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अधिकतर लोग सोचते हैं कि फिजियोथेरेपी बुजर्गों, हड्डियों के रोगियों या खिलाड़ियों के लिए ही होती है, लेकिन सच तो यह है कि फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल अब लगभग हर बीमारी में होने लगा है। कैसे और क्यों? आइए जानें।

आमतौर पर डॉक्टर ही मरीजों को फिजियोथेरेपी के लिए भेजते हैं। लेकिन अब बहुत से लोग जागरूक हैं और खुद ही इस थेरेपी का लाभ उठाने लगे हैं। फिजियोथेरेपी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल महिलाओं और बुजुर्गों द्वारा किया जाता है। लगभग 70-80 प्रतिशत बुजुर्ग इस पद्घति का लाभ उठाते हैं। वयस्कों में इस थेरेपी का इस्तेमाल करने वाले लगभग 40-50 प्रतिशत लोग हैं, जिन्हें एक्सीडेंट आदि के बाद इसकी सलाह दी जाती है।

बच्चों में जन्मजात समस्याएं जैसे पोलियो, दिमागी या शारीरिक विकास कम होने की स्थिति में इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है और 10-20 प्रतिशत बच्चे फिजियोथेरेपी लेते हैं। महिलाओं में आमतौर पर 45 साल के बाद कई हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिनसे उनमें हार्मोन असंतुलन, कैल्शियम की कमी, जोड़ों की समस्याएं आदि उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसे में महिलाओं को दवाओं से ज्यादा फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है।

क्या है फिजियोथेरेपी?

दर्द से छुटकारा पाने के लिए केवल दवा लेना ही काफी नहीं होता। इसके अलावा भी कई ऐसी थेरेपी हैं, जो बिना दवा के ही आपको दर्द से मुक्ति दिला सकती हैं। फिजियोथेरेपी ऐसी ही एक थेरेपी है। व्यायाम के जरिए मांसपेशियों को सक्रिय बनाकर किए जाने वाले इलाज की विधा भौतिक चिकित्सा या फिजियोथेरेपी या ‘फिजिकल थेरेपीÓ कहलाती है। चूंकि इसमें दवाइयां नहीं लेनी पड़ती इसलिए इनके दुष्प्रभावों का प्रश्न ही नहीं उठता।

फिजियोथेरेपी को फिजिक्स ट्रीटमेंट भी कहते हैं। यह मेडिकल साइंस की ही एक शाखा है। इसमें इलाज का एक अलग तरीका होता है, जिसमें एक्सरसाइज, हाथों की कसरत, पेन रिलीफ मूवमेंट द्वारा दर्द को दूर किया जाता है। इस थेरेपी का उद्देश्य रोग के कारणों को जान कर उस रोग से मरीज को मुक्त करना है। यह थेरेपी एक तरीके से शरीर को तरोताजा करने का काम करती है। यह शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक क्षेत्र मे अच्छी तरह से काम करने में मदद देती हैं। फिजियोथेरेपी में डॉक्टर, शारीरिक चिकित्सक, मरीज, पारिवारिक लोग और दूसरे चिकित्सकों का बहुत योगदान होता है।

क्यों जरूरी है फिजियोथेरेपी?

रोजाना चलने और थोड़ा बहुत शारीरिक काम करने से पूरी तरह शरीर की एक्सरसाइज नहीं हो पाती। ऐसे में मांसपेशियों का सही संतुलन नहीं बन पाता। आज हमारी जीवनशैली कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल जैसे लग्जरी और आरामप्रद गैजेट्स में सिमट कर रह गई है। इस कारण एक ही मुद्रा में कई घंटे तक बैठे रहना कई शारीरिक और मानसिक बिमारियों का रूप ले रहा है। पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, गर्दन का दर्द, बांहों और कंधों में दर्द आमतौर पर लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने के कारण पैदा होता है।

लोगों में यह गलतफहमी है कि जिम जाकर व्यायाम करना हमेशा फायदेमंद होता है। आपके शरीर के लिए कौन-सा व्यायाम उपयुक्त है, यह भी आपके ही शरीर पर निर्भर करता है, इसलिए रोजाना किया जाने वाला हल्का-फुल्का व्यायाम ही आपके शरीर के लिए बेहतर साबित होता है।

फिजियोथेरेपिस्ट की मानें तो अपने शरीर के लिए व्यायाम चुनने से पहले डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए। यदि आप किसी भी रोग या दर्द से पीड़ित हैं तो बिना फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के कोई भी व्यायाम करना आपके रोग को और बढ़ा सकता है।

इसलिए शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने वाले दर्द और मांसपेशियों का उचित संतुलन बनाए रखने के लिए फिजियोथेरेपी की मदद लें। इस पद्घति में सिकाई और व्यायाम के माध्यम से आप अपने दर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

फिजियोथेरेपी के लाभ

फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल आमतौर पर हड्डियों और जोड़ों की समस्या, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लकवा, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, कार्डियो समस्या, स्पोर्ट्स इंजरी, न्यूरो से संबंधित समस्या, वजन नियंत्रण और महिलाओं की समस्या में किया जाता है। लेकिन यह थेरेपी और इस थेरेपी का लाभ कोई भी उठा सकता है। फिजियोथेरेपी जोड़ों और हड्डियों के साथ-साथ दिल और दिमाग को भी स्वस्थ करती है।

फिजियोथेरेपी ऐसी चिकित्सा पद्घति है, जिसमें दवाओं, इंजेक्शन और ऑपरेशन की आवश्यकता तो नहीं पड़ती, पर नियमितता और संयम काफी मायने रखते हैं। फिर चाहे मौसम सर्द हो या मौसम में बदलाव आ रहा हो। अगर शरीर के किसी हिस्से में दर्द है और आप दवाइयां नहीं लेना चाहते तो परेशान होने की जरूरत नहीं है।

फिजियोथेरेपी की सहायता लेने पर आप दवा का सेवन किए बिना अपनी तकलीफ दूर कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह अत्यंत आवश्यक है। फिजियोथेरेपी में शरीर को मजबूती देने का प्रयास किया जाता है। ताकि शरीर की सभी मांसपेशियां मजबूत बनें।

फिजियोथेरेपी का प्रभाव इनमें है असरदार

  • हार्मोनल बदलाव और पेट से
  • जुड़ी समस्याएं
  • हड्डिïयों व जोड़ों का दर्द
  • गर्दन, कंधे, घुटनों वा चोट का दर्द
  • दुर्घटना से होने वाले दर्द
  • न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

फिजियोथेरेपी की उपचार प्रक्रिया

फिजियोथेरेपी में मशीनों की सहायता से यानी इलेक्ट्रो थेरेपी से रोग में राहत दिलायी जाती है मशीनों में प्रमुख तौर पर टेंस, ट्रैक्शन, आईएफटी, लेजर, अल्ट्रासोनिक आदि मशीनों का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा कुछ उपचार में वैक्स पद्घति का भी उपयोग होता है। इसकी उपचार पद्घति व्यायाम पर भी केंद्रित रहती है।

डॉक्टर रोग के लक्षणों की जांच कर उसके अनुरूप व्यायाम और उपकरणों की मदद निर्धारित करते हैं। उपचार के लिए मरीजों को कई दिनों अथवा कई सप्ताह तक डॉक्टर की देखरेख में व्यायाम करना होता है। जो लोग दवाओं, इंजेक्शन, ऑपरेशन आदि से कतराते हैं, उनके लिए यह पद्घति काफी लाभदायक है, क्योंकि इसमें इलाज इन सबसे परे है।

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