रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव से स्वस्थ होगा आपका दिल: Healthy Heart
Healthy Heart

Healthy Heart: आजकल की तनाव भरी जिंदगी में स्वास्थ्य की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या भी शामिल है। हालांकि हार्ट अटैक महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखने को मिलते हैं। फिर भी पिछले कुछ सालों में हार्ट अटैक से मरने वालों की बढती संख्या चिंता का विषय है। हार्ट डिजीज के कई रिस्क फैक्टर के प्रति जागरुकता का अभाव, अंदेशा होने के बावजूद अनदेखी करना और बचाव के लिए भरसक प्रयास न करना जैसे अहम कारण भी है।

पहले जहां हार्ट डिजीज बड़ी उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती थी, आज 25 साल की उम्र की महिलाएं भी इनसे जूझते मिल जाती हैं। इसके पीछे अनहेल्दी लाइफ स्टाइल, अनहेल्दी फूड हैबिट्स और फैमिली हिस्ट्री मूल जैसे कारण होते हैं जिनसे हाइपरटेंशन, कोलेस्ट्राॅल लेवल का बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी समस्याएं होती है। 45-50 साल में मेनोपाॅज के बाद महिलाओं में भी हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। उनके शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होना इसका प्रमुख कारण है। एस्ट्रोजन हार्मोन रक्त धमनियों में एस्ट्रोजन हार्मोन्स का लेवल कम होने और लिपिड ब्लड फैट बढ़ने के कारण महिलाओं को कोलेस्ट्राॅल बढ़ने और हार्ट स्ट्रोक का खतरा रहता है।

रखें ध्यान

अगर महिलाएं अपनी लाइफ स्टाइल में माॅडिफिकेशन करें, हेल्दी डाइट का सेवन करें और अपनी एक्टिविटीज और हैल्थ चैकअप को रेगुलर फोलो करें तो वे हार्ट के रिस्क फैक्टर्स को कम कर सकती हैं और हार्ट को हैल्दी रख सकती हैं।

वजन करे नियंत्रित

वैज्ञानिकों का मानना है कि मोटापा तकरीबन हर बीमारी की जड़ है। हार्ट को हैल्दी रखने के लिए अपने वर्तमान वजन से कम से कम 10 प्रतिशत घटाना होगा। यह डाइट कंट्रोल और रेगुलर एक्सरसाइज से ही संभव होगा। सबसे जरूरी है कि जब भूख हो, तभी खाएं। दिन में 1800 कैलोरी की जगह 500-1000 कैलोरी ही खानी चाहिए। दिन में 3 बार भरपेट भोजन करने के बजाय 5-6 बार मिनी मील लेने चाहिए। एक बार में 300 ग्राम से ज्यादा नहीं खाना चाहिए और जो भी खाएं धीरे-धीरे चबा-चबाकर खाना चाहिए।

महिला चाहें वर्किंग हो, नाश्ता जरूर करना चाहिए। बाहर का खाना खाने या जंक फूड के बजाय घर का बना भोजन ही प्रेफर करना चाहिए। लंबे ऑफिस टाइम में लगने वाली छोटी-छोटी भूख को शांत करने के लिए घर से ही हल्के स्नैक्स, फल या ड्राई फ्रूट्स ले जाना बेहतर है।

डाइट का रखें ध्यान

Diet for Healthy Heart
Diet for Healthy Heart

पौष्टिक तत्वों से भरपूर हल्का और सुपाचय आहार करें। कार्बोहाइड्रेट और वसा के बजाय फाइबर, विटामिन्स और हाई प्रोटीन डाइट लें। होल ग्रेन या मल्टीग्रेन मोटा पिसा चैकरयुक्त आटे का इस्तेमाल करना चाहिए। रेनबो डाइट को फोलो करें यानी थाली में 5 रंगों को जरूर शामिल करें। मौसमी सब्जियां, अंकुरित अनाज, सलाद, दाल अपने भोजन में शामिल करें। दिन में एक कटोरी दही जरूर खाएं क्योंकि इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया सेहत के लिए फायदेमद है। फ्रूट जूस पीने के बजाय मौसमी फल खाएं। दिन में कम से कम 2 सर्विंग फल जरूर खाएं। कोशिश करें कि फल खाने के साथ न खाकर ब्रंच टाइम में लें। ब्रंच टाइम में महिलाएं ड्राई फ्रूट्स और सीड्स भी ले सकती हैं।

मैदा, चावल, चीनी जैसे रिफाइंड खाद्य पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक, रेडिमेेड जूस जैसी हाई शूगर ड्रिंक्स, तले-भुने आहार से परहेज करना चाहिए। दिन के खाने में 10 ग्राम ऑयल ले सकते हैं। आहार में नमक और चीनी की मात्रा कम करके, वजन कम करके ब्लड प्रेशर मेंटेन करें। भोजन में लहसुन, अदरक, प्याज, सूखे मेवे, अलसी के बीज, दालचीनी, मैथी दाना जैसी कोलेस्ट्राॅल कम करने वाली चीजें शामिल करें। टोंड या स्किम्ड दूध और दूध से बने पदार्थ लें।

रहें एक्टिव

महिलाओं को एक हफ्ते में करीब 150 मिनट या ढाई घंटा एक्सरसाइज जरूर करें यानी रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें। अपनी पसंद और सामर्थ के हिसाब से रेगुलर कार्डियो और स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज करें जैसे-जिम, ब्रिस्क वाॅक, जाॅगिंग, एरोबिक, जुम्बा डांस, साइकलिंग, स्विमिंग, ट्रेडमिल, स्टेशनरी वाॅकिंग, योगा। ध्यान रखें जो भी एक्सरसाइज करें, शुरू में कम करें जिसे धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के साथ बढ़ाएं। ब्रिस्क वाॅक करना चाहती हैं, तो पहले एक-दो दिन 10-15 मिनट वाॅक करें, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाएं। इसी तरह जाॅगिंग के लिए पहले 20 कदम पैदल चलें, 20 कदम दौडें, फिर 20 कदम पैदल चलें।

अगर बाहर न जा पाएं तो घर में भी ट्रेडमिल या स्टेशनरी वाॅकिंग, कार्डियो या स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज, योगा, डांस, स्किपिंग कर सकती हैं। एक्सरसाइज या योगा शुरू करने में मुश्किल हो रही हो तो सोशल मीडिया या एक्सरसाइज एप और एक्सपर्ट की मदद ले सकती है। कोशिश करें कि लिफ्ट के बजाय सीढि़यां चढे-उतरें, बाजार या आसपास जाना हो तो पैदल जाएं, डस्टिंग, गार्डनिंग जैसे काम खुद करें। इससे कैलोरी तो बर्न होगी ही, एक्टिव भी रहेंगी।

बाॅयोलाॅजिकल क्लाॅक को करें फोलो

आप चाहें कामकाजी हो या घरेलू-रोजाना समय पर सोना-जागना, समय पर खाना खाना जरूरी है। 7-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। घरेलू महिलाओं को दिन में सोने से बचना चाहिए। इससे शरीर एक्टिव न रहने के कारण खाना खर्च नहीं हो पाता। अतिरिक्त पोषक तत्व फैट के रूप में मांसपेशियों में स्टोर होने लगते हैं और मोटापा बढ़़ाते हैं। रात को सोने से तकरीबन 3 घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए। खाना पचाने के लिए खाने के 20 मिनट बाद जरूर टहलना चाहिए। रात में भरपूर नींद लेने से एंडोक्राइन ग्लैंड एक्टिव होता है और मेटाबाॅलिज्म दुरुस्त रहता है।

स्ट्रेस को रखें दूर

हार्ट डिजीज का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है स्ट्रेस। वो चाहे काम को लेकर हो, या अपने पसंदीदा काम में उलझा कर तनाव या अवसाद को जहां तक हो सके कम करें। उनके लिए जरूरी है कि टाइम मैनेजमेंट या टाइमफ्रेम बनाकर चलें। प्रोफेशन और पर्सनल लाइफ में बैंलेंस बनाकर चलना चाहिए। दोनों को बराबर समय और महत्ता देनी चाहिए ताकि वे एक-दूसरे पर हावी न हों। तभी वे तनावमुक्त और शांत मन से काम कर पाएंगी।

महिलाओं को ‘मी टाइम‘ भी मेंटेन करना जरूरी है। यानी उन्हें पर्सनल कामों के लिए कुछ समय जरूर निकालना चाहिए। चाहे वो दिन में आधा घंटा ही क्यों न हो। मी टाइम वे अपनी पसंद के कोई भी काम कर सकती हैं चाहे वो पसंदीदा क्रिएटिविटी, या हाॅबीज हो-रीडिंग-राईटिंग, डांस करना, म्यूजि़क सुनना, कुकिंग, गार्डनिंग।

मानसिक तनाव कम करने का सबसे अच्छा तरीका है-किसी भरोसमंद आदमी से अपनी बातें शेयर करना। ऐसी कई परेशानियां होती हैं जिनका कोई हल नहीं होता, बस वो आपके मन से निकल जाती हैं और पीड़ा काफी हद तक कम हो जाती है। वह भरोसेमंद आदमी आपके परिवार का सदस्य या बाहर कोई दोस्त भी हो सकता है।

प्रिवेंटिव चैकअप कराना जरूरी

यह समझना गलत है कि आप हैल्दी और फिट हैं तो आपको हार्ट हिडीज नहीं हो सकती। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे देश में 26 प्रतिशत लोगों को तब तक पता नहीं चल पाता कि उन्हें ब्लड प्रेशर है, जब तक कि हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक जैसी समस्याएं न हो जाएं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री वाली हाई रिस्क कैटेगरी में आने वाली महिलाओं को 30 साल के बाद से नियमित रूप से प्रिवेंटिव मेडिकल चेकअप और 50 उम्र के बाद साल में एक बार रूटीन मेडिकल चेकअप जरूर कराना चाहिए। कम से कम साल में एक बार होल बाॅडी चेकअप जरूर करा लेना चाहिए जिससे किसी भी तरह का अंदेशा होने पर समुचित उपचार कर सकें। किसी बीमारी का पता चलने पर डाॅक्टर की सलाह पर समुचित मेडिसिन और हैल्दी लाइफ स्टाइल से इन्हे कंट्रोल में रखने की कोशिश करनी चाहिए। 

(डाॅक्टर विकास कटारिया, सीनियर कार्डियोलोजिस्ट, होली फैमिली अस्पताल, दिल्ली )