कोई भी निर्णय लेने में होती है परेशानी, तो जानिए कैसे बनाएं डिसीजन मेकिंग पावर को स्ट्रांग: Decision Making Power
Decision Making Power

Decision Making Power: क्या मैं सही फैसला कर रही हूं? क्या मेरा ये कदम सही है? क्या मेरा फैसला सही रिजल्ट देगा? क्या आपके मन में भी हर बात को लेकर ऐसे ही विचार आते हैं। क्या आप भी दो विकल्पों के बीच कंफ्यूज हो जाती हैं और किसी एक को चुनने में आपको परेशानी आती है। अगर हां, तो इसका सीधा अर्थ यह है कि आपकी डिसीजन पावर कमजोर है। लाइफ में सही फैसला लेने और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपकी डिसीजन मेकिंग पावर का स्ट्रांग होना बहुत जरूरी है। आज हम बता रहे हैं आपको कुछ ऐसी ही टिप्स।

मेडिटेशन को बनाएं जीवन का हिस्सा

मेडिटेशन आपको कई परेशानियों से छुटकारा दिला सकता है। यह न सिर्फ आपकी टेंशन दूर करेगा, बल्कि आपकी डिसीजन पावर को भी बढ़ा देगा। जब आपका अंतर्मन शांत होता है तो बाकी चीजें अपने आप साफ नजर आने लगती हैं। आपका मन कोई भी डिसीजन लेने के लिए तैयार रहता है। वह विचार कर पाने में सक्षम होता है। इसलिए मेडिटेशन को लाइफ का हिस्सा बनाएं।

सबसे पहले अपनी फीलिंग्स समझें

जब भी आप कोई फैसला करने जा रही हैं तो सबसे पहले शांत मन से आप अपनी फीलिंग्स को समझें। ये जानें कि आप क्या चाहती हैं, न कि ये कि दूसरे क्या सोचेंगे। यह विचार करना जरूरी है कि इस फैसले का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। डिसीजन लेने का कौशल विकसित करने का सबसे अच्छा तरीका है अपना गोल सेट करना। एक स्टडी के अनुसार उन लोगों के निर्णय गलत साबित होते हैं जिन्हें अपना गोल पता नहीं होता।

अपने फैसले पर दृढ़ता से अडिग रहें

ध्यान रखें अच्छा डिसीजन मेकर वहीं होता है जो अपने फैसलों पर अडिग रहता है। अगर आप किसी की बातों में आकर बार-बार अपना डिसीजन बदलती रहेंगी तो न ही उस डिसीजन का महत्व रह जाएगा, न ही कोई दूसरा उसे इंपोर्टेंस देगा। कोशिश करें कि आपके पास अपने डिसीजन के इतने तर्क हों कि आप दूसरों को भी अपने फेवर में कर सकें। ऐसा करने से आपका टेंशन कम होगा, साथ ही आपका काॅन्फिडेंस भी बढ़ जाएगा। अगर आप खुद के नजरिए पर ध्यान नहीं देंगी तो आप पर हमेशा दूसरे लोगों के विचार ही हावी रहेंगे। और ऐसे में आप सही और गलत का फैसला ही नहीं कर पाएंगी। यह आपकी पर्सनालिटी, पर्सनल लाइफ और करियर के लिए खराब है।

हर चीज के दो पहलू हैं

डिसीजन मेकिंग पावर को डेवलप करना चाहती हैं तो हर विचार के दोनों पहलुओं के बारे में सोचना जरूर है। अगर कोई शख्स आपको सलाह दे रहा है और आपको उसकी राय सही लग रही है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप चुपचाप उससे सहमत हो जाएं। आपको अपने फैसले के दूसरे पहलू पर विचार करना चाहिए। इस तरह आपकी डिसीजन पावर भी बढ़ेगी और आप अपने लिए सही निर्णय भी ले पाएंगी।  

जानकारी पूरी होगी तो फैसला भी सही होगा

कहते हैं आधा अधूरा ज्ञान बहुत खतरनाक होता है। डिसीजन लेने में भी यह बात लागू होती है। कोई भी डिसीजन लेने से पहले आपके पास पर्याप्त सूचनाएं होना जरूरी है। जब आपके पास सारी सूचनाएं होंगी तो फैसला लेना आसान होगा। आप अपने निर्णय के हर पहलू पर सोच विचार पाएंगी। अच्छा-बुरा भी बेहतर तरीके से सोच पाएंगी।

विकल्प के विषय में हमेशा करें विचार

जब आप किसी डिसीजन पर पहुंचते हैं तो आपके पास दो तरह के विकल्प होना बेहतर है। अगर एक विकल्प सफल न हो सके तो आप दूसरे को चुन सकती हैं। इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि आप कंफ्यूज रहें, लेकिन ‘प्लान बी’ होना जरूरी है। ऐसा तभी संभव है जब आप दिमाग को खुला रखेंगी और हर विचार पर बारीकी से सोचेंगी। एक अमेरिकी स्टडी में सामने आया कि डिसीजन पावर को तब ही डेवलप किया जा सकता है, जब शख्स को खुद पर काॅन्फिडेंस हो। आप कॉन्फिडेंट रहेंगे तो ही बड़े डिसीजन ले पाएंगी। 

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...

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