डिलीवरी यानी प्रसव के बाद का समय किसी महिला के लिए सबसे खूबसूरत पलों में से एक होता है। यह समय प्रसव के ठीक बाद शुरू होता है और यह तब तक रहता है जब तक कि मां का शरीर गर्भावस्‍था से पूर्व की अवस्था में वापस न आ जाये। इन छ: से आठ हफ्तों के दौरान, महिला का शरीर शारीरिक और मानसिक के अलावा कई तरह के बदलावों से गुजरता है। इस दौरान, मांओं को अपने शरीर की अच्‍छे से देखभाल करने की जरूरत होती है ताकि वे अपनी शारीरिक ताकत का पुनर्निर्माण कर सकें।

आराम करें

हाल ही में मां बनने वाली महिलाओं को ज्‍यादा से ज्‍यादा आराम की जरूरत होती है। हालांकि यह मुश्किल होता है क्योंकि अब उनकी दिनचर्या पूरी तरह से नवजात शिशु की देखभाल से संबंधित हो जाती है। आमतौर पर, कोई भी नवजात शिशु हर तीन घंटे में एक या उससे अधिक बार उठता है और तब उसे दूध पिलाना, सफाई करना और सुलाना पड़ता है। यह पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए अनावश्यक और थकाऊ अनुभव हो सकता है। ऐसे में शुरूआत के कुछ हफ्तों तक किसी महिला के लिए आठ घंटे की लगातार नींद लेना संभव नहीं हो सकता है। यदि बच्‍चे के पिता या घर के अन्‍य सदस्‍य साथ हैं, तो महिला को बच्‍चे को स्‍तनपान कराने और सुलाने के अलावा अन्‍य जिम्‍मेदारियों से छुटकारा मिल सकता है। यदि आप पहली बार मां बनी हैं, तो नवजात शिशु के सोने के समय के साथ नींद लेने की आदत डालने का प्रयास करें। कुछ हफ्तों के बाद, आप रखे हुए ब्रेस्‍ट मिल्‍क (स्‍तन के दूध) को फीडर का प्रयोग करके पिला सकती हैं, यह काम परिवार के किसी दूसरे सदस्‍य को सौंपकर भी आप बिना किसी व्‍यवधान के नींद ले सकती हैं। 

 पोषण के टिप्‍स 

प्रसव के बाद मां को आराम के अलावा उनके घावों को भरने और स्वस्थ होने के लिए हेल्‍दी खानपान की जरूरत होती है। कई युवा माताएं गर्भावस्था के तुरंत बाद शरीर के अतिरिक्त वजन को कम करने का प्रयास करने लगती हैं। हालांकि, स्तनपान के दौरान वेट लॉस प्रोग्राम (वजन घटाना) की सिफारिश नहीं की जाती है। स्तनपान कराने वाली मां के लिए कोई विशेष आहार नहीं होता है, फिर भी निम्‍नलिखित आहार हैं जिनको खाने की सिफारिश की जाती है, जिससे स्‍तनपान के दौरान महिला को उसके खानपान पर ध्‍यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। 

तरल पदार्थ अधिक पिएं – जब आप स्तनपान कराती हैं तो आपको अधिक प्यास लगती है। ऐसे में पानी, जूस और दूध जैसे तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें। हालांकि तरल पदार्थ किसी भी रूप में हो सकते हैं, लेकिन कैफीनयुक्त और कार्बोनेटेड पेय के अधिक सेवन से बचना चाहिए। जब आपकी प्यास बुझ जाए तो

  • तरल पदार्थों का सेवन न करें, लेकिन जब भी आपको थोड़ी सी भी प्यास लगे, तो अपने आप को बार-बार हाइड्रेट करें।

  • अपने आहार से समझौता न करें – आपको स्‍तनपान के दौरान अपनी भूख से बिलकुल भी समझौता न‍हीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, स्तनपान कराने वाली मांओं को एक दिन में कम से कम 2000 कैलोरी लेना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें स्‍वस्‍थ रहने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में जरूरी विटामिन और मिनरल का सेवन करना चाहिए। पौष्टिकता से भरपूर कुछ खाद्य पदार्थों में फल, सब्जियां, बीन्स, साबुत अनाज और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। 

मांओं के लिए योग आसन

योग का अभ्यास करने से स्तनपान कराने वाली मांओं के शरीर में दूध के उत्पादन में मदद मिल सकती है। योगासन रक्त संचार में सुधार करते हैं, पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्‍प्रेरित करते हैं, प्रोलैक्टिन के स्राव में सहायता करते हैं और स्तन में दूध का उत्पादन बढ़ाते हैं। वे गर्भावस्था के बाद वजन घटाने और स्तनपान के कारण होने वाले गर्दन और पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी मददगार हैं। 

दिन की शुरुआत खाली पेट सूर्य नमस्कार से करें। यह आसन आपके शरीर को 360 डिग्री तक मोड़ता है और आपके दिमाग पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्तनपान कराने वाली मांओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद योगासनों में ताड़ासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, सेतुबंधासन और शवासन शामिल हैं। क्लैविक्युलर (कंधे की एक हड्डी), थोरेसिक (वक्ष) और पेट की श्वांस तकनीक इस आसन के पूरक के रूप में मदद कर सकती है। आसनों के दौरान की गतिविधि को आसन बनाने के लिए ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें और जब आप थके हुए, बीमार या तनाव में हों, तो इन आसनों को कभी न करें। योग आसन अधिक प्रभावी तब होता है जब इसे खाली पेट किया जाये। यदि आप कमजोर महसूस करते हैं, तो इन आसनों को शुरू करने से पहले गर्म पानी में एक बड़ा चम्मच शहद डालकर पी लें। सुनिश्चित करें कि अभ्यास शुरू करने से पहले आपके आंत्र और मूत्राशय खाली हैं और इन आसनों के बाद में कम से कम आधे घंटे तक कुछ भी न खाएं।

योग के प्रत्येक आसन का प्रभाव नकारात्‍मक भी पड़ सकता है, इसलिए चिकित्‍सक की सलाह के बिना इनका अभ्‍यास न करें। यदि आप योग पहली बार कर रहे हैं, तो किसी प्रशिक्षित और अनुभवी योग शिक्षक के संरक्षण में इन आसनों का अभ्यास करें। इनका परिणाम दिखने में कुछ समय लगता है, इसलिए लगातार अभ्यास जारी रखें।

Dr. Vinoda Kumary – Dy. Chief Medical Officer (CMO), Jindal Naturecure Institute

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