‘‘मैं और मेरे पति गर्भपात में यकीन नहीं रखते। मेरी उम्र अभी केवल 37 वर्ष है, मुझे शिशु के जन्म से पूर्व की जांच क्यों करानी चाहिए?”
इस तरह जांच करवाने से आप काफी हद तक निश्चिंत हो सकती हैं। अधिकतर शिशु ऐसी जांच के बाद क्लीन चिट पा लेते हैं। अगर जांच में कोई खराबी हो और गर्भपात करवाने की नौबत आ ही जाए तो माँ-बाप को इस सदमे से उबरने का वक्त मिल जाता है या फिर वे इस शिशु की देखभाल के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं जो ‘स्पेशल बच्चों’ की लिस्ट में आ सकता है। उसकी अपनी कुछ विशेष माँगें हो सकती हैं। जांच से यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि डिलीवरी कहाँ और कैसे होनी चाहिए।
माता-पिता को डिलीवरी से पहले ही पता चल जाता है कि उन्हें आने वाले समय में कैसे हालात का सामना करना होगा। कई बार यह भी पता चल जाता है कि जन्म से पूर्व ही दोष को सुधारा जा सकता है। उसकी अपनी कुछ विशेष माँगें हो सकती हैं। जांच से यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि डिलीवरी कहाँ और कैसे होनी चाहिए।
माता-पिता को डिलीवरी से पहले ही पता चल जाता है कि उन्हें आने वाले समय में कैसे हालात का सामना करना होगा। कई बार यह भी पता चल जाता है कि जन्म से पूर्व ही दोष को सुधारा जा सकता है। अगर डॉक्टर ने आपको ऐसी जांच कराने की सलाह दी है तो उसे अनदेखा न करें। अपने डॉक्टर या जेनेटिक विशेष से सलाह लें। अगर डॉक्टर इस जाँच से कोई अमूल्य सूचना पाना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने से न रोकें।
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