effective alternative medicine to eliminate diseases from root
effective alternative medicine to eliminate diseases from root

Alternative Medicine for Disease: छोटी-मोटी बीमारी के साथ बड़े से बड़े रोग के लिए अक्सर हम एलोपैथी का सहारा लेते हैं लेकिन हमारे आसपास कई प्रकार की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां मौजूद हैं, जिनके दुष्परिणाम न के बराबर हैं लेकिन उनके विषय में बहुत कम लोग जानते हैं।

कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया। मानव शरीर परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति है जिसे स्वस्थ और निरोगी रखना हम सभी का कर्तव्य और धर्म है। वर्तमान में जीवन की जटिलताएं इतनी बढ़ती जा रही हैं कि हम कई तरह के शारीरिक-मानसिक रोगों से ग्रसित होते जा रहे हैं। लाख कोशिशों के
बावजूद हम किसी न किसी रोग के शिकार हो जाते हैं। बीमारी से उबरने के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का सहारा लेते हैं। प्रश्न उठता है कि चिकित्सा क्या है? आयुर्वेद के ग्रंथों में चिकित्सा के लिए कहा गया है- ‘याक्रियाव्याधिहरणी सा चिकित्सा निगद्यते। यानी विभिन्न क्रियाएं और औषधियां जिनके माध्यम से हम रोगों का निवारण किया जाता है- वह चिकित्सा है।

Alternative Medicine for Disease
History of Medicine

चिकित्सा का इतिहास बताता है कि तकरीबन सभी सभ्यता और संस्कृतियों ने बीमारियों के इलाज, अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करने और लंबा जीवन जीने के लिए अपनी अलग प्रणाली विकसित की। हालांकि इनके तरीके अलग-अलग थे, जिसकी शुरुआत ईसा पूर्व 3000-3500 ईसा पूर्व के आसपास हुई थी जैसे- चीनी, भारतीय, यूनानी, रोमन, अरबी। भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा जैसी चिकित्सा प्रणालियां विकसित हुई। वैज्ञानिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धति 15वीं सदी के मध्य में शुरू हुई। जो तकरीबन 2500 ईसा पूर्व- 1500 ईसा पूर्व के दौरान तैयार चिकित्सा की प्राचीन प्रणाली से विकसित हुई। 20वीं सदी के मध्य से दवाओं के इस्तेमाल से इलाज करने की ऐसी पद्धति आई जो प्रतिक्रिया स्वरूप बीमारी की स्थिति, उसके कारण का असर खत्म हो जाता है। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी जिसे अब एलोपैथी चिकित्सा के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में ऐलोपैथी भारत ही नहीं, दुनिया के ज्यादातर देशों में चिकित्सा का सबसे
प्रचलित माध्यम है।

पिछले 3 दशकों में हमारे देश में चिकित्सा की पारंपरिक और वैकल्पिक प्रणालियों को मुख्यधारा में शामिल किया गया। भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रयत्नों से 2014 में आयुष मंत्रालय बनाया गया जिसमें भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को महत्व दिया गया और वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में प्रतिष्ठित किया गया।
आमतौर पर जब भी बीमारी से निजात पाने की बात आती है तो अधिकतर लोग एलोपैथ चिकित्सा को ही प्राथमिकता देते हैं। वहीं अगर हम अपनी भारतीय संस्कृति और धरोहर की तरफ देखें तो हम पाएंगे कि अभी भी हमारी कई ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां हैं जो रोगों के गुणदोषों को साम्य अवस्था मे लाकर स्थाई लाभ एवं आरोग्य प्रदान करती हैं। वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का उद्देश्य रोगों को जड़ से खत्म करना है और इसीलिए कई वर्षोंर् से इस क्षेत्र में होने वाले नए अनुसंधानों से
सिर्फ भारत में ही नहीं, विकसित देशों में भी इसे अपनाया जा रहा है।

कोविड-19 महामारी के बाद तो इन वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों का प्रचलन बहुत बढ़ गया है। महामारी के कारण तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप आयुर्वेद, योग और योग सहित वैकल्पिक उपचारों की मांग में वृद्धि हुई है। दुनिया भर में आयुर्वेद और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में रुचि बढ़ रही है। लोग अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्राकृतिक और समग्र समाधान तलाश रहे हैं और आयुर्वेद यही प्रदान करता है। ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वेलनेस उद्योग अब 4.5 ट्रिलियन
डॉलर से अधिक का है और आयुर्वेद जैसी वैकल्पिक उपचार पद्धतियां उस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा हैं। ग्रैंड व्यू रिसर्च की एक अन्य रिपोर्ट से पता चलता है कि वैश्विक वैकल्पिक चिकित्सा बाजार का मूल्य 2022 में 117,210.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2023 से 2030 तक 25.1 प्रतिशत
की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से विस्तार होने की उम्मीद है।

What are the benefits of alternative medicine
What are the benefits of alternative medicine

संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए आज हमारे देश में आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के साथ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां काफी कारगर साबित हो रही हैं। ये पद्धतियां रोगों को जड़ से दूर करने और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने में उपयोगी हैं। वैकल्पिक चिकित्सा ऐसी चिकित्सा प्रणाली जहां पर दवाइयों के बिना या दवाइयों के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति की जा
सकती है। ऐलोपैथी चिकित्सा में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों के विपरीत इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर व्याधि को दूर किया जाता है। खानपान, आहारविहार, रहन-सहन की अनियमितता को दूर कर और प्रकृति के नियमों का पालन करने पर ही व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

ऐलोपैथी की कुछ पद्धतियां तो ऐसी हैं जिनसे रोग तो शीघ्र ठीक हो जाते हैं परंतु उनमें स्थायित्व नहीं होता। कई रोग ऐसे हैं जो कुछ समय बाद दुबारा पनप जाते हैं या दूसरी बीमारी का कारण बनते हैं लेकिन, भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में ऐसे उपचार हैं जो रोग के गुण-दोषों को
साम्यावस्था में लाकर स्थायी लाभ और आरोग्य प्रदान करते हैं।

एलोपैथी चिकित्सा पद्धति लेकिन दवाइयां खाने से व्यक्ति को आराम तो जरूर मिल जाता है, लेकिन इनसे होने वाले कई तरह के साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जबकि पौराणिक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का पालन अगर सावधानीपूर्वक किया जाए, तो इनके
साइड इफेक्ट की संभावना न के बराबर रहती है। इनके द्वारा उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
ही करते हैं।
वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का विकल्प है और इन्हें अपनाकर हम समग्र स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं। अगर हम अपना आहार-व्यवहार वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार रखते हैं और जीवनयापन करते हैं, तो रोग होने की संभावना कम रहती है।

इन चिकित्सा पद्धतियों में एक कुशल चिकित्सक होना जरूरी है। कई बार नौसिखिये या अधूरा ज्ञान रखने वाले लोग चिकित्सक बन जाते हैं जो गलत है।

जरूरी है कि रोगी की इच्छा शक्ति और मन:स्थिति वैकल्पिक चिकित्सा कराने के लिए तैयार हो।
नेत्र रोग, मानसिक रोग, डायबिटीज, मिर्गी, गठिया जैसे आनुवांशिक व्याधियों में आंशिक तौर पर लाभ तो मिलता है, लेकिन उन्हे पूरी तरह दूर करना संभव नहीं होता।
गंभीर बीमारियों के निदान के लिए किए जाने वाले ऑपरेशन के बाद वैकल्पिक चिकित्सा करना असंभव है।
आपातकालीन परिस्थितियों के कारण जब किसी व्यक्ति की शीघ्र मृत्यु का खतरा हो जैसे- हार्ट अटैक आना। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक चिकित्सा से आंशिक लाभ तो मिल सकता है, लेकिन पूर्ण लाभ संभव नहीं होता। उग्र और आपातकालीन परिस्थितियों में या जब किसी गंभीर चोट या बीमारी के कारण व्यक्ति की जान का खतरा हो। वैकल्पिक चिकित्सा से ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा नहीं हो जैसेहार्ट अटैक में। वैकल्पिक चिकित्सा सिद्धांतों पर आधारित है जिनका क्रमबद्ध
और व्यवस्थित ढंग से पालन करने पर ही पूर्ण लाभ मिलता है। अस्थमा अटैक आना, बेहोश होना जैसी परिस्थितियों में वैकल्पिक चिकित्सा से तत्काल लाभ प्राप्त नहीं किए जा सकते। थॉयरायड, डायबिटीज जैसे गंभीर और पुराने रोगो में भी तुरंत लाभ नहीं मिलता लेकिन लंबे समय तक वैकल्पिक चिकित्सा ठीक तरह ली जाए तो इन रोगों के होने की संभावना को कम किया जा
सकता है और पूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

दुर्घटना और तत्काल उपचार की स्थिति में भी वैकल्पिक चिकित्सा संभव नहीं होती।
(डॉ. डीसी कटोच, संयुक्त सलाहकार, आयुष मंत्रालय, दिल्ली और डॉ. सत्य नारायण यादव, निदेशक, अर्चना योगायतन संस्थान, दिल्ली)