Myths Related to Piles: पाइल्स, जिसे बवासीर या हेमोरोइड्स भी कहा जाता है, निचले मलाशय और गुदा में सूजी हुई नसें होती हैं। बवासीर होने पर अक्सर खूनी मल, एनल रैशेज और रेडनेस की शिकायत हो सकती है। यह एक आम बीमारी है और अधिकतर लोग इसे अपने जीवन में कभी ना कभी जरूर अनुभव करते हैं।
बवासीर आमतौर पर दो तरह की होती है खूनी बवासीर और बादी बवासीर। खूनी बवासीर में अक्सर मल त्याग करते समय खून आता है। इससे व्यक्ति को दर्द व असुविधा हो सकती है। वहीं, बादी बवासीर होने पर मलाशय की नसें सूज जाती हैं और मलाशय से बाहर लटकती हैं। अमूमन बवासीर होने पर व्यक्ति घरेलू उपाय अपनाता है या फिर कभी-कभी ऑपरेशन करने की सलाह भी दी जाती है। बवासीर एक आम बीमारी है, लेकिन फिर भी इसे लेकर लोगों के मन में कई मिथ्स हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको पाइल्स से जुड़े कुछ मिथ्स और उनकी सच्चाई के बारे में बता रहे हैं-
Also read: क्यों होती है बवासीर या पाइल्स की समस्या और किस तरह से संभव है इसका उपचार: Causes of Piles
मिथक 1- केवल बूढ़े लोगों को ही होती है बवासीर।

सच्चाई- यह पाइल्स को लेकर एक आम मिथक है। बहुत से लोग यह मानते हैं कि केवल बूढ़े लोगों को ही पाइल्स की शिकायत हो सकती है। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। यह सच है कि उम्र बढ़ने के साथ बवासीर विकसित होने का खतरा बढ़ता है, लेकिन यह समस्या युवा वयस्कों और बच्चों सहित सभी उम्र के लोगों को हो सकती है। अमूमन लंबे समय तक बैठे रहना, कब्ज या मल त्याग के दौरान बहुत अधिक दबाव के कारण युवा व्यक्तियों को भी बवासीर हो सकती है।
मिथक 2- बवासीर के लिए हमेशा सर्जरी की आवश्यकता होती है।
सच्चाई- जब किसी को बवासीर की शिकायत हो जाती है तो अक्सर लोग उसे सर्जरी करने की सलाह देते हैं। ऐसा माना जाता है कि बवासीर होने के बाद सर्जरी ही एकमात्र उपाय है। जबकि यह भी एक मिथ ही है। बवासीर के अधिकतार मामलों को नॉन-सर्जिकल उपचार से प्रबंधित किया जा सकता है। ओवर-द-काउंटर क्रीम, सिट्ज़ स्नान, खानपान में बदलाव आदि लक्षणों को कम कर सकते हैं। सर्जरी पर आमतौर पर तभी विचार किया जाता है जब ये उपाय विफल हो जाते हैं, या फिर बहुत अधिक ब्लीडिंग या प्रोलैप्स जैसी जटिलताएँ होती हैं।
मिथक 3- मसालेदार खाना बवासीर का कारण बनता है।

सच्चाई- मसालेदार भोजन किसी भी व्यक्ति के पाचन तंत्र को परेशान कर सकता है और उन लोगों में लक्षण बढ़ा सकता है जिन्हें पहले से ही बवासीर है। हालांकि, यह बवासीर होने का कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं है। ऐसा नहीं है कि अगर आप मसालेदार भोजन करते हैं तो आपको बवासीर हो जाएगा। बवासीर मुख्य रूप से कब्ज, लंबे समय तक बैठे रहने या मल त्याग के दौरान तनाव जैसे कारकों के कारण निचले मलाशय में दबाव बढ़ने के कारण होता है।
मिथक 4- बवासीर हाइजीन का ख्याल ना रखने के कारण होता है।
सच्चाई- बहुत से लोगों का यह भी मानना होता है कि बवासीर साफ-सफाई का सही तरह से ख्याल नहीं रखने से होता है। जबकि ऐसा नहीं है। वे मलाशय और गुदा क्षेत्र में नसों पर बढ़ते दबाव के परिणामस्वरूप होते हैं। यह सच है कि अच्छी स्वच्छता बवासीर की जलन और संक्रमण को रोकने में मदद कर सकती है, लेकिन हाइजीन का ख्याल ना रखने पर बवासीर हो जाए, यह एक मिथ ही है।
मिथक 5- यदि आपको बवासीर है तो आपको व्यायाम से बचना चाहिए।

सच्चाई- बवासीर होने पर अधिकतर लोग व्यायाम करना छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। जबकि यह केवल एक मिथ है। अगर आप नियमित रूप से व्यायाम करते हैं तो यह मल त्याग को बढ़ावा देकर और नसों पर दबाव कम करता है। जिससे बवासीर को रोकने और उसे मैनेज करने में मदद मिलती है। हालांकि, अगर आपको सक्रिय बवासीर है तो इस स्थिति में आपको भारी सामान उठाने या तनाव वाली गतिविधियों से बचना चाहिए।
मिथक 6- बवासीर केवल बाहरी हो सकता है।
सच्चाई- बवासीर दो तरह का होता है- खूनी बवासीर व बादी बवासीर। बवासीर बाहरी या आंतरिक हो सकता है। आंतरिक बवासीर मलाशय के अंदर विकसित होती है, जबकि बाहरी बवासीर गुदा के आसपास की त्वचा के नीचे विकसित होती है। दोनों प्रकार से आपको असुविधा और रक्तस्राव हो सकता है।
मिथक 7- बवासीर के लक्षण हमेशा नजर आते है।

सच्चाई- चूंकि अधिकतर मामलों में बवासीर होने पर उसके लक्षण नजर आते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के साथ ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों को बिना किसी लक्षण के ही बवासीर हो जाती है। उन्हें इसके लक्षण बाद में महसूस होते हैं। जब उन्हें बवासीर के लक्षण नजर आते हैं तो ऐसे में उन्हें दर्द, खुजली, सूजन और मलाशय से रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं।
मिथक 8- बवासीर होने पर बहुत दर्द होता है।
सच्चाई- बहुत से लोगों को बवासीर होने पर दर्द व असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन सभी बवासीर में दर्द नहीं होता है। आंतरिक बवासीर, जो मलाशय के अंदर होता है, अक्सर दर्द नहीं होता है लेकिन इसके परिणामस्वरूप मलाशय से रक्तस्राव हो सकता है। वहीं, बाहरी बवासीर होने पर आपको दर्द हो सकता है। बाहरी बवासीर गुदा के आसपास की त्वचा के नीचे स्थित होती है।
