Winter Mood Improvement Habits: सर्दियों के आगमन के साथ ही जहां एक ओर ठंडी हवा और त्यौहारों की खुशी का माहौल होता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के लिए यह मौसम, मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां लेकर आता है।
तनाव एक प्रकार का अवसाद है जो दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करता है।
सर्दियों के दौरान दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं, जिससे प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश का संपर्क कम हो जाता है। ये परिवर्तन शरीर की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को बाधित कर सकते हैं, जिससे मनोभाव और ऊर्जा स्तर में गिरावट आ सकती है। सैड की विशेषता है कि यह हर वर्ष एक विशेष मौसम, मुख्यत: सर्दियों, में अवसाद के लक्षणों के साथ प्रकट होता है। मौसमी भावात्मक विकार के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, तुलसी हेल्थकेयर के निदेशक और प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. गोरव गुप्ता ने बताया कि ‘सैड से पीड़ित व्यक्ति अक्सर
लगातार उदासी, गतिविधियों में रुचि की कमी, नींद की आदतों में बदलाव, अत्यधिक थकान, एकाग्रता में कठिनाई और भूख में बदलाव जैसी समस्याओं से जूझते हैं। हालांकि, इन लक्षणों को प्रमुख अवसाद विकार से मिलता-जुलता माना जा सकता है, लेकिन सैड के मामले में ये लक्षण
मौसमी होते हैं और वसंत के आगमन के साथ कम हो जाते हैं। सैड के सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह माना जाता है कि सूर्य के प्रकाश की कमी शरीर की सर्केडियन रिदम और सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन को प्रभावित करती है। साथ ही, आनुवंशिक
कारक, हार्मोनल बदलाव और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
जो लोग पेशेवर मदद चाहते हैं, उनके लिए साइकोथेरेपी, विशेषकर कॉग्निटिवबिहेवियरल थेरेपी सैड के इलाज में प्रभावी है। यह नकारात्मक विचारों को पहचानने और उन्हें बदलने के लिए व्यक्ति को सशक्त बनाता है। गंभीर मामलों में, जहां लक्षण दैनिक कार्यक्षमता को बाधित करते हैं, वहां एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाइयां सुझाई जा सकती हैं। उचित उपचार के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
डॉ. गोरव ने आगे बताया कि ‘सैड के लक्षणों को प्रबंधित करने और सर्दियों के महीनों को सकारात्मक रूप से अपनाने के लिए कुछ प्रभावी उपायों में लाइट थेरेपी, बाहरी गतिविधियां, शारीरिक व्यायाम और माइंड-बॉडी प्रैक्टिस शामिल हैं। लाइट थेरेपी उज्ज्वल प्रकाश के संपर्क से
सर्केडियन रिदम को संतुलित करती है और लक्षणों को कम करने में मददगार होती है। ठंड के बावजूद दिन के समय बाहर समय बिताने से प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश के जरिए सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ता है, जो मनोदशा सुधारने में सहायक होता है। नियमित शारीरिक व्यायाम जैसे टहलना, योग या अन्य गतिविधियां अवसाद के लक्षणों को कम करती हैं, जबकि ध्यान, माइंडफुलनेस और गहरी सांस लेने की तकनीकें तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करती हैं।’
जैसे-जैसे सर्दियों अपनी ठंडी चादर ओढ़ा रही हैं, मौसमी भावात्मक विकार को समझना और उसे प्रबंधित करने के कदम उठाना आवश्यक है। जीवनशैली में बदलाव अपनाकर, प्राकृतिक रोशनी को गले लगाकर और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेकर, लोग सर्दियों की उदासी को पराजित कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को पुन: प्राप्त कर सकते हैं।
नींद का ध्यान रखें
सर्दियों में लोग अक्सर अधिक सोते हैं या फिर नींद का समय अनियमित हो जाता है। यह मूड को और खराब कर सकता है। हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत डालें। 7-8 घंटे की अच्छी नींद आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
सूरज की रोशनी का लाभ उठाएं

सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और धूप कम मिलती है। धूप की कमी से हमारे शरीर में सेरोटोनिन का स्तर घट सकता है, जो मूड को खराब कर सकता है। सुबह के समय बाहर जाकर हल्की धूप लेना न केवल मूड को बेहतर बनाता है बल्कि विटामिन डी की पूर्ति भी करता है। कोशिश करें कि रोजाना कम से कम 15-20 मिनट धूप में बिताएं।
नियमित व्यायाम करें

सर्दियों में ठंड के कारण लोग घर के अंदर रहना पसंद करते हैं और शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। यह आलस्य और तनाव को बढ़ा सकता है। व्यायाम न केवल आपको शारीरिक रूप से फिट रखता है, बल्कि यह एंडोफन (खुशी देने वाले हार्मोन) को बढ़ाने में मदद करता है। आप योग, जॉगिंग, या घर पर हल्की एक्सरसाइज कर सकते हैं।
संतुलित आहार लें
सर्दियों में लोग अक्सर तला-भुना और मसालेदार भोजन अधिक खाना पसंद करते हैं, जो स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसके बजाय, अपने आहार में मौसमी फल, सब्जियां, नट्स, और साबुत अनाज शामिल करें। यह आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करेगा और मूड को स्थिर रखेगा।
ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे- मछली, अखरोट, और अलसी के बीज, मूड के लिए फायदेमंद होते हैं।
हाइड्रेशन न भूलें
ठंड के कारण लोग पानी पीना कम कर देते हैंए लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना सर्दियों में भी उतना ही जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और त्वचा भी स्वस्थ रहती है। आप हर्बल टी, गुनगुना पानी, और सूप के जरिए भी हाइड्रेटेड रह सकते हैं।
अपनी पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताएं
सर्दियों में मनोदशा को बेहतर बनाए रखने के लिए अपनी पसंदीदा गतिविधियों, जैसे किताबें पढ़ना, म्यूजिक सुनना, या पेंटिंग करना, में समय बिताएं। यह आपको व्यस्त रखेगा और नकारात्मक विचारों से दूर रखेगा।
सोशल कनेक्शन बनाए रखें
ठंड के कारण लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं, जिससे अकेलापन और डिप्रेशन हो सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं, चाहे वह एक छोटी सी मुलाकात हो या फोन पर बातचीत। यह आपके मूड को तुरंत सुधारने में मदद करेगा।
सकारात्मक सोच बनाए रखें
सर्दियों में मूड स्विंग्स होना सामान्य है, लेकिन सकारात्मक सोच और छोटी-छोटी खुशियों का आनंद लेना जरूरी है। हर दिन कुछ समय ध्यान और मेडिटेशन के लिए निकालें। यह आपके दिमाग को शांत करेगा और मूड को स्थिर रखेगा। ठंड में त्वचा शुष्क हो जाती है और बाल भी डैमेज हो सकते हैं। नियमित रूप से मॉइस्चराइजर और हेयर ऑयल का इस्तेमाल करें। अच्छी स्किन और हेयर केयर से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और मूड बेहतर रहेगा।
खुद को प्रेरित करें
सर्दियों के मौसम में नई योजनाएं बनाएं और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित रहें। चाहे वह कोई नया प्रोजेक्ट हो या फिटनेस गोल्स, खुद को व्यस्त रखें।
घर को सर्दियों के अनुकूल बनाएं। गर्म कंबल, खुशबूदार कैंडल्स, और हल्की रोशनी से अपने घर को सजाएं। यह माहौल को सुखद बनाएगा और मूड बेहतर होगा।
