Summary: जानें हाइपोथर्मिया के लक्षण और उपाय के बारे में
सर्दियों में अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। इस लेख में हाइपोथर्मिया के शुरुआती और गंभीर लक्षणों के साथ-साथ इससे बचाव के आसान और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
Hypothermia Symptoms and Prevention: सर्दियों में ठंड का सामना करना हर किसी के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर जब तापमान बेहद कम हो। बहुत ठंडा मौसम सिर्फ असहज ही नहीं बल्कि खतरनाक भी हो सकता है। हाइपोथर्मिया या शरीर का अधिक ठंडा हो जाना एक ऐसी स्थिति है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। आज इस लेख में हम श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट नई दिल्ली के स्पोर्ट्स इंजरी एंड ऑर्थोपेडिक और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के डायरेक्टर डॉ अखिलेश राठी और नई दिल्ली की जीविशा क्लिनिक की फाउंडर व डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आकृति गुप्ता से जानेंगे हाइपोथर्मिया के मुख्य लक्षण और सुरक्षा उपायों के बारे में।
हाइपोथर्मिया क्या है?
हाइपोथर्मिया तब होती है, जब शरीर का तापमान सामान्य (लगभग 37°C) से बहुत कम होकर 35°C या उससे नीचे गिर जाता है। इससे शरीर के अंदर की प्रणाली धीरे-धीरे प्रभावित होती है। शरीर की मांसपेशियों और अंगों के काम करने की क्षमता कम हो जाती है।
हाइपोथर्मिया के प्रमुख लक्षण

तेज और लगातार कंपकंपी
शुरुआती संकेतों में सबसे आम है शरीर का बेकाबू होकर कांपना। कंपकंपी शरीर का नैचुरल डिफेंस मैकेनिज्म है, लेकिन अगर यह बहुत तेज और लगातार हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह हाइपोथर्मिया की पहली चेतावनी हो सकती है।
भ्रम की स्थिति और लड़खड़ाती बोली
शरीर ठंड से जूझता है तो दिमाग पर भी असर पड़ता है। व्यक्ति को सही सोचने में दिक्कत, उलझन या बोली अस्पष्ट लग सकती है। ठंड का सीधा असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। कई बार मरीज को खुद अहसास भी नहीं होता कि उसकी बात साफ नहीं निकल रही या वह कन्फ्यूज हो रहा है।
कमजोर नाड़ी
शरीर के ठंडा होते ही दिल की धड़कन और ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ सकता है। नाड़ी कमजोर या बहुत धीमी महसूस हो सकती है।
धीमी और उथली सांस
हाइपोथर्मिया के गंभीर चरण में सांस लेने की गति भी कम हो जाती है, जो बेहद खतरनाक संकेत है और तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पद सकती है।
त्वचा में नमी का कम होना
ठंड के मौसम में त्वचा की नैचुरल नमी तेजी से कम होने लगती है। इससे त्वचा रूखी, खिंची-खिंची और कई बार फटने लगती है। अगर समय पर मॉइस्चराइजिंग और सही स्किन केयर न की जाए, तो एग्जिमा, खुजली और सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंड में त्वचा की सुरक्षा ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी है।
हाइपोथर्मिया से बचाव

लेयरिंग में पहनें कपड़े
ठंड में शरीर को एक्टिव रखना और सही लेयरिंग बेहद जरूरी है। खासकर घुटनों, जोड़ों और रीढ़ को गर्म रखना चाहिए, क्योंकि ठंड से जॉइंट स्टिफनेस और दर्द बढ़ जाता है। इनर थर्मल, स्वेटर, जैकेट का इस्तेमाल इस मौसम में जरूरी है। सिर, हाथ और पैरों को ढककर रखें।
सूखे रहें
गीले कपड़े या जूते शरीर को तेजी से ठंडा कर सकते हैं। बारिश या बर्फ में बाहर जाने पर रेनकोट जैसे पानी से बचाने वाले कपड़े पहनें।
खुली हवा में कम रहें
ठंडी हवा में लंबे समय तक ना रहें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो कुछ-कुछ समय पर गर्म स्थान पर वापस आ जाएं।
शरीर को गर्म रखें
गरम पानी की बोतल या हीटर का इस्तेमाल करें, लेकिन बहुत ज्यादा गर्म चीज सीधे त्वचा पर न रखें।
संतुलित आहार और हाइड्रेशन
ठंड में शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। ऐसे में गर्म खाना, सूप और पर्याप्त पानी पीना इसमें मदद करता है।
त्वचा को नम रखें
ठंड में त्वचा का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है। ड्राई और क्रैक्ड स्किन शरीर की हीट लॉस को और बढ़ा सकती है। इसलिए मॉइस्चराइजर और लिप बाम का नियमित इस्तेमाल करें।
कब करें डॉक्टर से संपर्क
यदि किसी व्यक्ति में अधिक कंपकंपी, भ्रम, धीमी सांस या कमजोर नाड़ी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत गर्म जगह पर ले जाएं। शुरुआती कदम जैसे शरीर को धीरे-धीरे गर्म करना, गीले कपड़े बदलना और गर्म पेय देना मदद कर सकते हैं, लेकिन गंभीर हालत में डॉक्टर की मदद जरूरी है।
