प्रेगनेंसी एक ऐसा दौर है जिसके लिए आपको पूरी तरह से तैयार होना पड़ता है। इस दौरान आप कई तरह की चुनौतियों से गुज़रती हैं। ऐसे में हर एक चीज़ का ध्यान आपको रखना बेहद ज़रुरी है। अगर आप मां बनने की चाहत रखती हैं तो आपको इसके लिए अपने ओव्यूलेशन का ध्यान रखना होगा क्योंकि कुछ बातें जो मां बनने से पहले जाननी ज़रुरी  हैं क्योंकि तभी होगी शुरुआत एक बेहतर कल की। 

कैलेंडर देखें :- आमतौर पर ओव्यूलेशन आपके मासिक चक्र के बीच में होता है। औसत चक्र 28 दिन का होता है। जिसे पहले पीरियड के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक गिना जाता है लेकिन गर्भावस्था की तरह मासिक चक्र के दिन 23 से 25 के बीच हो सकता है। आपका अपना चक्र माह-प्रतिमाह खिसक सकता है। कुछ माह तक मासिक चक्र का कैलंडर रखने से आपको अपने सामान्य चक्र का अंदाजा हो सकता है। यदि मासिक चक्र अनियमित हो तो आपको ओव्यूलेशन के बाकी संकेतों पर ध्यान देना होगा। आपका शरीर स्वयं ओव्यूलेशन का संकेत देता है। इस दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन महसूस होती है। इससे पता चलता है कि ओवरी से एग रिलीज़ हो रहा है।

अपना तापमान लें :- आपको अपने बैसल बाॅडी टेंपरेचर का रिकाॅर्ड रखना होगा। आपको सुबह बिस्तर से उठते ही एक विशेष थर्मामीटर से अपना तापमान जांचना होगा। यह तापमान आपके चक्र के साथ-साथ बदलता रहता है। ओव्यूलेशन के समय सबसे कम हो जाता है तथा उसके बाद आधी डिग्री तक बढ़ जाता हैं। इस चार्ट से न केवल ओव्यूलेशन का दिन पता लगेगा बल्कि इसका सबूत भी मिलेगा। कुछ महीनों बाद आपको अपने मासिक चक्र का ढांचा पता चल जाएगा और प्रसव की अनुमानित तिथि का अनुमान भी लगा पाएंगी।

अंडरगारमेंट्स की जांच करें :- सवाईकल म्यूकॅस की मात्रा और रंग में बदलाव से भी यह संकेत मिलता है। पीरियड खत्म होने के बाद इसकी ज्यादा उम्मीद न रखें। चक्र बढ़ने के साथ-साथ म्यूकस की मात्रा भी बढ़ती है जिसे अंगुलियों में लिया जाए तो वह चिपचिपा पदार्थ टूट जाता है। ओव्यूलेशन के आसपास यह स्राव पहले से कहीं पतला, साफ व फिसलन भरा हो जाता है। इसे आप अंगुलियों में लेकर थोड़ी दूरी तक तार की तरह खींच सकती है। यह भी इस बात का संकेत है कि अब आपको अपने शयनकक्ष में जाना चाहिए। ओव्यूलेशन के बाद योनि सूखी हो जाएगी या यह स्त्राव काफी गाढ़ा हो जाएगा। सवाईकल की स्थिति और बैंसल बाॅडी टेंपरेचर इन दोनों की मदद से आप ओव्यूलेशन की सही तिथि जान सकती है।

सर्विक्स की स्थिति :- सर्विक्स की स्थिति से भी जाने वाले ओव्यूलेशन का पता लग सकता है। चक्र की शुरूआत में योनि व गर्भाशय के बीच का मार्ग थोड़ा खिंचा हुआ बंद-बंद होता है लेकिन ओव्यूलेशन के बाद पहचान सकती है।

एक स्टिक पर मूत्र की जांच :- अब बाजार में ‘ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर की किट भी मिलती है। यह इस हार्मोन जांच से ओव्यूलेशन का सही समय बता देती है। आपको अपने मूत्र में यह स्टिक डुबो कर जांच करनी होगी।

अपनी घड़ी पर नजर :- एक ऐसा यंत्र बना है, जिसे आप घड़ी की तरह हाथ पर पहन सकती हैं, यह आपके पसीने में क्लोराइड सोडियम व पोटैशियम की मात्रा पर नजर रखता है, जो माह में बदलती रहती है। यह क्लोराइडियन टेस्ट चार दिन पहले भी ओव्यूलेशन का पता दे सकता है। आपको सही नतीजों के लिए इस यंत्र को 6 घंटे तक लगातार अपने हाथ पर पहनना होगा।

थूक की जांच :- आपके स्लाइवा टेस्ट में एस्ट्रोजन की मात्रा से पता चल सकता है कि ओव्यूलेशन होने वाला है। उस जांच से काफी हद तक इसकी पुष्टि हो जाती है। यह ‘पी आॅन स्टिक’ टेस्ट से काफी किफायती भी होता है।

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