चकला और बेलन भारतीय रसोई की वो दो चीजें है, जिनके बिना रसोई की कल्पना करना कठिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है| पर क्या आप जानते है की चकला और बेलन के प्रयोग करने के भी कुछ नियम होते है, जिनकी जानकारी हमारी प्राचीन ग्रंथो से हमको मिलती है, जिसमे ये भी कहा गया है की अगर रसोई के चकला और बेलन को सही ढंग से आप प्रयोग नहीं करते है तो इसके दुष्परिणाम पूरे परिवार को भुगतने पड़ते है साथ ही रसोई में इससे वास्तु दोष भी उत्पन होता है, इस लिए चकला और बेलन का सही से प्रयोग करे और कुछ सावधानियो को हमेशा ध्यान रखे |ताकि कोई भी वास्तु दोष आपकी रसोई में उत्पन ना हो|

चकला और बेलन का प्रयोग करते वक़्त इन बातोँ का रखे ख्याल|

  • चकला हमेशा पत्थर का ही ले तो अच्छा और शुभ माना जाता है वो भी सफ़ेद पत्थर का या लाल पत्थर का काले या ग्रे रंग के पत्थर का कभी भी चकला ना ले ये अशुभ माना जाता हैं | इस के साथ ही लकड़ी, प्लास्टिक ,कॉच, लोहे के चकले का प्रयोग भी ना करे, कभी भी रसोई की स्लैप जो की आजकल पत्थर की बनी होती हैं प्रायः उसका प्रयोग भी चकले की तरह रोटी बनाने के लिए ना करे |
  • बेलन हमेशा लकड़ी का ही होना चाहिए किसी अन्य धातु जैसे की प्लास्टिक, लोहे, कॉच का बेलन कभी भी प्रयोग ना करे|
  • रोटी बनाने से पहले और रोटी बनाने के बाद चकले और बेलन को हमेशा धोकर साफ़ करके ही रखे क्योकि आटा लगा चकला और बेलन रखने से रसोई में वास्तु दोष उत्पन होता है, साथ ही उस घर के लोगों का शनि और राहू ख़राब होकर अनेक परेशानी उस घर के लोगों को देता हैं|
  • चकला कभी भी उलटा करके और बेलन कभी भी चकले से दूर ना रखे क्योंकि रसोई में प्रयोग की जाने वाली चीजों में सिर्फ चकला और बेलन ही वो दो चीजें जो हमेशा एक साथ रखीं जाती है, इनको पास रखने से घर में शुभता और दूर यानि अलग अलग रखने से अशुभता तो आती ही है साथ ही पति और पत्नी के रिश्ते में भी तनाव आता है, इसलिए चकले और बेलन दोनोँ को ही हमेशा साथ साथ और खड़ा करके ही रखे व उनको कभी भी दक्षिण दिशा में खड़ा करके ना रखे ये एक अशुभ दिशा मानी गई है , इस तरफ मुंह करके खाना बनाना भी शुभ नहीं माना जाता है, इसलिये इस दिशा का विशेष ख्याल रखे|
  • चकला और बेलन के प्रयोग में एक बात अक्सर ही लोग भूल जाते है वो ये की जो खाना बनाये वहीं इंसान चकले और बेलन को धो कर भी रखे पर कई बार ऐसा होता हैं की चकले पर खाना कोई बनाता हैं और उसको धोता कोई और हैं जो की गलत है, शास्त्रों में वर्णित हैं की खाना बनाया एक पुण्य का काम है क्योकि भोजन लोगो को जीवन देता है तो जो इंसान चकले और बेलन पर रोटी बनाता है,तब वो पूरी मेहनत, लगन, प्यार, से ये काम करता या करती है, इससे जो पुण्य अर्जित होता है वो उसको एक ऊर्जा देता है और ये ऊर्जा चकले और बेलन के जरिये ही आती है पर जब कोई अन्य इंसान उसको धोता है तो वो ऊर्जा बिना भोजन बनाये ही मात्र चकला बेलन धोने के कारण उसको मुफ्त में मिल जाती है और सारी मेहनत करने वाला इंसान अपनी जरा सी गलती से अपने हाथों सारा पुण्य खो देता है, इसलिए ये गलती कभी ना करे| अपने हाथों भोजन बनाने के बाद चकला और बेलन खुद ही धोये साथ ही किसी और के भोजन बनाने के बाद उसका चकला बेलन भी खुद ना धोये |

विशेष नोट –चकला और बेलन का प्रयोग करते समय इन बातोँ को हमेशा ही याद रखे और दूसरो को भी बताये|

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