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बदलते मौसम में यदि सबसे पहले कुछ प्रभावित होता है तो वह है नाक, कान और गला। ऐसे में कई उपाय हैं जिन्हें आप घर में उपलब्ध चीजों के माध्यम से न केवल संबंधित रोगों से बच सकते हैं बल्कि उन्हें ठीक भी कर सकते हैं।

श्रवण शक्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि आप अपने कानों को रोगमुक्त रखें। कान में किसी भी प्रकार के दर्द, फोड़े-फुंसी या श्रवण शक्ति में कमी होने पर ये उपाय कारगर हो सकते हैं।

कान के रोगों का उपचार

सुदर्शन और आक के पत्ते का रस 1-1 पाव लें, मीठे तेल में पकायें और जब खूब पक जाए तो छानकर शीशी में भरें। इसे कान में डालें, दर्द बन्द होगा।
कान बहने पर कीकर के फूलों को तेल में पकाकर कान में डाल लें। यह कान बहने से रोकने की उत्तम दवा है।
कान में कीड़ा घुस जाये तो गर्म पानी में थोड़ा-सा नमक डालकर कान में डालें और कान को उल्टा कर दें। कीड़ा मरकर बाहर निकल जायेगा।
कान में दर्द तथा मवाद बहने की शिकायत होने पर प्याज के रस की 5-6 बूंदें हल्का गर्म कर कान में डालने से आराम मिलता है।
तुलसी की पत्तियों का रस गर्म करके चार बूंद कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। यदि कान बहता है तो रस कुछ दिनों तक लगातार डालें।
बच्चों का कान बहता हो तो एक-दो बूंद चूने का पानी ड्रॉपर से डालें।
आम के पत्तों का रस गुनगुना करके कान में डालने से फायदा होता है।
बच्चों को कान दर्द महसूस हो तो मां के दूध में समान मात्रा में कद्दू का रस मिलाकर दो बूंद कान में टपकाएं।
चुकंदर के पत्तों का रस गुनगुना करके दो-दो बूंद दोनों कानों में, तीन-तीन घंटे के अंतर में डालने से कान का दर्द दूर होता है।
फिटकरी 20 माशा, हल्दी एक माशा पीसकर रख लें। आवश्यकता पड़ने पर कान को रुई से साफ करके दो रत्ती दवा डालें। लाभ मिलता है।
मूली के 3 तोला रस में 1 तोला तिल का तेल शुद्ध करके कान में डालने से कान की पीड़ा शान्त होती है।
लहसुन, मूली और अदरक का रस मिलाकर हल्का-सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद डालने से कान में पकी फुंसी शीघ्र नष्ट हो जाती है।
एक कप गुनगुने पानी में चौथाई चम्मच फिटकरी चूर्ण मिलाकर कान धोने से कान का बहना बन्द हो जाता है।
मूली के सूखे पत्तों की राख को तिल के तेल में मिलाकर पका लें। इसे कान में डालने से दर्द दूर होता है।
लहसुन की एक गांठ में से दो कली लेकर उनका छिलका उतार लें। अब दो चम्मच सरसों के तेल में डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। जब लहसुन काला पड़ने लगे तब तेल का बर्तन आग से उतारकर तेल को कपड़े से छान लें। इस गुनगुने तेल को रुई के फाहे से कान में दो-चार बूंद डाल लें। इससे कान का दर्द दूर हो जाता है, साथ ही जमा हुआ मैल निकालने में आसानी होती है।
कान में कीड़ा जाने पर सरसों के तेल को गुनगुना गर्म कर कान में डालने से कीड़ा फौरन बाहर निकल आता है।
फूले हुए सुहागे को पॉउडर करके, कपड़े से छानकर रख लें। इस पॉउडर को दिन में एक बार चार दिनों तक छिड़कें।
सरसों का तेल दस तोला लेकर उसमें एक तोला रतनजोत डालकर पकाएं। जब जलने लगे तो इस तेल को साफ शीशी में भरकर रख लें। कान बहे, दर्द करे आदि सभी परिस्थितियों में यह प्रयोग लाभ पहुंचाता है।
रसौत को घिसकर, मधु मिलाकर बूंद-बूंद कान में डालने से बहुत लाभ होता है।
समुद्र फेन को पीसकर, अत्यंत बारीक चूर्ण बनाकर कान में बुरकने से कर्णस्राव समाप्त होता है।
अमलतास के 100 ग्राम पत्तों को जल में उबालकर क्वाथ (काढ़ा) बनाकर कान का प्रक्षालन करने से कान का बहना बंद होता है।
अदरक के रस में शहद तथा नमक (थोड़ा-सा) डालकर अच्छी तरह मिला लें। उसे गुनगुना करके कानों में टपकाएं, लाभकारी होगा।
नीम के पत्तों को पानी में उबालें और उस पानी से कान साफ करें। इसके बाद निबौरी के तेल को गर्म करके उसकी 2-3 बूंदें कानों में डालें। फुंसी से राहत मिलती है।
मुलेठी को घी में मिलाकर हल्का गर्म करें व कान के आसपास लेप करें। फुंसी की पीड़ा में लाभ मिलता है।
सुदर्शन के पत्तों पर देसी घी लगाकर हल्का गर्म करें व कान के नीचे सेक करें। फुंसी की पीड़ा शांत हो जाएगी।

नाक के रोगों का उपचार

नाक के रोगों से मुक्ति पाने के लिए नीचे बताए गए इन नुस्खों को आजमाएं।
बबूल का गोंद, लचूर और अऌफीम एक-एक चुटकी लेकर मिला लें और इसे ड्रापर से नाक में एक-एक बूंद डालें तों नकसीर आनी बंद हो जायेगी।
नीम की पत्तियों (कोपलों) का रस एक-एक बूंद नाक में हर रोज डालें तो संास रोग ठीक हो जाएंगे, बन्द नाक खुल जायेगी।
फिटकरी को पानी में घोलकर नाक में डालकर, उसे गले से बाहर निकालते हुए कुल्ले करने से नकसीर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।
नींबू के रस को ड्रापर से नाक में दो-दो बूंद डालते रहें तो भी नकसीर रोग ठीक हो जायेगा।
अगर नाक में कोई चीज फंस जाये तो तम्बाकू पीसकर सूंघिये ताकि छींक आने पर फंसी हुई चीज बाहर निकल जाए।
सूखा आंवला 25 ग्राम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह छानकर पानी पीएं तथा आंवले को पीसकर तालू और माथे पर लेप करें।
10 ग्राम मुल्तानी मिट्टी को कूट लें और एक प्याला पानी में भिगो दें। सुबह ऊपर का पानी पीएं तथा नीचे बैठी मिट्टी का माथे पर लेप करें।
मेहंदी की ताजी पत्तियां पानी में पीसकर तलवों में लगाने से नकसीर बंद हो जाती है।
नाक का खून बन्द करने के लिए सिर पर ठंडे पानी की धार डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।
नकसीर आने पर नाक पर ठण्डा पानी या बर्फ लगाने से रक्तस्राव रुकने में सहायता मिलती है।
रात को कुछ किशमिश भिगो दें तथा सुबह चबाकर खा लें। कुछ दिन नियमित लेने से बार-बार नकसीर आना बन्द हो जाता है।
नाक में फुंसी हो, नाक में सूखापन हो या जब नकसीर फूट जाये तो घी 2 से 4 बंूंदें हर चार-पांच घण्टे बाद नाक में डालें।
नकसीर आए (नाक से खून बह रहा हो) तो फिटकरी का लेप माथे पर करें। गाय के दूध में फिटकरी मिलाकर नाक में छोड़ने से भी नकसीर में आराम मिलता है।
आम की गुठली की गिरी का रस नाक में टपकायें, खून का बहना बन्द हो जाता है।
बार-बार नकसीर फूटे तो आंवले का रस बीस-बीस ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें।
तेज धूप के कारण नाक से रक्तस्राव होने पर सिर पर कुछ देर तक शीतल जल डालने से रक्तस्राव बंद होता है।
नारियल का पानी 100 ग्राम दिन में कई बार पिलाने से नाक से रक्तस्राव की विकृति नहीं हो पाती। ग्रीष्म ऋतु में यह अधिक गुणकारी चिकित्सा है।

गले के रोगों का उपचार

गले की खराश व दर्द से जल्द राहत पाना चाहें तो नीचे बताए गए सरल एवं सऌफल देसी नुस्खों को अपनाएं।
गन्ना भूनकर चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
बच, खुरासानी अजवायन, मालकांगनी, कुलंजन, हरड़ की गिरी, सेंधा नमक-इन सबको बराबर पीसकर चूर्ण बना लें। इसका सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें।
बड़ा गोखरू, खिरेंटी, सोंठ, छोटी पीपल, कालीमिर्च इन सबको 1 तोला लेकर सिल पर पीसकर मिश्री के साथ चाटें।

अकरकरा, कुलंजन और मुलहठी के टुकड़े, सुपारी की तरह मुंह में रखने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, हरड़, बहेड़ा, आंवला और जवाखार-इन सबका चूर्ण थोड़ा-थोड़ा मुंह में डालते रहें।
गले में दर्द, सूजन, जलन, होने पर मुलहठी मुंह में डालकर चूसें, अत्यंत उपयोगी है।
यदि गले में खराश और दर्द हो तो गुनगुने पानी में सिरका मिलाकर गरारे करें। इससे गले की पीड़ा समाप्त हो जाएगी।
गले के रोगों में जामुन की छाल के सत को पानी में घोलकर ‘माउथ वॉशÓ की तरह इससे गरारा करना चाहिए।
गले में जलन व सूजन होने पर पालक के पत्ते थोड़े-से पानी में उबालकर लुगदी गले में बांध लीजिए, थोड़ी देर में आराम आ जायेगा।
दस ग्राम अनार के छिलके सौ ग्राम पानी में उबालें, इसमें दो लौंग भी पीसकर डाल दें। जब पानी आधा रह जाये तब थोड़ी-सी फिटकरी डाल दें। गुनगुने पानी से गरारे करें। गले की खराश मिट जायेगी।

लसोड़े (गोंदा) की छाल दस ग्राम, सौ ग्राम पानी में मंदी आंच पर चढ़ा दें। आधा पानी होने पर उस पानी से गरारे करें। गले की खराश ठीक हो जायेगी।
गले में सूजन आने पर हरे धनिये को पीसकर उसमें गुलाब जल या बेसन मिलाकर गले पर लेप करें।
ताम्बूल पत्रा (पान, मीठा पत्ता) में लौंग, मुलहठी, पिपरमेंट लगाकर दिन में तीन चार बार सेवन करें। पान का डंठल भी डाला जा सकता है।
गले में काकल की वृद्धि होने पर दालचीनी बारीक पीसकर अंगूठे से सुबह-सुबह काकल पर लगायें और लार टपका दें। इससे काकल वृद्धि दूर होगी।
आंवले का चूर्ण गाय के धारोष्ण (दूध ताजा) के साथ सेवन करने से बैठा गला ठीक हो जाता है।
यदि सर्दी-जुकाम के कारण गला बैठ गया हो तो एक गिलास पानी में चुटकी-भर हल्दी डालकर पानी को उबालें। जब पानी गुनगुना हो जाए तब गरारे करने से लाभ होगा।
अनार की कली, सूखा धनिया, पोस्त व शहतूत के हरे पत्ते, मसूर की दाल छह-छह माशे लेकर एक सेर पानी में काढ़ा बनाएं। इसका कुल्ला करने से गले की सूजन और दर्द दूर हो जाता है।
एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवायन डालकर इतना उबालें कि पानी लगभग आधा रह जाए। इस पानी से गरारे करने पर गले की सूजन, दर्द आदि में लाभ होता है।
एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ें और उसमें नमक मिलाकर उस पानी से गले के अंदर तक सुबह थोड़ी-थोड़ी देर बाद 3-4 बार गरारे करें। 1-2 दिन में गला सामान्य हो जाएगा और स्वर विकृति व सूजन भी जाती रहेगी।
गले की खराश से छुटकारा पाने के लिए गरारे करें। गुनगुने पानी में नींबू का रस निचोड़कर हर रोज 2-3 बार गरारे करें। यह क्रिया लगातार कुछ दिन तक करें, गले की खराश से तो छुटकारा मिलेगा ही, गले के अन्य विकारों का भी दमन होगा।
शहद गले के विकारों में रामबाण असर करता है। एक गिलास गर्म पानी में 2 चम्मच शहद घोलें, फिर घूंट लेकर धीरे-धीरे पिएं, गले को राहत पहुंचेगी। सुबह 1-1 घंटे के अंतराल में दो बार शहद मिले गर्मा-गर्म पानी के घूंट लें, गला सामान्य हो जाएगा।
गले की सूजन का इलाज प्याज के टुकड़े दही व मिश्री के साथ खाने से हो जाता है। दही व मिश्री के घोल में पड़े प्याज के टुकड़े खाने से गले की सूजन व कांटों-सी चुभन भी जाती रहेगी।
अगर गला, जीभ अथवा तालू पक जाए तो प्याज के रस मिले पानी से गले की तह तक गरारे करें। गरारे ध्ीरे-धीरे करें और पानी को जीभ व तालू तक अच्छी तरह घुमाएं। इस विधि से हर रोज सवेरे गरारे करने से 2-3 दिन में गले, जीभ व तालू का पकना थम जाएगा।

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