side effects of intermittent fasting
side effects of intermittent fasting

Intermittent Fasting Tips: आयुर्वेद के अनुसार सुबह का भोजन एक राजा की भांति करना चाहिए क्योंकि 10 से 12 घंटे पेट खाली रहने के बाद सुबह के समय शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। वहीं इंटरमिटेंट फास्टिंग से आप ठीक इसके उलट करते हैं। क्या सही है और क्या गलत आइए जानते हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल की सबसे चॢचत डाइट है। यह वेट लॉस इंडस्ट्री का नया ट्रेंड बन गया है। विशेषज्ञ इसे सही ठहराने के लिए अक्सर कहते हैं कि ‘फास्टिंग’ प्राचीनकाल से शरीर को शुद्ध करने का तरीका रहा है, जिसे हजारों सालों से अपनाया जा रहा है। कुछ का कहना है कि इसका इतिहास ऋषियों के समय से जुड़ा हुआ है और यही उनकी लंबी उम्र का राज था।

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भारत में फास्टिंग यानी उपवास ज्यादातर धार्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है। कुछ लोग हफ्ते में एक बार उपवास रखते हैुं तो कुछ पूॢणमा के दिन। तो, अगर कुछ फायदेमंद है, तो ज्यादा करना और भी बेहतर
होगा, है ना? कम-से-कम इसी सोच पर हेल्थ इंडस्ट्री काम करती है। इसीलिए, सोच- समझकर किए जाने वाले प्राचीन उपवास को नजरअंदाज कर दिया गया है और उसकी जगह जुनूनी उपवास ने ले ली है।
नतीजतन, आज कई तरह के उपवास के तरीके मौजूद हैं। इनमें से कुछ बेहद सख्त हैं, जिनमें कई दिन बिना खाना खाए रहना शामिल है। वहीं, 5:2 पैटर्न है, जिसमें हफ्ते के 5 दिन खाना खाया जाता है और 2 दिन
उपवास रखा जाता है। एक और तरीका है अल्टरनेट डे फास्टिंग, जिसमें हर दूसरे दिन उपवास रखना होता है। इसके अलावा, 2-मील डे फास्टिंग प्लान भी है, जिसमें दिन में सिर्फ दो बार खाना खाया जाता है। लेकिन
जैसे ज्यादा प्रोटीन खाने से मसल्स हमेशा बेहतर नहीं बनते। वैसे ही बार-बार और लंबे उपवास से सेहत और वजन में सुधार नहीं होता। इसका मतलब है कि अगर 24 घंटे का उपवास अच्छा है, तो जरूरी नहीं कि 48 घंटे का उपवास और भी बेहतर हो। एक समय के बाद, ज्यादा करना बेअसर हो सकता है और नुकसान भी पहुंचा सकता है। जैसे हर चीज की एक हद होती है, वैसे ही उपवास भी जरूरत से ज्यादा करने पर फायदे की
जगह नुकसान कर सकता है। इस बात का वैज्ञानिक आधार भी है। ब्राजील की यूनिवॢसटी ऑफ साओ पाउलो की रिसर्चर एना बोनासा ने बाॢसलोना में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी की वार्षिक बैठक (ईसीई 2018) में डेटा प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकाला कि ‘वजन घटाने के लिए हर दूसरे दिन या हफ्ते के ज्यादातर दिन उपवास रखना शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन इंसुलिन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है। भले ही इंटरमिटेंट फास्टिंग की वजह से शुरू में तेजी से वजन घट
सकता है, लेकिन लंबे समय में यह सेहत के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
‘तो, असल में करना क्या चाहिए? उपवास करें या न करें? सबसे पहले, इंटरमिटेंट फास्टिंग को प्राचीन ज्ञान कहना ऐसा ही है जैसे वर्चुअल बैटलग्राउंड गेम (पबजी) को असली सीमा पार युद्ध कहना। दिखने में ये
चीजें भले ही समान लगें, लेकिन इनमें मकसद अलग होता है।

जहां इंटरमिटेंट फास्टिंग आधुनिक वेट लॉस इंडस्ट्री की एक शाखा है, जो तेजी से डिटॉक्स और शरीर में बदलाव का वादा करती है। वहीं प्राचीन समय में उपवास का मकसद आध्यात्मिक उन्नति था। पारंपरिक
रूप से उपवास हमेशा चुने हुए शुभ समय (जैसे- एकादशी, नवरात्रि, लेंट, रमजान आदि) में ही क्यों रखे जाते हैं? इसका कारण यह है कि इन दिनों में व्यक्ति आध्यात्मिक विकास के लिए सबसे अधिक ग्रहणशील पाया जाता है। योग ग्रंथों में ‘बह्मïचर्य’ (इंद्रियों की इच्छाओं पर नियंत्रण) और ‘तप’ (साधना और संयम) को
आध्यात्मिक प्रगति के लिए जरूरी आधार (यम और नियम) माना गया है। उपवास, इंद्रियों (खासकर स्वाद) पर नियंत्रण रखने और उनसे किसी तरह की उत्तेजना न पाने का अभ्यास करने का एक तरीका है। यह आपको ‘तप’ सिखाता है, यह एहसास कराकर कि जिन चीजों को हम जरूरी समझते हैं, उन्हें छोड़ना न केवल संभव है, बल्कि बिल्कुल ठीक भी है।

इसलिए शिवरात्रि पर लोग नींद का त्याग करते हैं और उपवास में भोजन को स्वेच्छा से छोड़ देते हैं। इस तरह, उपवास आत्म-अनुशासन का अभ्यास है, जो आत्म-शुद्धि लाने में मदद करता है। यह सिर्फ शरीर की शुद्धि के लिए नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों की चंचलता को शांत करने के लिए था। जब ऐसा होता है, तो यह ‘ओजस'(ऊर्जा और ताकत) को विकसित करने में मदद करता है, जिससे आपकी शारीरिक सेहत और शरीर को भी लाभ मिलता है (वजन घटाने सहित)।

Intermittent Fasting Tips
Morning Breakfast

‘आपको सुबह नाश्ता करना क्यों शुरू करना चाहिए! इंटरमिटेंट फास्टिंग फैट जलाता है और आपको स्वस्थ बनाता है: सच में’ यह हेडलाइन 2017 में अमेरिकी पुरुषों के मैगजीन ‘एस्क्वायर’ में छपी थी। धोखा मत
खाइए, यह सिर्फ विदेशियों तक सीमित नहीं है, यह डाइट अब देसी लोगों में भी लोकप्रिय हो गई है, इतना कि ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ के लिए गूगल सर्च पिछले तीन सालों में दस गुना बढ़ गए हैं। सुबह का नाश्ता अब इंटरमिटेंट फास्टिंग (जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ और इसके पालन करने वाले लोग आईएफ के नाम से भी जानते हैं) के बढ़ते डाइट ट्रेंड का शिकार बन चुका है। इसका कारण यह है कि यह आपको हर दिन 16 घंटे का उपवास और 8 घंटे का भोजन करने के लिए कहता है। इसका मतलब है कि आप अपना ब्रेकफास्ट स्किप कर देते हैं और लंच को पहला खाना बनाते हैं- फिर, लंच और डिनर बीच सारे कैलोरी खाते हैं।
उदाहरण के लिए, आप अपना आखिरी भोजन रात 9 बजे करते हैं और अगले दिन 1 बजे तक कुछ नहीं खाते और इस तरह आप तकनीकी रूप से 16 घंटे फास्टिंग पर रहते हैं और 8 घंटे खाते हैं।

आजकल हम जो पूरे हफ्ते का बुफे खुद को देते हैं, वह हमारी सेहत के लिए हानिकारक है। दिनभर खाना खाते रहना और लगातार छोटे-छोटे स्नैक्स खाते रहने से हमारी सर्केडियन क्लॉक (जैविक घड़ी) बिगड़
जाती है, और यही कारण है कि हर दिन कुछ समय के लिए खाने को रोकना जरूरी है। लेकिन, जो समय हम उपवास के लिए चुनते हैं, वह महत्वपूर्ण है। अपने भोजन के समय को अपनी सर्केडियन क्लॉक से मेल खाते
हुए, दिन में जल्दी खाना और शाम को फास्टिंग रखना।

जैसे ही आप उठते हैं, तुरंत अपने शरीर को खाना देना जरूरी है क्योंकि यह हमारे सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) को दिन के लिए तैयार करता है। ऐसा न करने से हमारे शरीर की घड़ी प्रभावित होती है, जो हमारे
मेटाबोलिज्म (पाचन प्रक्रिया) को नियंत्रित करती है, और इसके परिणामस्वरूप दिल की बीमारियों, डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।

2017 में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि ब्रेकफास्ट स्किप करने से सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) बिगड़ जाती है और जब आप खाना खाते हैं, तो ब्लड ग्लूकोज
लेवल में बड़े उतार-चढ़ाव होते हैं।

बायोमेडिकल लेखक और ‘सीक्रेट्स ऑफ सेरोटोनिन’ की लेखिका कैरोल हार्ट ने पाया कि ब्रेकफास्ट विशेष रूप से हमारे न्यूरोट्रांसमीटर में संतुलन बनाने में बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप अवसाद या कब्ज
की समस्या से जूझ रहे हैं, तो ब्रेकफास्ट करने से आपके सेरोटोनिन स्तर में 10त्न तक वृद्धि हो सकती है। आजकल हम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में पहले से ज्यादा बात कर रहे हैं, जो कि एक बेहतरीन बात
है, लेकिन उसी समय कुछ लोग ऐसे डाइट ट्रेंड्स की सिफारिश कर रहे हैं जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए मददगार नहीं हैं।

दूसरी ओर, मेरी सलाह के मुताबिक, 12 घंटे का खाने का समय (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) ज्यादा स्थिर और सशक्त है।
यह आपको रातभर खाने की अस्वस्थ आदत से बाहर निकालता है, साथ ही 6-7 बजे तक डिनर खत्म करने का समय और पौष्टिक नाश्ता भरपूर लंच के स्वास्थ्य लाभ भी देता है।

शिवरात्रि पर लोग नींद का त्याग करते हैं और उपवास में भोजन को स्वेच्छा से छोड़ देते हैं। इस तरह, उपवास आत्म-अनुशासन का अभ्यास है।