कुछ लोगों को हमेशा सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है लेकिन इनमें से ज्यादातर मामले साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते हैं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह क्या है?
दरअसल, हमारी खोपड़ी में बहुत-सारी कैविटीज़ (खोखले छेद) होती हैं। ये हमारे सिर को हल्का बनाए रखने और सांस लेने में मदद करती हैं। इन छेदों को साइनस कहते हैं। अगर इन छेदों में बलगम भर जाता है है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इस समस्या को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। आम बोलचाल में इसे साइनस भी कहा जाता है।
क्यों होता है
सांस लेने में रुकावट, नाक की हड्डी का बढ़ना और तिरछा होना, एलर्जी होना इसकी आम समस्या है यानी किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रुकावट आ जाती है तो साइनस होता है। इसके अलावा कई बार खोखले छेदों में बलगम भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। साथ ही, इन्फेक्शन के कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सिर, माथे, गालों और ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है। यह बीमारी खराब लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होती लेकिन जो लोग फील्ड जॉब में होते हैं यानी जो ज्यादा समय पल्यूशन में रहते हैं या फिर लकड़ी इंडस्ट्री आदि प्रफेशन से जुड़े होते हैं, उनको साइनस होने का खतरा ज्यादा होता है।
लक्षण
- सिर में दर्द और भारीपन
- आवाज में बदलाव
- बुखार और बेचैनी
- आंखों के ठीक ऊपर दर्द
- दांतों में दर्द
- सूंघने और स्वाद की शक्ति कमजोर होना
- बाल सफेद होना
- नाक से पीला लिक्विड गिरने की शिकायत
कई तरह का साइनस
एक्यूट साइनस: इसमें सर्दी लगने के लक्षण अचानक उभर आते हैं, जैसे नाक जाम होना या उसका बहना और चेहरे में दर्द होना। यह अवस्था 8-10 दिन बाद भी खत्म नहीं होती बल्कि आमतौर पर चार हफ्ते तक बनी रहती है। एक्यूट साइनस अक्सर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है और इसमें सांस की नली के ऊपरी हिस्से में इन्फेक्शन हो जाता है।
सब-एक्यूट साइनस: साइनस में चार से आठ हफ्ते तक सूजन और जलन रहती है। इसका इलाज भी आमतौर पर एक्यूट साइनस की तरह ही होता है।
क्रॉनिक साइनस: इसमें लंबे समय तक साइनस में जलन और सूजन रहती है। साइनस की सूजन दो तरह की होती है: एक, सूजन अचानक होती है और कुछ दिनों में खत्म हो जाती है।
रीक्यूरेंट साइनस: अगर दमा यानी अस्थमा है या एलर्जी से संबंधित कोई बीमारी है तो जल्दी-जल्दी क्रॉनिक साइनस हो सकता है। इसका इलाज करीब-करीब क्रॉनिक साइनस की तरह ही होता है।
बीमारी अलग, लक्षण एक
बड़े और बच्चों, सभी में साइनस के लक्षण एक जैसे ही होते हैं। इसके अलावा, सर्दी-जुकाम, फ्लू, अस्थमा, क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज़ (COPD) और साइनस के काफी लक्षण करीब-करीब एक जैसे होते हैं। हालांकि इन सभी बीमारियों में कुछ फर्क भी होता है।
किसी को साइनस की प्रॉब्लम अगर कुछ बरसों तक रहे तो वह आगे चलकर अस्थमा में बदल सकती है। हालांकि बच्चों में यह समय 8 से 10 साल का होता है।
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