एक बड़ी खुशी और अपने बच्चे के इंतज़ार का उत्साह जहां रहता है, वहीं कई तरह के विचार और डर भी कहीं न कहीं ज़हन में आते हैं। मां बनने जा रही महिलाएं या नई मांओं के लिए ये डर उन्हें कई तरह से परेशान करते हैं। यहां ऐसे ही डर के बारे में बात की गई है, जो कि नई मांओं को लगातार परेशान करते हैं, लेकिन साथ ही इस डर को दूर करने या काबू करने के लिए भी हल बताए हैं।

डर-1 :आने वाला बच्चा मेरी शादी को प्रभावित करेगा। एक बच्चा किसी रिश्ते में एक स्थायी तीसरे पहिये की तरह लग सकता है और कुछ मायनों में, यह सच है। यह समझा जा सकता है कि माता-पिता उस कहर से डरते हैं, जिसके आने से शादीशुदा जिंदगी में उथल-पुथल मच सकती है। रात भर नवजात के लिए जागना कुछ कपल्स के लिए मजेदार हो सकता है, लेकिन उन महिलाओं के लिए एक नया डर लेकर आता है कि इससे उनकी शादी पर फर्क पड़ सकता है खासकर जब पति बहुत सपोर्टिव न हो।

ये करें :जीवन के इस बड़े बदलाव के साथ आपके पार्टनर के साथ आपका रिश्ते पर प्रभाव पड़ता है, जो कि अच्छे या बुरे रूप में हो सकता है। माता-पिता के रूप में एक-दूसरे को उनकी नई भूमिका में देखना अविश्वसनीय हो सकता है। अपने पार्टनर के सपोर्ट को सूचीबद्ध करना और जब आप स्तनपान कर रहे हों तो जिम्मेदारियों को साझा करना भी माता-पिता दोनों को शुरू से ही शामिल होने में मदद करता है। देर रात बच्चों का जगाना, नींद खराब करना जैसी परेशानियों का सामना करना आसान नहीं है। एक दूसरे को एक टीम समझें और मां के रूप में अकेले ही मोर्चा संभालने जैसी बात न सोचें। ये पल आपके रिश्ते में दूरियां लाने की बजाए और यादगार और प्यार से भर देगा। आपको बच्चे के होने के शुरुआती कुछ सप्ताह में अपने पति, दोस्तों और परिवार से सपोर्ट लेना होगा ताकि आप मां होने की अपने नई भूमिका में एडजस्ट हो सकें। हार्मोनल बदलावों के कारण आपका मूड स्विंग हो सकता है और इसे अपने पार्टनर से छुपाने या अपराध बोध महसूस करने की बजाए बात करें। अपनी फीलिंग्स के बारे में अपने पार्टनर से बात करें और साथ में प्लान बनाएं।

डर-2 :बच्चे के साथ मेरा बॉन्ड बनेगा की नहीं? कुछ महिलाएं अपने बच्चे को देखते ही उछल पड़ती हैं, जैसे कि उनका जन्मों का रिश्ता हो, लेकिन कुछ के लिए कनेक्शन या यह बॉन्ड तुरंत महसूस नहीं होता है। खासकर उन महिलाओं के लिए जिनकी प्रेग्नेंसी में कई परेशानियां हो और मातृत्व के शुरुआती पल यूं ही गुजर गए हों। उन महिलाओं को पहले ही डर सताने लगता है, जो कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में जानती हैं। ऐसी महिलाएं बच्चे से अटैचमेंट महसूस नहीं कर पाती हैं और चिंता में रहती हैं कि वह सबसे खराब मां बनेंगी।

ये करें :आप भले ही पोस्टपार्टम डिप्रेशन या बेबी ब्लूज़ का अनुभव कर रही हों, यह जानना महत्वपूर्ण है कि आप अकेली नहीं हैं। लगभग 70 से 80 प्रतिशत महिलाएं ब्लूज़ अनुभव करती हैं क्योंकि हार्मोन के स्तर में बदलाव, नींद की कमी, नई जिम्मेदारियों और मूल रूप से इस तथ्य के कारण कि आपका पूरा जीवन बदल गया है। आपको जब समय मिले झपकी लें, सपोर्ट के लिए दोस्तों और परिवार पर भरोसा करें। इसमें डरने की ज़रूरत नहीं है कि बॉन्डिंग बनेगी कि नहीं। लेकिन अगर ऐसा होता भी है कुछ सप्ताह के लिए तो अपने डॉक्टर से इस बारे में चर्चा कर सकती हैं। 

डर-3 :बच्चे के दुनिया में आने से पहले ही चिंता सताती है कि क्या होगा, अगर मैं ब्रेस्टफीड नहीं करा पाऊंगी? मांओं को डर लगा रहता है कि बच्चे को पिलाने के लिए पर्याप्त दूध बनेगा या नहीं। उन्हें यह डर बहुत सताता है कि कहीं फॉर्मूला मिल्क की ज़रूरत न पड़े। ऐसे में वह अपराधबोध महसूस करती हैं। पहले से ही इस बात को लेकर डरी मां के लिए तब बड़ी परेशानी होती है जब बच्चा जल्दी ब्रेस्टफीड नहीं सीख पाता है। 

ये करें :ब्रेस्टफीडिंग कठिन ज़रूर लग सकती है लेकिन एक बार आपने यह शुरू करवाई तो आपको कोई परेशानी नहीं होगी। इस बात को समझना ज़रूरी है कि ब्रेस्टफीडिंग के लिए आपका बच्चा एक सप्ताह ले सकता है, जिसमें कि उसे दूध मिले। आप डॉक्टर से इस बात में आराम से बात कर सकती हैं और इंस्ट्रक्शन फॉलो कर सकती हैं। जब बच्चा बार-बार भूखा रहता है तो अपराध बोध हो सकता है लेकिन इसे ब्रेस्टफीडिंग का पार्ट समझें क्योंकि बच्चे को भी इस नई क्रिया को सीखने में समय लग सकता है।

डर-4 :मैं अपने बच्चे को गलत तरीके से तो नहीं हैंडल करूंगी? यह डर उन महिलाओं को ज्यादा होता है, जिन्होंने ऐसा कुछ आंखों से देखा होता है। प्रेग्नेंट होने से पहले उन्होंने मां को किसी महिला को बच्चे गलत तरीके से पकड़ने पर डांट लगाते सुना होगा। इसलिए जब उसका खुद का बच्चा आता है तो वह खुद ही इमेजिन करती हैं कि वह बच्चे को असुरक्षित तरीके से हैंडल कर रही है। उन्हें चिंता लगी रहती है कि वह कहीं गर्दन गलत तरीके से तो नहीं पकड़ रही। उसके पकड़ने का तरीका गलत तो नहीं है।

ये करें :कई मामलों में बच्चे 4 महीने तक अपने सिर को नहीं संभाल पाते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि नई मां के लिए नन्हें से नवजात को संभालने में नर्वस महसूस नहीं होगा। इस डर को दूर करने के लिए आपको कुछ होल्डिंग सैशन लग सकते हैं। आप पहले ही अपने बड़े-बूढ़ों से इस संबंध में बात कर सकती हैं या कुछ वीडियोज़ देखकर समझ सकती हैं कि नवजात के सिर और गर्दन को सही तरीके से सपोर्ट करने का क्या तरीका है।

डर-5 :गंभीर गलतियों की संभावना, जैसे गलती से बहुत ज्यादा दवा देना, अपने नवजात शिशु को गिरा देना। यह तब दिमाग में आता है जब नौसिखिया मां हो या बनने वाली हों। दिमाग में यह भी रहता है कि गलत तरीके से ब्रेस्टफीडिंग या कुछ खाने का टुकड़ा गले में न अटक जाए।

ये करें :मां बनने वाली महिलाओं के लिए ये डर बहुत आम है, क्योंकि यह उनका पहला अनुभव है लेकिन इस बात को ध्यान में रखना ज़रूरी है कि इस डर को दूर करने के लिए आपको बस कुछ बातों के बारे में जान लेना चाहिए कि आखिर नवजात की केयर कैसे की जाए। जानकारियां होने से आप कॉन्फिडेंट महूसस करेंगी और इस तरह का डर मन में नहीं आएगा।

डर-6 :डे केयर में बच्चे को कुछ हो तो नहीं जाएगा। वॄकग मदर जिनकी प्लानिंग डे केयर में बच्चे को रखने की है, उन्हें बहुत चिंताएं सताती है और उनमें से एक है कि कहीं मेरे बच्चे को कोई बच्चा मार न दे और उसकी आंखों में कुछ लग न जाए। बच्चे को चोट लगने का यह डर उसके आने से पहले ही शुरू हो जाता है, क्योंकि कई बार उन्हें अपने पति, सास या मेड पर भरोसा नहीं होता है कि वह उसे अच्छे से संभाल पाएंगे।

ये करें :डे केयर को लेकर मांओं का डर जायज है, क्योंकि मासूम को अपने से कुछ समय के लिए भी दूर रखना तकलीफदायक हो सकता है। इस डर को दूर करने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप जिस तरह का डे केयर सेंटर चाहती हैं वह उसमें फिट बैठता हो।

 

डर-7 :मां बनने के बाद अगर मैंने अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल को मिस किया तो? कुछ ऐसा ही डर मां बनने की प्लानिंग करने वाली महिलाओं या प्रेग्नेंट महिलाओं को होता है। इसका कारण यह है कि मां बनने से जीवन में कई छोटे और बड़े बदलाव आते हैं। अपने परिवार में नई सदस्य को लाने से लेकर नए रूटीन में एडजस्ट होना और खुद की बॉडी में हो रहे बदलावों को मैनेज करना, ऐसी कई चीज़ें रहती हैं। डर लगा रहता है कि पूरी तरह से मौजूदा लाइफस्टाइल बच्चे की वजह से बदल गई और वे उसे मिस करने लगी तो क्या होगा।

ये करें :बदलाव जीवन का हिस्सा है और अगर आप बच्चे के आने से इस डर में हैं कि आपकी लाइफस्टाइल बिगड़ने वाली है तो ऐसा नहीं है। यह पूरी तरह से आपके ऊपर है कि आप इसे किस तरह से मैनेज करती हैं। सबसे अच्छा तरीका है कि आप पहले से ही प्लानिंग सही रखें। अपनी लाइफस्टाइल को इस तरह से बदलने की तैयारी करें कि आपको यह दु:ख न हो कि आप अपने पहले वाली लाइफस्टाइल मिस करें। इसमें अपने पार्टनर और फैमिली की मदद ज़रूर लें।

डर-8 :क्या होगा अगर मुझे अपनी पोस्टपार्टम बॉडी पसंद नहीं आई? प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से रिकवर होने में कुछ सप्ताह से ज्यादा ही समय लगता है और उस समय आपको अपने शरीर को स्वस्थ होने देना ज़रूरी है। महिलाओं को डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी शेप की बहुत चिंता रहती है और यह डर कई बार उन्हें परेशान करता है।

ये करें :महिलाओं को अपने फिगर को लेकर ज़रूर चिंता होती है, स्ट्रेच मार्क्स, वेट गेन, डलनेस जैसी चीज़ों से वे घबराती हैं। लेकिन ऐसे समय में जब आपको यह डर सताए, ध्यान रखें कि आप प्रेग्नेंसी के दौरान भी स्किन केयर, मेडिटेशन और प्रेग्नेंसी एक्सरसाइज़ करेंगी तो आपको यह आसान लगेगा कि आप अपने पहले जैसे फिगर में आ जाएंगी। खुद को यह विश्वास दिलाना ज़रूरी है और अच्छा ये होगा कि इस शारीरिक बदलाव को खुश होकर अपनाएं।

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