दिल्ली की सर्दी में घना स्मॉग, क्या हैं इसके खतरे और कैसे बचें?: Smog in Delhi
Smog in Delhi

सर्दी में बढ़ता प्रदूषण, समझें स्मॉग और इससे बचाव के उपाय

स्मॉग अब एक गंभीर समस्या बन चुका है, और हमें इसे समझकर इससे निपटने के उपाय ढूंढ़ने की जरूरत है।

Smog in Delhi: सर्दी की सुबह, जब बाहर सफेद चादर फैली हो, तो यह दृश्य आकर्षक लगता है। लेकिन जब यह हवा आपकी सांसों में घुलने लगे और आंखों में जलन हो, तो समझ जाइए कि यह ठंड नहीं, बल्कि खतरनाक और जहरीला स्मॉग है। स्मॉग अब एक गंभीर समस्या बन चुका है, और हमें इसे समझकर इससे निपटने के उपाय ढूंढ़ने की जरूरत है।

हर साल सर्दियों की शुरुआत होते ही, उत्तर भारत के बड़े शहर, खासकर दिल्ली, एक मोटी धुंध की चादर में लिपट जाते हैं। यह धुंध सिर्फ ठंड का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक सच का पर्दाफाश करती है। यह धुंध कुछ और नहीं, बल्कि ‘स्मॉग’ है, जो कि वायु प्रदूषण का वह खतरनाक मिश्रण है जो हर सांस के साथ हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और यह स्थिति हर साल बढ़ती जा रही है।

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फोग (कोहरा): यह ठंडी हवा में नमी के कारण बनने वाला प्राकृतिक कोहरा है। छोटे-छोटे जलकणों से यह बनता है, जो आमतौर पर हानिरहित होते हैं। कोहरा अक्सर सिर्फ दृश्यता में बाधा डालता है और किसी बड़ी समस्या का कारण नहीं बनता।

स्मॉग (धुआं और कोहरा): अब यह कोई साधारण कोहरा नहीं है। स्मॉग कोहरे और वायु प्रदूषण का खतरनाक मिश्रण है। यह धुएं, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों के कारण बनता है। स्मॉग से आंखों में जलन, सांस लेने में कठिनाई और हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

दिल्ली: 450 (गंभीर)
गुड़गांव: 400 (गंभीर)
गाजियाबाद: 430 (गंभीर)
नोएडा: 420 (गंभीर)
मुंबई: 180 (मध्यम)
बेंगलुरु: 140 (संतोषजनक)
चेन्नई: 120 (संतोषजनक)

इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली-एनसीआर का वायु प्रदूषण स्तर देश के अन्य शहरों की तुलना में अधिक है।

Smog in Delhi
Lungs diseases

IMD की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर और दिसंबर में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि केवल ठंडी हवाओं का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य जटिल कारण भी हैं। ये सभी कारण मिलकर हवा को अधिक जहरीला और हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बना देते हैं। आइए जानें, यह प्रदूषण आखिर क्यों और कैसे बढ़ रहा है:

पराली जलाना:
हर साल अक्टूबर और नवंबर में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान खेतों में पराली जलाते हैं। जैसे ही आग की लपटें उठती हैं, यह धुआं हवा में घुलकर दिल्ली समेत अन्य शहरों में फैल जाता है। इससे हवा में घना धुंआ भर जाता है और यह सफेद चादर एक विषैली चादर बन जाती है।

ठंड और स्थिर हवा:
सर्दियों में जैसे ही तापमान गिरता है, हवा भी ठंडी और भारी हो जाती है। ठंडी हवा प्रदूषित कणों को जमीन के पास जमा कर देती है, जैसे कोई जाल। इस वजह से प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। यह स्थिति वायु गुणवत्ता को और अधिक खराब कर देती है, जिससे प्रदूषण हवा में अटका रहता है और हमें सांस लेने में कठिनाई होती हैछ

वाहनों से निकलने वाला धुंआ:
दिल्ली की सड़कों पर लाखों वाहन रोज़ दौड़ते हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं और कार्बन स्मॉग का एक प्रमुख कारण बनते हैं। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है, वाहन से निकलने वाले प्रदूषित कण भी हवा में अधिक घुलते जाते हैं। इन प्रदूषित कणों का असर धीरे-धीरे हवा की गुणवत्ता पर पड़ता है और यह हमारे श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है।

औद्योगिक प्रदूषण:
दिल्ली और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण को बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकलने वाले धुंए और रसायन सर्दियों में वातावरण में जमा हो जाते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है।

पटाखों का प्रभाव:
दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने से प्रदूषण का स्तर अचानक से बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं, रसायन और भारी धुंआ हवा में घुलकर वायु गुणवत्ता को और अधिक खराब कर देते हैं।

स्मॉग का स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है और यह हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है, जो सांस की बीमारियों से लेकर दिल और फेफड़ों की समस्याओं तक का कारण बनता है।

सांस की बीमारियां: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अधिक खतरनाक है, क्योंकि उनकी शारीरिक स्थिति पहले से ही कमजोर होती है।

बच्चे-बुजुर्गों पर असर: बच्चों का शारीरिक विकास और उनकी इम्यूनिटी पर असर डालता है, जबकि बुजुर्गों को दिल और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Kids Health
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आंखों में जलन और त्वचा पर खुजली: धुंध के संपर्क में आने से आंखों में जलन, खुजली और त्वचा में एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक होता है।

दिल और फेफड़ों पर गंभीर असर: प्रदूषण से दिल और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ता है, जिससे न सिर्फ युवाओं बल्कि बुजुर्गों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।

स्मॉग के कारण दृश्यता कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।

अस्पताल में भर्ती और स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च में वृद्धि होती है।

कामकाजी घंटों का नुकसान और उत्पादकता में गिरावट देखी जाती है।

N95 मास्क पहनें: प्रदूषण के उच्च स्तर पर बाहर जाते समय हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला N95 मास्क पहनें, ताकि आप हवा में घुले हानिकारक कणों से बच सकें।

एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें: घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें, खासकर प्रदूषण के मौसम में।

सुबह और शाम के समय बाहर जाने से बचें: यह वे समय होते हैं जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। इन घंटों में बाहर निकलने से बचें।

स्वस्थ खानपान अपनाएं: विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन जैसे फल, सब्जियां और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें ताकि आपका इम्यूनिटी मजबूत हो सके।

घर में पौधे लगाएं: तुलसी, मनी प्लांट, एलोवेरा जैसे पौधे घर के अंदर हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं।

पराली जलाने पर रोक: किसानों को वैकल्पिक तकनीकें और सहायता दें।

वाहन नियंत्रण: सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करें।

औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्ती: फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण कड़े करें।

वृक्षारोपण: शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान चलाएं।

जन जागरूकता: प्रदूषण और बचाव के तरीकों पर जन जागरूकता बढ़ाएं।

नवजात शिशु की शारीरिक स्थिति बहुत संवेदनशील होती है, और उनके लिए वायु गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। AQI का स्तर 50 से नीचे होना चाहिए, जिसे ‘अच्छा’ माना जाता है। नवजात शिशुओं के लिए अतिरिक्त सावधानियां ज़रूरी है।

  • घर के अंदर शुद्ध हवा के लिए एयर प्यूरीफायर लगाएं।
  • शिशु को बाहर ले जाने से पहले वायु गुणवत्ता की जांच करें।
  • धूम्रपान शिशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • शिशु की त्वचा के लिए प्राकृतिक सामग्री से बने साबुन और लोशन का प्रयोग करें।
  • जब वायु गुणवत्ता खराब हो, तो खिड़कियां बंद रखें और बाहर से आने वाली हवा से बचें।
  • जब वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, तो शिशु को बाहर जाने से बचाएं और उन्हें घर के अंदर ही रखें।
  • सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दें। कोयला और पेट्रोलियम का उपयोग कम करें।
  • फैक्ट्रियों और वाहनों से उत्सर्जन नियंत्रित करें। स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दें।
  • स्कूलों और कॉलेजों में प्रदूषण पर शिक्षा दें। वृक्षारोपण अभियान चलाएं।
  • पार्क, बग़ीचे और सड़क किनारे पेड़ लगाएं। साइकिल ट्रैक और सार्वजनिक परिवहन बढ़ाएं।
  • स्थानीय उत्पादों का उपयोग करें।प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें।

स्मॉग और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। हमें व्यक्तिगत और सरकारी दोनों स्तरों पर कदम उठाने होंगे ताकि हम एक स्वस्थ और साफ वातावरण सुनिश्चित कर सकें।

सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...