यह आर्टिकल खासकर उन लोगों के लिए है जो सीनियर सिटीजन की कैटेगिरी में आते हैं या कुछ सालों में आने वाले हैं। कोई भी नहीं चाहता कि वह बूढ़ा हो या कोई उसे बूढ़ा कहे लेकिन यह जीवन का कटु सत्य है जिसे हर किसी को अपनाना होता है। हर कोई चाहता है कि वह हमेशा जवान और स्फूर्तिवान बना रहे। परंतु असल में होता यह है कि 40-50  साल की उम्र पार होते ही शरीर को अनेकों बीमारियाँ घेरने लगती हैं। खासकर इस उम्र के लोगों को कमजोरी, जोड़ों, हार्ट संबंधी तथा अन्य कई समस्याओं से जूझते देखा जाता है। 
इस उम्र में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि शरीर का खास ख्याल रखा जाए। योग इस उम्र के लोगों को उनकी तकलीफ़ों से निजाद दिलाने के लिए बेहद अहम भूमिका अदा करता है। प्रतिदिन योगाभ्यास करने से शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है, साथ ही शरीर में लचीलापन आता है और जकड़न दूर होती है। प्रतिदिन योगाभ्यास करने वाला व्यक्ति 60 साल की उम्र के बाद भी अपने आपको युवा महसूस करता है। कुछ ऐसे जरूरी योगाभ्यास हैं जिनको नियमित करने से बढ़ती उम्र के प्रभाव कों कई गुना कम किया जा सकता है।    
 
1.सूक्ष्म व्यायाम
 
इसमें कई आसनों का समूह होता है जैसे- टो बैंडिंग, एंकल बैंडिंग, एंकल रोटेशन, रिस्ट बैंडिंग एंड रोटेशन, गर्दन तथा कंधे के व्यायाम। यह मुख्यतः जोड़ों से संबन्धित तकलीफ़ों से निजाद पाने के लिए किया जाता है। सूक्ष्म व्यायाम शरीर के छोटे से छोटे जोड़ पर अपना प्रभाव डालता है। इस अभ्यास को नियमित रूप से करने से जोड़ों का दर्द तथा जकड़न जैसी समस्या तो दूर होती ही है साथ ही इसका प्रभाव आर्थेराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों को ठीक करने में भी देखा गया है। सूक्ष्म व्यायाम कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है अर्थात इस अभ्यास को करने के लिए खाली पेट होना जरूरी नहीं। 
 
2.ताड़ासन
 
इस आसन में सीधे खड़े होकर दोनों हाथ सिर के ऊपर ले जाकर पूरे शरीर को ऊपर की ओर खीचते हैं। फिर धीरे धीरे ऐडियों को भी ऊपर उठाते हैं। इस अभ्यास को करने से शरीर की जकड़न दूर होती है। इसके साथ यह अभ्यास पैरों की तथा जांघों की मांसपेशिओं कों ताकत देता है जिससे इस उम्र में होने वाले शरीर के असंतुलन को सही करने में मदद मिलती है। साथ ही यह कब्ज की समस्या को भी दूर करता है। उम्र बढ्ने के साथ भूलने की समस्या का सामना भी करना पड़ता है। इसके अभ्यास से एकाग्रता तथा स्मरण शक्ति बढ़ती है जिससे भूलने की प्रवत्ति में सुधार होता है।   
 
3.तितली आसन
 
इस आसन में अपने दोनों पैरों के तलवों को मिलाकर घुटनों कों ऊपर नीचे किया जाता है। यह आसन किडनी और ब्लैडर को मजबूत बनाता है और शक्ति प्रदान करता है, जो बुजुर्गों में यूरीन संबंधी होने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर को ऐक्टिव कर देता है जो थकान को भागता है। साथ ही इससे पैरों और जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह महिलाओं में मैनोपोज के समय की तकलीफ़ों को कम करने में मदद करता है। 
 
4.भुजंगासन
 
इस आसन में पेट के बल लेटकर दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखते हुए नाभि से ऊपर तक के शरीर को ऊपर उठाया जाता है। 40 की उम्र के बाद ज़्यादातर लोग कमर दर्द या जकड़न से परेशान रहते हैं। यह आसन इस समस्या से निजात दिलाता है साथ ही कंधे और सीने को भी लचीला बनाता है। इस आसन को करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।    
 
5.शवासन 
 
यह एक रिलेक्सेशन आसन है। इसमें शरीर को पूरी तरह से रिलैक्स कराया जाता है। बुजुर्गों में खासकर अनिद्रा की समस्या देखी जाती है। शारीरिक एक्टिविटी कम होने के कारण नींद अच्छे से नहीं आ पाती। नियमित रूप से योगासन करने के बाद शवासन करना अनिद्रा की समस्या को जड़ से समाप्त कर देता है। जिन लोगों को हाई बी॰ पी॰ की समस्या है, उन्हें शवासन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। यह आसन शारीरिक के साथ साथ मानसिक रिलेक्सेशन भी प्रदान करता है।    
 
6.अनुलोम विलोम प्राणायाम
 
किसी आरामदायक स्थिति में सीधे बैठकर सबसे पहले बाईं नासिका से श्वास लेते हुए दाईं नासिका से छोड़ना है फिर दाईं नासिका से श्वास लेते हुए बाईं नासिका से छोड़ना है। श्वास धीमी और गहरी होनी चाहिए। इस प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। यदि नियमित रूप से प्राणायाम का अभ्यास करें तो शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है और शरीर के साथ साथ मन भी शांत होता है तथा उसे ऊर्जा मिलती है।