कुछ समय पूर्व हम एक शादी में गए थे। वहां अनेक रिश्तेदार ठहरे हुए थे। सुबह जब बाथरूम से धड़ाम से किसी के गिरने की आवाज आई तो मैं दौड़ी वहां गई। देखा तो नहाने गई एक महिला गिर गई थीं, जिनसे उठते भी नहीं बन रहा था।

बाथरूम में फिसलन इतनी अधिक थी कि उन्हें उठाने के चक्कर में मैं भी फिसलते-फिसलते बची। खैर, जैसे-तैसे उन्हें वहां से उठाकर बिस्तर पर लिटाया। डॉक्टर से जब एक्स-रे कराया तो ज्ञात हुआ कि पांव में फ्रेक्चर है। दो माह का प्लास्टर चढ़ा, तब कहीं जाकर उनका पैर सामान्य हुआ।

अक्सर देखने व सुनने में भी आता है कि लोग बाथरूम में फिसलकर गिर पड़े और उनकी हड्डियां टूट गईं। कुछ तो वहीं स्वर्ग सिधार जाते हैं। प्राय: देखा गया है कि जब कोई बड़ा हादसा बाथरूम में हो जाता है, तब हमारा ध्यान वहां की अव्यवस्था और गंदगी पर जाता है, अन्यथा वहां की साफ-सफाई और समुचित देखभाल की किसी को कोई चिंता नहीं होती और बाथरूम उपेक्षित ही रहते हैं।

संपन्न घरों में, जहां बाथरूम में तमाम आधुनिक सुख-सुविधाएं मौजूद हैं, वहां भी अक्सर उचित रख-रखाव के अभाव में बाथरूम एक कबाड़खाना ही नजर आता है।

  • बाथरूम में छोटी-छोटी दुर्घटनाएं क्यों होती हैं, इस पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण फिसलन होती है। फिसलन होने का कारण, उसका हर समय गीला रहना है। साबुन-पानी का निकास यदि उचित न हो तो काई जमने लगती है। काई पर पैर रखते ही व्यक्ति फिसल जाता है, इसलिए बाथरूम में गीलापन न रहने दें। जब परिवार के सभी लोग स्नान कर लें तो उसे ठीक से साफ कर उसका पानी निकाल देना चाहिए, ताकि वह सूख जाए। यदि जरा भी काई या फिसलन नजर आए तो उसे तत्काल साफ कीजिए। कल पर मत छोड़िए।
  • बाथरूम में बैठने के लिए जो लकड़ी या प्लास्टिक का पटरा रखा जाता है, वह भी कई बार टूटा हुआ या सड़ा हुआ रहता है। कई बार उठते-बैठते समय वह आपके संतुलन को डगमगा देता है। पटरे से बाहर निकली हुई कीलें भी चोट पहुंचा सकती हैं। अत: स्नान- पटरा, साबुत एवं सुरक्षित होना चाहिए।
  • बाथरूम में साबुन सदैव साबुनदानी में ही रखना चाहिए, न कि नीचे फर्श पर। फर्श पर साबुन रखने से आप साबुन की चिकनाई की वजह से फिसलकर गिर सकती हैं।
  • बाथरूम में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। प्राय: देखा गया है कि मकान बनवाते समय लोग सारी कंजूसी बाथरूम में ही करते हैं। वहां एक छोटा-सा रोशनदान बनाकर उद्देश्य की पूॢत का प्रयास किया जाता है, किंतु यह मत भूलिए कि ड्राइंग रूम से भी ज्यादा रोशनी की आवश्यकता बाथरूम में है, क्योंकि वहां आपको ठीक से नहाना, कपड़े धोना एवं कपड़े पहनना होता है। यह भी देखा गया है कि लोग बाथरूम में जीरो वॉट का बल्ब या अत्यंत कम पावर वाला बल्ब लगाते हैं, जो कि ठीक नहीं है। पर्याप्त रोशनी न होने की वजह से भी प्राय: दुर्घटनाएं होती हैं। बेहतर होगा कि बाथरूम में बल्ब की बजाय ट््यूब लाइट लगवाई जाए।
  • बाथरूम में बिजली के तारों की फिटिंग भी सुव्यवस्थित होनी चाहिए, ताकि करंट का खतरा न रहे। बाथरूम में नल इस प्रकार लगाए जाने चाहिए कि बैठकर नहाने के बाद जब खड़े हों तो सिर में न लगे।
  • बाथरूम को बाथरूम ही रहने दीजिए, उसे स्टोर रूम न बनाएं। घर का फालतू सामान बाथरूम में कभी न रखिए। बाथरूम में जो भी चीजें आप रखें, उन्हें पूरी तरह से व्यवस्थित रखें। साबुन, टुथब्रश, तेल की शीशी, पाउडर, क्रीम आदि इधर-उधर बिखरे नहीं होने चाहिए।

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