आमतौर पर तो नतीजों से यही पता चलता है कि सब कुछ ठोक-ठाक ही होगा लेकिन कई बार ऐसी खबर भी सामने आ जाती है जो मां-बाप का दिल तोड़ने के लिए काफी होती है। ऐसी हालत में, आने वाले समय के लिए आप विशेषज्ञ को सलाह ले, उगे संभावित विकल्प दे सकते हैं-
गर्भावस्था में परामर्श है :- कई मामले ऐसे होते है, जब माता-पिता को पता चलता है कि आने वाला शिशु स्वस्थ व सामान्य नहीं है और वे किसी हालत में गर्भपात नहीं कराना चाहते तो वे शिशु के जन्म से पहले ही अपने-आपको उस स्थिति के लिए तैयार करने लगते हैं। वे उस शिशु के जीवन को बेहतरी के उपाय जान सकते है। उसकी समस्याओं से निपटने के लिए हिम्मत जुटा सकते है और भावनात्मक व व्यावहारिक रूप से चुनौती का सामना कर सकते हैं ।
गर्भावस्था की समाप्ति :- यदि कोई ऐसा नतीजा सामने आता है, जिसमें विकृति जानलेवा हो सकती है तो माता-पिता विशेषज्ञ की सलाह से गर्भपात करवाने को तैयार हो सकते है। हालांकि वे इससे पहले आटोप्सी की राय ले सकते है, जिसमें भ्रूण की कोशिका की सावधानी पूर्वक जाँच की जाती है. ताकि अगली गर्भावस्था में इस तरह की असमानता न आए। वे इस जांच व विशेषज्ञ की राय के बाद स्वयं को अगली आने वाली सामान्य गर्भावस्था के लिए तैयार करते है। अधिकतर मामलों में अगली बार स्वस्थ शिशु का जन्म होता है।
भ्रूण के प्रसव पूर्व चिकित्सा :- इसमें ब्लड ट्रांसफ्यूजन आरएच रोग में सर्जरी (जैसे बंद ब्लैडर को निकालना), एंजाइम या कोई दवा देना (जब डिलीवरी जल्दी करनी हो तो शिशु के फेफड़ों का विकास तेज करने के लिए) या फिर किसी और प्रसव पूर्व सर्जरी, जेनेटिक मेनीपुलेशन वगैरह को शामिल कर सकते है। आजकल ये सब काफी आम होता जा रहा है।
अंगदान करना :- यदि जांच में पता चला कि भ्रूण जीवित नहीं रह पाएगा तो माता-पिता उसके स्वस्थ अंग, किसी दूसरे नवजात को दान में देने का निर्णय ले सकते है। इस तरह उन्हें लगता है कि उनके नुकसान की कुछ तो भरपाई होगी। ऐसी स्थिति में की नियोनेटोलोजिस्ट सही जानकारी है सकता है। जहां तक प्रसव पूर्व निदान को बात है, यह हमेशा याद रखे कि अच्छी से अच्छी सुविधाओं से युक्त लेब में भी गड़बड़ हो सकती है। विशेषज्ञ व अच्छी तकनीकों के बावजूद गलतियां हो सकती है। ऐसी अवस्था में किसी विशेषज्ञ की सलाह लिए बिना कोई कदम न उठाएं।
याद रखे कि आमतौर पर ऐसे मामले कम ही होते है, जब इस जांच में शिशु को कोई समस्या हो। आमतौर पर स्वस्थ मांएं, स्वस्थ शिशु को भी जन्म देती है। अंत में सभी समस्याओं व संदेहों का कोहरा छंटता है और गर्भावस्था का सुखद नतीजा सामने आता है।
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