नौ महीने तक पेट में रहने के बाद साफ-सुथरे, गोल-मटोल शिशु बाहर नहीं आते। उन्हें भी बाहर आने में मेहनत करनी पड़ती है नतीजन उनके रूप-रंग पर इसका असर पड़ता है। हालांकि सभी लक्षण अस्थायी होते हैं। अस्पताल से घर आने तक शिशु अपने सुंदर मनमोहक रूप में आ जाता है।
 
टेढ़ा-मेढ़ा सिर:- कई बार शिशु के सिर का घेरा उसकी छाती से भी बड़ा होता है। कई बार जन्म की प्रक्रिया में भी सिर का आकार टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है। अगर सिर बाहर निकलते समय गलत तरीके से दबाया जाए तो उस पर गूमड़ उभर आता है। यह दो-तीन सप्ताह में ठीक हो जाता है और शिशु का सिर सही आकार में आने लगता है।
 
नवजात के बाल:- कुछ नवजात गंजे होते हैं तो कुछ के सिर पर घने बाल होते हैं। वैसे ये सारे बाल धीरे-धीरे झड़ जाते हैं और नए रंग व बनावट के बाल उगते हैं।
 
शरीर पर मोमी परत:- मोमी परत उसके शरीर को एम्निओटिक द्रव्य के असर से बनाती है। कई बार प्रीमेच्योर बच्चों में यह परत दिखाई देती है। पोस्टमेच्योर बच्चों में यह बिल्कुल नहीं होती।
 
जननेंद्रियों की सूजन:- नवजात लड़का व लड़की दोनों की जननेंद्रियों में सूजन हो सकती है। छाती में भी सूजन हो सकती है। कई बार उनसे हल्का सा द्रव्य भी निकलता है। लडकियों में माँ के हार्मोन की वजह से, योनि से हल्का स्राव हो सकता है। ये सब असर 7 से 10 दिन में खत्म हो जाते हैं।
 
आँखों की सूजन:- कई बार नवजातों की आँखों के पपोटों में भी सूजन होती है। यह भी कुछ दिन में ठीक हो जाती है।
 
त्वचा:- शिशु हल्की सफेद, गुलाबी या उभार भी होता है। कई बार तो ये मस्से स्वयंकी आँखों के पपोटों में भी सूजन होती है।ही झड़ जाते हैं। शरीर पर अलग-अलग रंगयह भी कुछ दिन में ठीक हो जाती है। के चकत्ते बाद में हल्के पड़ जाते हैं पर पूरी तरह नहीं मिटते।
 
त्वचा :- शिशु हल्की सफेद, गुलाबी या सलेटी सी त्वचा के साथ पैदा होते हैं। जन्म के कुछ घंटों तक पिगमेंटेशन शुरू नहीं हुआ होता। चेहरे पर अस्थायी दाग-धब्बे भी दिख सकते हैं। उनकी त्वचा हवा के संपर्क में आने के कारण रूखी व शुष्क भी हो सकती है।
 
लैंगो:- कई बार नवजात के कंधों, पीठ व माथे पर काफी बाल होते हैं जो जन्म के समय से पहले या बाद में जन्म लेने वाले शिशुओं में भी पाए जाते हैं। ये बाल कुछ ही समय में अपने-आप झड़ जाते हैं।
 
बर्थ मार्क:- शिशुओं के शरीर पर जन्म से ही कुछ निशान हो सकते हैं। जिन्हें बर्थमार्क कहते हैं। त्वचा पर हल्का या गहरा चकत्ता हो सकता है। बाजू या जांघ पर काला धब्बा हो सकता है। कई बार छोटे से मस्से जितना उभार भी होता है। कई बार तो ये मस्से स्वयं ही झड़ जाते हैं। शरीर पर अलग-अलग रंग के चकत्ते बाद में हल्के पड़ जाते हैं पर पूरी तरह नहीं मिटते।