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‘तनाव’ ये शब्द सुनते ही सबके मन में सिर्फ और सिर्फ इससे जुड़े नकारात्मक विचार ही आने लगते हैं। लगता है जैसे तनाव हमारी जिंदगी को निगल न जाए। लेकिन तनाव हमेशा बुरा नहीं होता। इसके भी कुछ अच्छे और सकारात्मक पहलू होते हैं, जो हमें चिंताग्रस्त नहीं करते बल्कि तरक्की की राह पर आगे ले चलते हैं।

कहा जाता है कि जिसके जीवन में तनाव नहीं वह हर दु:ख स दूर है। माना कि यह बात काफी हद तक सच है, लेकिन यह सच नहीं है कि तनाव हमेशा जीवन में दु:ख ही लाता है क्योंकि हर चीज के दो पहलू होते हैं, फायदे और नुकसान होते हैं।

तो तनाव के भी दो पहलू हैं- अच्छा और बुरा तनाव। तनाव से दु:ख और चिंतावाला नाता-रिश्ता तो हम बहुत जल्दी जोड़ लेते हैं, लेकिन इसके सकारात्मक रूप को समझ ही नहीं पाते, जो हमें हमारी अंदरुनी ताकत से परिचित कराता है।

जीवन का हिस्सा समझें तनाव को

जब तक जीवन है, तब तक संघर्षों का दौर चलता रहता है, एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी रहती है। कभी स्वास्थ्य समस्याएं घेर लेती है तो कभी मानसिक प्रताड़ना और भावनात्मक पीड़ाएं पीछा नहीं छोड़तीं और फलस्वरूप हम तनाव में जीने लगते हैं, निराशावादी होने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई बार लोग जीवन लीला ही समाप्त करना बेहतर समझते हैं।

यह सोचकर अब उनके पास कोई रास्ता ही नहीं बचा है, लेकिन जीवन की ऊंची-नीची राहों में यह तनाव ही कई बार बेड़ा पार लगाता है। अगर थोड़े से धैर्य से काम लिया जाए और नकारात्मक विचारों को परे खिसकाया जाए तो आप खुद पाएंगे कि आपके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है जो आपको संघर्षों से लड़ने की दृढ़ शक्ति प्रदान कर रहा है, आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है और विपरीत परिस्थितियों में भी आपको लक्ष्य तक पहुंचाने का मार्ग दिखा रहा है, न कि हार मानकर बैठ जाने का।

मस्तिष्क को सक्रिय बनाते हैं कुछ तनाव

तनाव हमेशा अवसाद ही नहीं देते, बल्कि कई बार मस्तिष्क को सक्रिय और तीक्ष्ण भी बनाते हैं। शोध भी बताते हैं कि तनाव का सामना करना हमारे लिए एक समस्या को हल करने का अवसर देता है। अब आप इसे अवसर समझिए या कोई मजबूरी, लेकिन राह तो आपने निकाल ही ली, जिसका आपको लाभ ही मिला, नुकसान नहीं। आपने खुद भी यह अनुभव किया होगा कि जब काम का अत्यधिक दबाव होता है या फिर परीक्षा की घड़ी नजदीक होती है तो हम न चाहते हुए भी तनाव का शिकार होने लगते हैं।

हमें लगता है कि हम तय सीमा अवधि में अपना लक्ष्य पूरा कर पाएंगे या नहीं अथवा परीक्षा में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन दे पाएंगे या नहीं और तब पिछड़ने के डर से या फिर असफल होने के डर से हम दोगुनी मेहनत करते हैं, क्योंकि तब ये तनाव ही हमें समय का महत्त्व सिखाता है, हमें सतर्क और सजग करता है और तय सीमा अवधि केअंदर-अंदर लक्ष्य प्राप्ति के लिए तैयार करता है।

हमें फूॢत देता है और हमारे दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखता है। जब दिमाग चुस्त-दुरुस्त होगा तो उसका असर आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। अगर जीवन में इस तरह के तनाव न हों तो आगे बढ़ने का जज्बा भी खो जाएगा और जीवन में कुछ नया सीखने और करने की ललक भी समाप्त हो जाएगी।

ये सकारात्मक तनाव हमें तब तक चैन से बैठने नहीं देते, जब तक हम अपना काम पूरा न कर लें और निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति न कर लें। फिर जो सुकून और शांति महसूस होती है, उसके कहने ही क्या! इसके विपरीत हद से ज्यादा तनाव हमारा सुख-चैन सब कुछ छीन लेती है।

इन परिस्थितियों में हम पिछली घटनाओं को ही कुरेदते रहते हैं और अवसाद में डूबे रहना चाहते हैं। बेहतर तो ये होगा कि आप तनाव को भी एक चुनौती की तरह लें और अपनी योग्यता व क्षमता को पहचानें।
यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप तनाव में घुलकर घुट-घुटकर अपने जीवन का सत्यानाश करना चाहते हैं या फिर तनाव से ही तरक्की की नई राह निकाल पाते हैं।

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