Overview:बार-बार आंख फड़के तो नजरअंदाज न करें, ये विटामिन की कमी का इशारा भी हो सकता है
आंख फड़कना सिर्फ थकान या तनाव का नहीं, बल्कि विटामिन B12 और मैग्नीशियम की कमी का संकेत भी हो सकता है। लगातार आंख फड़कना नर्व और मसल्स से जुड़ी समस्या का हिस्सा हो सकता है। इसे नजरअंदाज करने की बजाय सही डाइट, सप्लीमेंट और पर्याप्त नींद से सुधार संभव है। समय रहते जांच कराना और पोषण पूरा करना जरूरी है
Eye Twitching Vitamin Deficiency: जब हमारी आंख बार-बार खुद‑ब‑खुद फड़कने लगती है, तो हम अक्सर इसे हल्के में ले लेते हैं—कुछ लोग इसे शुभ‑अशुभ मान देते हैं, तो कोई कहते हैं कि यह तनाव या नींद की कमी की वजह से होता है। लेकिन बहुत बार यह आंख फड़कना विटामिन और पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है।
विशेषकर मैग्नीशियम और विटामिन B12 की कमी से नर्व सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे आँख की मांसपेशियाँ झटके देने लगती हैं। न्यूट्रिशनिस्ट बताते हैं कि ऐसी कमी से आँखें फड़कती हैं और साथ में थकावट, कमजोरी या नींद ना आना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं ।
इसलिए, अगर आपकी आंख लगातार २‑३ दिन से फड़क रही है, तो इसे टालें नहीं। सही खुराक, संतुलित डाइट और डॉक्टर की सलाह से आप इसे सुधार सकते हैं। आइए जानते हैं कौन‑सी विटामिन की कमी होती है, क्यों होती है और क्या करें इसे ठीक करने के लिए।
पोषण की कमी भी वजह हो सकती है

आंख बार‑बार फड़कना सामान्य बात लगती है, लेकिन यह सिर्फ तनाव या नींद की कमी से नहीं होता। कई बार हमारे शरीर में पोषण की कमी जैसे मैग्नीशियम या विटामिन B12 की कमी से भी मांसपेशियों में अनचाही झटके आने लगते हैं। Eye twitching यानी मायोकायमिया तब होती है जब नर्व सिस्टम कमजोर हो और मसल्स को गलत संकेत मिलें ।
मैग्नीशियम की कमी से मसल्स में झटके आते हैं

मैग्नीशियम एक ऐसा मिनरल है जो तंत्रिका और मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। अगर शरीर में इसकी कमी होती है, तो मसल्स में स्पाज्म या झटके आने लगते हैं—जिसमें आंख की पलक भी शामिल है। साथ ही थकावट, चिड़चिड़ापन और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं ।
विटामिन B12 की कमी से नसों पर पड़ता है असर
विटामिन B12 की कमी से नसों में असर होता है, जिससे आंखों के आसपास मांसपेशियाँ प्रभावित होती हैं। यह थकावट, चक्कर, जीभ में दर्द और आँख फड़कने जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकती है। कुछ मेडिकल केस रिपोर्ट्स में भी इस कमी से आंखों में झटके आने का संबंध दिखाया गया है ।
कैफीन और स्क्रीन टाइम भी बिगाड़ते हैं हालात
हल्के‑फुल्के कारण जैसे ज्यादा चाय, कॉफी पीना, फोन‑कंप्युटर पर बहुत देर तक देखना, या रात अच्छी नींद न लेना—ये भी आंख फड़कने के कारण बन सकते हैं। ये आदतें मांसपेशियों को थका देती हैं, जिससे झटके बढ़ सकते हैं। इसलिए अपनी दिनचर्या में बदलाव लाना बहुत जरूरी है ।
डाइट सुधारें, सप्लीमेंट लें और नींद पूरी करें
आंख फड़कना यदि २‑३ दिन तक बने रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। आप अपनी डाइट में मैग्नीशियम (पालक, कद्दू के बीज, केला) और विटामिन B12 (दूध, अंडा, पनीर, मांस) शामिल करें। साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और कैफीन सीमित करना फायदेमंद है। व्यक्ति विशेष की स्थिति के अनुसार सप्लीमेंट भी जरूरी हो सकते हैं ।
