Overview:प्रेग्नेंसी में बवासीर के 7 शुरुआती अलार्म साइन,दिखें तो तुरंत हों जाएं सतर्क
गर्भावस्था में बवासीर एक आम लेकिन नज़रअंदाज़ की जाने वाली समस्या है, जो खासकर तीसरी तिमाही में ज़्यादा दिखती है। पेल्विक नसों पर दबाव, हार्मोनल बदलाव और कब्ज इसके मुख्य कारण हैं। मल त्याग के बाद दर्द, खून आना, खुजली और सूजन जैसे शुरुआती संकेत समय रहते पहचानना ज़रूरी है, ताकि परेशानी बढ़ने से पहले सही इलाज और राहत मिल सके।
Hemorrhoids during Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। वजन बढ़ना, हार्मोनल इम्बैलेंस और पाचन से जुड़ी दिक्कतें इस समय आम मानी जाती हैं। इन्हीं बदलावों की वजह से गर्भवती महिलाओं में बवासीर की समस्या भी काफी देखने को मिलती है। खासकर तीसरी तिमाही में, जब बढ़ा हुआ गर्भाशय पेल्विक नसों पर ज़्यादा दबाव डालता है, तब यह परेशानी उभर सकती है।
बवासीर को अक्सर महिलाएं शर्म या झिझक के कारण नज़रअंदाज़ कर देती हैं। कई बार शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, जैसे टॉयलेट के बाद हल्की जलन या असहजता। लेकिन अगर समय रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए, तो परेशानी को बढ़ने से रोका जा सकता है और इलाज भी आसान हो जाता है।
अगर किसी महिला को पहले कभी बवासीर की समस्या रही हो, तो गर्भावस्था के किसी भी चरण में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि गर्भावस्था में बवासीर के शुरुआती साइन को पहचाना जाए। नीचे दिए गए लक्षण आपको समय रहते सतर्क होने में मदद करेंगे और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने का संकेत भी देंगे।
पॉटी के बाद भी पेट साफ न होने जैसा एहसास

मल त्याग के बाद भी बार-बार टॉयलेट जाने का एहसास होना गर्भावस्था में बवासीर का शुरुआती साइन हो सकता है। इस स्थिति को टेनेस्मस कहा जाता है। इसमें ऐसा लगता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है, जबकि शौच हो चुका होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूजी हुई बवासीर की गांठें मलाशय पर दबाव डालती हैं। गर्भावस्था में पहले से ही पाचन धीमा रहता है, ऊपर से यह दबाव परेशानी को बढ़ा देता है। कई महिलाएं इसे कब्ज समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं, जबकि यह बवासीर का संकेत हो सकता है। अगर यह एहसास बार-बार हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है।
पॉटी के बाद हल्की परेशानी या जलन

हर बार तेज दर्द होना ज़रूरी नहीं है। कई बार टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हल्की जलन, भारीपन या असहजता महसूस होती है। यह परेशानी कुछ मिनटों से लेकर घंटों तक रह सकती है। इसका कारण गुदा की नसों में आई सूजन होती है, जिसे शांत होने में समय लगता है। गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव नसों को और संवेदनशील बना देते हैं। महिलाएं अक्सर सोचती हैं कि यह सामान्य है और अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर यह रोज़ होने लगे, तो यह बवासीर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। समय रहते ध्यान देने से आगे चलकर तेज दर्द और सूजन से बचा जा सकता है।
मल त्याग के दौरान या बाद में खून आना
टॉयलेट पेपर पर या कमोड में चमकीले लाल रंग का खून दिखना डराने वाला अनुभव हो सकता है। यह बवासीर का सबसे साफ दिखाई देने वाला संकेत माना जाता है। गर्भावस्था में आंतरिक बवासीर के कारण यह खून अक्सर बिना दर्द के आता है, इसलिए महिलाएं इसे गंभीरता से नहीं लेतीं। लेकिन गुदा से किसी भी तरह का खून आना सामान्य नहीं है। इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए सही जांच ज़रूरी होती है। अगर खून बार-बार दिखे, चाहे मात्रा कम ही क्यों न हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद ज़रूरी है। समय पर जांच से सही कारण पता चल पाता है।
गुदा के आसपास खुजली,जलन या गांठ महसूस होना
गुदा के आसपास लगातार खुजली या जलन होना बाहरी बवासीर का आम लक्षण है। कई बार वहां नमी बनी रहने से यह परेशानी और बढ़ जाती है। कुछ महिलाओं को त्वचा के नीचे छोटी, नरम गांठ भी महसूस हो सकती है। यह सूजी हुई नसें होती हैं, जो बैठने या चलने पर ज़्यादा परेशान करती हैं। लंबे समय तक बैठने से यह सूजन और उभर सकती है। गर्भावस्था में शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है, इसलिए यह खुजली मानसिक तनाव भी बढ़ा सकती है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो घरेलू उपायों के साथ डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।
तेज दर्द व लंबे समय तक बैठने-खड़े रहने से परेशानी बढ़ना
कुछ मामलों में मल त्याग के दौरान या तुरंत बाद तेज दर्द हो सकता है। यह तब होता है जब सख्त मल निकलने से सूजी हुई नसों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है। अगर बवासीर में खून का थक्का जम जाए, जिसे थ्रोम्बोस्ड बवासीर कहा जाता है, तो दर्द असहनीय हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से भी गुदा क्षेत्र में खून जमा होने लगता है, जिससे सूजन और दर्द बढ़ता है। गर्भावस्था में पेल्विक नसों पर दबाव पहले से ही ज़्यादा होता है। ऐसे में करवट लेकर आराम करना और बीच-बीच में शरीर की स्थिति बदलना राहत दे सकता है।
गर्भावस्था में बवासीर क्यों होती है?
- बढ़ता हुआ गर्भाशय गुदा की नसों पर दबाव डालता है
- हार्मोनल बदलावों से आंतों की गति धीमी हो जाती है
- कब्ज के कारण शौच के समय ज़ोर लगाना पड़ता है
- आख़िरी महीनों में शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है
समय पर लक्षण पहचानकर सही देखभाल और डॉक्टर की सलाह लेने से गर्भावस्था में बवासीर की परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
