पीपल, दारू, हल्दी, मजीठ, सरसों, सिरस के बीज,हींग, सोंठ, काली मिर्च, इन सबको 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर छान लें। इस चूर्ण को बकरी के मूत्र में पीसकर नस्य देने तथा तथा आंखों में आजमाने से उन्माद, ग्रह तथा मिर्गी रोग नष्ट होते हैं।
ब्राहमी के पत्तों का स्वरस 40 ग्राम, 12 रत्ती कूट का चूर्ण तथा 48 रत्ती शहद, इन सबको मिलाकर पीने या पिलाने से भी पागलपन के लक्षण जाते रहते हैं।
तगर, बच तथा कूट, सिरस के बीज, मूलहठी, हींग, लहसुन का रस इन्हें एक भार (प्रत्येक 10 ग्राम) में लेकर बारीक पीसकर छान लें। फिर इन्हें बकरी के मूत्र में पीसकर, नस्य देने तथा आंखों में डालने से पागलपन का रोग दूर हो जाता है।
कद्दू के बीज छः माशे, खसखस के बीज छः माशे, किशमिश इक्कीस दानें पानी में पीस व छानकर सुबह-शाम पिलाएं।
मलकंगनी का तेल दो-दो बूंद एक बताशे में डालकर सुबह-शाम खाने से मस्तिष्क के सभी रोग, पागलपन आदि ठीक हो जाते हैं।
