बहुत थोड़ी मात्रा में स्प्रिंकल के तौर पर डाला जाता है। ज्यादा मात्रा में खाने से यह हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह है। जायफल में मौजूद मिरिस्टिसिन ऑयल से मतिभ्रम, उनींदा, चक्कर आने, मतिभ्रम, दौरों का कारण बन सकता है।
हरा आलू
कई आलू हरे रंग के मिलते हैं जिन्हें खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है। आलू में हरा रंग ग्लाइकोकलाॅइड (सो लेनिस और चकोइन) नामक विषैले पदार्थ से आता है जो उसके अंकुरित होते कोंपल, पत्तों और तने में भी मिलता है। आकार में बड़े होने पर या धूप या प्रकाश के संपर्क में आने पर इनमें मौजूद ग्लाइकोलकालाॅइड खत्म हो जाता है। लेकिन ऐसे आलू ज्यादा खाने से शरीर में ऐंठन, घबराहट, उल्टियां, डायरिया, कंफ्यूजन, सिरदर्द और मृत्यु तक हो सकती है।
मशरूम

मशरूम व्यंजन खाने में स्वादिष्ट होने के बावजूद हानिकारक भी होते हैं। खासकर डेथ कैप और डेस्ट्राइंग एंजल नाम के जंगली मशरूम खाना सेहत के लिए नुकसानदेह है। इनमें अल्फा-एमनिटिन टाॅक्सिक कंपाउंड मिलता है। इन्हें खाने से पेट में दर्द, डिहाइड्रेशन, डायरिया, उल्टियां आना जैसे गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्राॅब्लम्स हो सकती है। किडनी और लिवर फैल्योर होने के साथ-साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है। प्रभावित व्यक्ति कोमा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।
आम
आम के छिलके, पत्तियों और छाल में यूरुशीओल ऑयल मिलता है जो पाॅयजन आइवी टाॅक्सिन है। अगर किसी को पाॅयजन आइवी से एलर्जी है, तो आम खाने से उन्हें स्किन में सूजन, रेशैज, खुजली हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को सांस लेने में भी मुश्किल आ सकती है।
स्टार फ्रूट

इसके आस-पास चिपके टाॅक्सिन सेहत के लिए नुकसानदायक होते हैं। किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों को स्टार फ्रूट से परहेज करना चाहिए क्योंकि उनकी किडनी टाॅक्सिन तत्वों को फिल्टर नहीं कर पाती। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से मेंटल कंफ्यूजन, स्ट्रोक और मौत तक हो सकती है
लीची
लीची के बीजों में हाइपोग्लाइसीन ए और मेथिलीन साइक्लो-प्रोपाइलग्लिसिन टाॅक्सिन मिलते हैं। इनके सेवन से कुपोषित बच्चों में अपच, गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया, मेटाबाॅलिज्म विकार, बुखार और मस्तिष्क की शिथिलता मिलती है।
काजू

बाजार में मिलने वाले काजू कच्चे नहीं, प्रोसेस्ड फूड होते हैं। यानी पहले उन्हें शैल से निकाल कर स्टीम किया जाता है, तभी वो खाने लायक बनते हैं। इनके शैल में यूरुशीओल ऑयल टाॅक्सिन मिलता है जो कई प्रकार की एलर्जी का कारण होता है और हमारे लिए घातक भी हो सकता है।
बादाम
देखा होगा कि कई बादाम कड़वे भी निकलते हैं। बादाम चाहे मीठे हों या कड़वे- इनमें एमिग्डालिन नामक टाॅक्सिन पाया जाता है। यह एक तरह का कैमिकल कंपाउंड है जो हाइड्रोजन साइनाइड एसिड में बदल जाता है और सेहत को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि मीठे बादाम में यह टाॅक्सिन न के बराबर होता है। लेकिन प्रोसेस्ड नही किए गए कड़वे बादामों में यह काफी मात्रा में मिलता है और इन्हें खाने से पेट में क्रैम्प्स, घबराहट, उल्टी-दस्त या डायरिया हो सकता है।
राजमा या किडनी बीन्स

बीन्स परिवार में राजमाह जहां सबकी पसंद होते हैं, वहीं इनमें लेक्टिन टाॅक्सिन पदार्थ काफी मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इन्हें कच्चा या अधपका खाना सेहत से दुष्वार करना होता है। लेक्टिन टाॅक्सिन से व्यक्ति को तेज पेट दर्द, घबराहट, उल्टियां-दस्त या डायरिया का सामना करना पड़ सकता है।
कच्चा शहद
कच्चा शहद पेश्चुराइजेशन प्रोसेस से नही गुजरता, इसलिए उसमें ग्रेनोटाॅक्सिन मिलता है। जिससे व्यक्ति केा चक्कर आना, कमजोरी, अत्यधिक पसीना, मतली-उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
चीनी

मीठी चीनी सेडक्टिव और टॉक्सिक है। इसमें रिफाइंड शूगर, गुड़, शहद, कार्न सिरप सभी आते हैं। चीनी ग्लूकोज और फूुक्टोज से बनती है। हमारे गट में टूटने के बाद जहां ग्लूकोज मसल्स और ब्रेन को एनर्जी देता है, वहीं फ्रुक्टोज लिवर में स्टोर हो जाता है और यहीं से समस्या शुरू हो जाती है। जब लिवर को ज्यादा फ्रुक्टोज मेटाबॉलिक सिस्टम को गड़बड़ा जाता है। लिवर ज्यादा फ्रुक्टोज को लिवर फैट में बदल देता है। ब्रेन पर असर पड़ता है, कोडीन से ज्यादा ऐडक्टिव होने के कारण इसे छोड़ना मुष्कि लिवर को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है और डायबिटीज शुरू होती है। इसके अलावा ज्यादा चीनी खाने से मोटापा, हार्ट डिजीज, हाइपर टेंशन कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं।
फ्राइड फूड
अघ्ययनों से साबित हो गया है कि जब कोई खाद्य तेल बार-बार गर्म किया जात है तो उसमें ट्रांस फैट बढ़ता है। ऐसे तेल में पकी हुई कोई भी चीज बीमार करने का न्यौता देना है। लंबे समय तक ऐसी फ्राइड चीजे खाने से डायबिटीज, मोटापा, लिवर , कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। तेल को बचाने के चक्कर में अक्सर घरों में भी तेल को बार-बार गर्म किया जाता है। दुकानों पर तो ऐसे तेल का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है।
(डाॅ रचना कटारिया, आहार विशेषज्ञ ,रचना डाइट क्लीनिक, नोएडा )
