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इंटरमिटेंट फास्टिंग असल में भोजन और फास्टिंग के समय को नियमित करने का एक तरीका है। इसमें आप निश्चित समय पर भोजन करते हैं और उसके बाद कोई कैलोरी नहीं लेते। माना जाता है कि इससे फैट बर्न होता है।
Side Effects of Intermittent Fasting: फिट और स्लिम रहने के लिए आज के समय में लोग क्या कुछ नहीं करते हैं। आए दिन नए नए डाइट प्लान और ट्रेंड आते हैं। और चमत्कार की आस में लोग उन्हें फॉलो करते हैं। इन्हीं में से एक है इंटरमिटेंट फास्टिंग। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक, नेशनल से लेकर इंटरनेशनल सेलिब्रिटीज भी इंटरमिटेंट फास्टिंग को असरदार बताते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी ने लोगों को इस बारे में एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आखिर क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग

इंटरमिटेंट फास्टिंग असल में भोजन और फास्टिंग के समय को नियमित करने का एक तरीका है। इसमें आप निश्चित समय पर भोजन करते हैं और उसके बाद कोई कैलोरी नहीं लेते। माना जाता है कि इससे फैट बर्न होता है। साथ ही मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होने में मदद मिलती है। ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में 16/8 विधि सबसे प्रचलित है। इसमें 8 घंटे भोजन खा सकते हैं और 16 घंटे फास्टिंग करनी होती है।
अब सामने आया यह खतरा
अब इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर एक चौकाने वाली रिसर्च सामने आई है। रिसर्च में सामने आया है कि जो लोग दिन में 8 घंटे से कम समय में खाना खाते हैं, उनमें दिल की बीमारी से मौत होने का खतरा 135% तक ज्यादा होता है। यह तुलना उन लोगों से की गई जो 12 से 14 घंटे के बीच खाना खाते हैं। ये रिसर्च अमेरिका में 8 साल तक 19,000 से ज्यादा लोगों पर की गई। रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने साल 2003 से 2018 के बीच नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया।
इन्हें है सबसे बड़ा डर
शंघाई की जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विक्टर वेंजे झोंग और उनकी टीम ने यह अध्ययन किया है। इसमें पाया गया कि जो लोग लगातार कई सालों तक खाने की विंडो को 8 घंटे या उससे भी कम तक सीमित रखते हैं, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों से मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह खतरा हर उम्र और लिंग के लोगों के लिए समान है। फिर भी सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को होता है। स्मोकिंग करने वालों पर भी इसका बुरा असर दिखा।
इसलिए है चिंता का कारण
प्रोफेसर विक्टर वेंजे झोंग का कहना है कि भोजन डायबिटीज और हार्ट डिजीज का एक प्रमुख कारण है। यही कारण है कि इन दोनों से पीड़ित लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग खतरनाक हो सकती है। झोंग का कहना है कि इस रिसर्च से साफ है कि अगर आप लगातार कई सालों से आठ घंटे वाली इंटरमिटेंट फास्टिंग का पैटर्न फॉलो कर रहे हैं तो हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी
रिसर्च के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन घटाने में मदद मिलती है। लेकिन यह फैट की जगह मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है। ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन इसे हमेशा सोच समझकर ही फॉलो करना चाहिए। अगर आप किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही इसे अपनाएं।
