इस समय हो सकता है कि आप सभी लक्षण एक साथ महसूस कर रही हों या फिर कुछ ही लक्षण सामने आएँ। कुछ लक्षण पिछले महीने से चले आ रहे होंगे तो कुछ नए होंगे। कुछ इतने पुराने हो गए होंगे कि आप उन पर ध्यान भी नहीं देंगी या फिर प्रसव से पहले के कुछ संकेत सामने आ रहे होंगे।

            शारीरिक

  • ज्यादा थकान या ज्यादा ऊर्जा (बेस्टिंगसिंड्रोम), या फिर दोनों
  • शरीर में ढीलापन
  • मूत्राशय पर बढ़ते दबाव की वजह से बार-बार मूत्र आना
  • हेमरॉयड्
  • स्ट्रेच मार्क्स
  • नितंबों व पेल्विक में बेचैनी व दर्द
  • रात को टांगों में ऐंठन
  •  नाक बंद होना व नाक से खून आना,कान में गंदगी जमा होना
  •  छाती में जलन, अपच, अफारा
  • योनि स्राव पहले से गाढ़ा हो जाता है और ज्यादा म्यूकस बनने लगता है जो संभोग के बाद या पेल्विक परीक्षण के बाद हल्का गुलाबी या लाल हो सकता है।
  •  भ्रूण की गतिविधि में थोड़ा बदलाव, शिशु की हलचल में कमी क्योंकि उसे उछलनेकूदने की कम जगह मिलती है
  •  कब्ज
  •  कभी-कभी सिर चकराना, बेहोशी छाना
  • संवेदनशील मसूड़े
  • पीठ में दर्द व भारीपन
  • पेट में दर्द, नाभि का उभार
  • टाँगों में वैरीकोज़ वेन्स
  • बेबी ड्रॉपिंग के बाद सांस लेने में आसानी
  • ‘ब्रेक्सटन हिक्स कांट्रैक्शन’ (कुछ दर्दनाक भी सकते हैं)
  • निप्पल से कोलॅस्ट्रम का रिसाव
  • भूख खुलना या भूख में कमी

            भावनात्मक

  • अधैर्य व चिड़चिड़ापन
  • यहाँ तक पहुँचने की तसल्ली
  • ज्यादा उत्तेजना, ज्यादा तनाव दिमाग का खालीपन
  • संवेदनशीलता और बेचैनी
  • शिशु के बारे में कल्पनाएं व सपने देखना

 

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