Pregnancy body changes
Pregnancy body changes

Summary: पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी के बीच 7 बड़े फर्क – मां बनने का अनुभव कैसे बदलता है

पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी का अनुभव काफी अलग होता है। पहली बार जहां घबराहट और उत्सुकता ज्यादा रहती है, वहीं दूसरी बार महिला ज्यादा आत्मविश्वासी, प्रैक्टिकल और मानसिक रूप से तैयार होती है।

First and Second Pregnancy Difference: मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे खास और भावुक पल होता है। यह खूबसूरत अनुभव उसे अंदर  तक बदल देता है और उसके जीवन में एक नई जिम्मेदारी लेकर आता है। लेकिन जब हम पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी की बात करते हैं, तो दोनों के अनुभव अलग-अलग होते हैं। पहली बार मां बनने पर सब कुछ नया लगता है, हर छोटी हलचल पर उनकी उत्सुकता बढ़ जाती है। डॉक्टर की हर बात पर खासतौर से ध्यान दिया जाता है। होने वाली माँ अक्सर यह सोचकर परेशान हो जाती है कि सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं। दूसरी प्रेग्नेंसी में यही माँ ज्यादा आत्मविश्वासी और समझदार हो जाती है। अब उसे पहले का अनुभव होता है,

जिससे वह ज्यादा रिलैक्स फील करती है और हर स्थिति को अच्छे से संभाल पाती है। इस बार वह शारीरिक और मानसिक रूप से भी पूरी तरह से तैयार रहती है।

Pregnancy checkup with doctor using stethoscope
healthy pregnancy

पहली बार जब महिला प्रेग्नेंट होती है, तो हर छोटी बात पर घबराहट और चिंता होना आम बात है। डॉक्टर की सलाह से लेकर ऑनलाइन पढ़ी हर जानकारी को लेकर मन में कई सवाल आते हैं। दूसरी प्रेग्नेंसी में महिला को पहले से ही काफी अनुभव होता है, इसलिए वह ज्यादा रिलैक्स रहती है।

पहली प्रेग्नेंसी में बेबी बंप देर से दिखाई देता है, लेकिन दूसरी प्रेग्नेंसी में शरीर पहले से तैयार रहता है, इसलिए बेबी बंप जल्दी नजर आने लगता है। पेट की मांसपेशियां पहली प्रेग्नेंसी में खिंच चुकी होती हैं, जिससे इस बार बदलाव जल्दी दिखने लगते हैं।

पहली प्रेग्नेंसी में महिला खुद पर पूरा ध्यान दे पाती है, आराम कर पाती है और अपनी सेहत का पूरी तरह से ख्याल रखती है। दूसरी प्रेग्नेंसी में घर में पहला बच्चा भी होता है जिसकी देखभाल करना जरूरी होता है। ऐसे में थकान ज्यादा महसूस होती है क्योंकि महिला को आराम के लिए उतना समय नहीं मिल पाता।

पहली प्रेग्नेंसी में हर टेस्ट और रिपोर्ट देखकर महिला घबराने लगती है। लेकिन दूसरी प्रेग्नेंसी में उसे ज्यादातर मेडिकल टेस्ट और चेकअप का तरीका पता होता है। इस वजह से वह ज्यादा परेशान नहीं  रहती और डॉक्टर के साथ खुलकर बात कर पाती है।

cute pregnancy backdrop
Emotional Reaction

पहली प्रेग्नेंसी में महिला हर छोटी किक और मूवमेंट को लेकर बहुत भावुक हो जाती है। दूसरी प्रेग्नेंसी में भी खुशी उतनी ही होती है, लेकिन पहले जैसी घबराहट या ओवर-एक्साइटमेंट नहीं होता है। वह ज्यादा प्रैक्टिकल हो जाती है और उसका पूरा फोकस बेबी के आने की तैयारी पर रहता है।

पहली बार डिलीवरी का नाम सुनते ही ज्यादातर महिलाएं डर जाती हैं। लेकिन दूसरी प्रेग्नेंसी में महिला को पता होता है कि डिलीवरी कैसे होती है, कितना समय लग सकता है और दर्द को कैसे मैनेज किया जा सकता है। इसलिए इस बार डर थोड़ा कम होता है और आत्मविश्वास ज्यादा।

पहली बार मां बनने पर महिला को बच्चे की देखभाल सीखने में समय लगता है। दूसरी प्रेग्नेंसी में वह पहले से जानती है कि आने वाले बच्चे की देखभाल कैसे करनी है। नींद, फीडिंग, डायपर बदलना और रोने पर बच्चे को किस तरह शांत करना है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...