Pregnancy Weight Gain: गर्भावस्था में काफी तेज भूख लगती है जिसकी वजह से खुद को रोक पाना मुश्किल होता है। खासतौर से सॢदयों में मीठा खाने का बहुत मन करता है। यह सारी चीजें आपके मोटापे की वजह बनती है। इसलिए आहार ऐसा लें जो गर्भावस्था में पेट रखे भरा और पौष्टिकता दे भरपूर।
आ मतौर पर गर्भावस्था में सही मात्रा में वजन बढ़ना अच्छा माना जाता है लेकिन कुछ महिलाओं का वजन इन दिनों जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है। इससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और समय से पहले डिलीवरी होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए इन दिनों वजन का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है।
गर्भावस्था जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है। इस समय आहार की आवश्यकता सामान्य दिनों से कुछ अधिक होती है। हार्मोनल बदलाव, मूड स्विंग, भूख न लगना, जी मिचलाना इत्यादि के कारण गर्भवती महिला तीन-चार महीने तक आहार पर्याप्त मात्र में नहीं ले पाती है जबकि इस समय महिला पर अपना और
बच्चे की पोषण की दोहरी जिम्मेदारी होती है। इस समय पोषक तत्वों की कमी होने पर शिशु के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है। गर्भावस्था में पूरे नौ महीनों के दौरान
विभिन्न पोषण तत्वों की जरूरत होती है-
कैलोरी: प्रतिदिन सामान्य महिला में 350 किलोकैलोरी से ज्यादा की आवश्यकता
होती है।
प्रोटीन: पर्याप्त प्रोटीन की मात्रा आहार में लेने से निश्चित ही शिशु के मस्तिष्क का विकास अच्छा होता है। अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता नौ महीनों के दौरान अलग-अलग होती है। शुरुआत में गर्भवती
महिला को प्रतिदिन 7 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। तीसरे ट्राइमिस्टर में 20 से 22 ग्राम तक अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है जो कि दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ, अंडा, दाल और
अनाज वाली खिचड़ी आदि में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
वसा: 30 ग्राम प्रतिदिन यानी 5 से 6 छोटा चम्मच तेल पर्याप्त है। इससे अधिक तेल की मात्रा लेने से मोटापे की समस्या हो सकती है।
फाइबर: सामान्य गर्भावस्था में महिलाओं को प्रतिदिन 40 ग्राम प्रतिदिन आवश्यकता होती है। इसकी पर्याप्त मात्रा आहार में शामिल करने से कब्जियत से छुटकारा मिलता है। फल, हरी सब्जियां, चोकर वाली चपाती, छिलके वाली दाल में फाइबर पर्याप्त मात्रा में होता है।
विटामिन ए: आहार में 800 माइक्रोग्राम प्रतिदिन। यह भ्रूण में रोग-प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी और आंखों की रोशनी के लिए बहुत जरूरी है। यह पीले और नारंगी फलों जैसे गाजर और संतरा में पाया जाता है।
आयरन: इसे आहार में 35 मिलीग्राम प्रतिदिन लेने की आवश्यकता होती है। आयरन के साथ खट्टे खाद्य पदार्थ
(विटामिन सी) लेना जरूरी है ताकि शरीर में आयरन का अवशोषण ठीक तरह से हो सके। हरी पत्तेदार सब्जियां, पोहा, सीताफल, किशमिश, गुड़ और तिल में अत्यधिक मात्रा में आयरन पाया जाता है।

कैल्शियम: 1200 मिलीग्राम प्रतिदिन जो कि शिशु की हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए आवश्यक है। रागी, सोयाबीन, मैदा, दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों में कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है।
कॉफी एवं टेनिन: इसका उपयोग (चाय, कॉफी) कम-से-कम करें। इसकी ज्यादा मात्रा होने पर शिशु में बेचैनी एवं नींद न आने के साथ हृदय गति भी तेज होती है। फास्ट फूड एवं जंक फूड: में ज्यादा कैलोरी एवं ट्रांस फैटी एसिड पाया जाता है, जो शरीर में ग्लूकोज लेवल को बढ़ाने के साथ ही चिड़चिड़ापन, थकावट, कब्ज
की समस्या भी हो सकती है। अधपका (नॉनवेज) न लें, इसमें उत्पन्न बैक्टीरिया मां एवं बच्चों दोनों के लिए
हानिकारक है।
मसालेदार खाना, शराब, तंबाकू सिगरेट, देर रात्रि में सोने से बचें।
गर्भवती महिला का आहार

सुबह 7:00 बजे: खजूर, भुना चना या मेवा 1 मु_ïी, दूध 1 गिलास (फुल क्रीम)।
सुबह 9:00 से 9:30 बजे: दाल, वेज चीला, मटर या पनीर का पराठा, हरी चटनी 1-2 चम्मच, फल।
11:30 बजे: फ्रूट या 1 गिलास जूस। 12:30-1:00 बजे: सलाद (थोड़ा-सा), मिस्सी चपाती 2-3, छोले, राजमा, चना, मूंग/मोंठ या कोई अन्य दाल 1 कटोरी, हरी सब्जी 1 कटोरी, दही 1 कटोरी, मिठाई (दूध वाली- चमचम, संदेश, रबड़ी, या अन्य), हरी चटनी।
3:00-4:00 बजे: नारियल पानी, नींबू पानी, वेज जूस, लस्सी कोई 1 गिलास।
5:00 बजे: मखाने तले हुए, सनफ्लावर, पंपकीन सीड्स (मिक्स) द चम्मच। पनीर चाट, चना चाट, मठरी, खांडवी (1)।
7:00-8:00 बजे: दोपहर के भोजन के अनुसार।
10:00 बजे: हल्दी वाली दूध 1 गिलास। हाई एनर्जी पाउडर
सामग्री: मिल्क पाउडर 1 बड़ा चम्मच, मिसरी 1½ बड़ा चम्मच, रोस्टेड चना 1½ बड़ा चम्मच, कोकोनट पाउडर 1द बड़ा चम्मच, खसखस 1½ बड़ा चम्मच।
विधि: रोस्टेड चना का छिलका उतारकर उसे मिसरी, कोकोनट पाउडर और खसखस के साथ मिक्सी में बारीक पीस लें। फिर इस पाउडर को 2 टेबलस्पून रोज खाने में लें।
बूस्ट उप जूस
सामग्री: हरे पत्तेदार सब्जी (पालक और मेथी) 20 ग्राम, गाजर 10 ग्राम, आंवला या नींबू (1 फांक), अनार 50 ग्राम, पुदीना या हरा धनिया 10 ग्राम, काला नमक स्वादानुसार, काली मिर्च 1 चुटकी।
विधि: इन सारी चीजों को अच्छे से धो कर मिक्सी में पीस लें और फिर उसे छानकर काला नमक और काली मिर्च डालकर पीएं।
गर्भावस्था में वजन बढ़ने से डिलीवरी के समय दिक्कतें बढ़ सकती हैं इसलिए जब भी मीठा खाने का मन करे तो गुड़ या खजूर खाकर मन को संतुष्ट कर लें।
