गोंद एक प्राकृतिक रेसिन है। यह बेस्वाद, गंधहीन, चिपचिपा, पानी में घुलनशील प्राकृतिक गोंद है, जो ऐक्सल वुड पेड़ से मिलता है, जिसे हिंदी में धोय और संस्कृत में ढाक कहा जाता है। गोंद को बंगाली में कोथरी, तमिल में गोंध, राजस्थान में गौंध और मराठी में दिनक भी कहा जाता है।
गोंद का इस्तेमाल लड्डू बनाने के लिए तो किया ही जाता है, इसके अलावा गोंद को पंजिरी के मिश्रण के रूप में भी खाया जाता है (दोनों में प्रयुक्त सामग्री लगभग समान है)। इन दोनों व्यंजनों में गोंद को साबुत गेहूं के आटे, चीनी, घी और नट्स (आमतौर पर काजू, बादाम और किशमिश) और इलायची के साथ मिलाया जाता है। पहले गोंद को गहरा तला जाता है, जिसमें यह फूल जाती है और एक अद्भुत क्रंच बन जाता है।
गोंद के लड्डू का लाभ उन सभी सामग्रियों (गोंद, गेहूं, खरबूजा के बीज, काजू, बादाम, इलायची, घी और चीनी) के कारण और भी बढ़ जाता है, जिन्हें हम इसे बनाते समय मिलाते हैं।
अमृत समान
आयुर्वेद ने हमेशा गोंद के लड्डू के अद्भुत औषधीय उपयोगों और स्वास्थ्य लाभों को मान्यता दी है। ये एक गर्म भोजन है, इसलिए तापमान कम होने के दौरान शरीर को आंतरिक रूप से गर्मी प्रदान करते हैं।
ये लड्डू हड्डियों के ऊतकों को मजबूती और पोषण प्रदान करते हैं क्योंकि ये कैल्शियम, मैग्नीशियम से भरपूर होता है और कुछ प्रोटीन भी प्रदान करते हैं। ये जोड़ों को चिकना बनाये रखने में मदद करते हैं और अन्य जोड़ों के दर्द के साथ पीठ और कमर दर्द को कम करते हैं। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को हड्डियों को मजबूती प्रदान करने और पीठ दर्द को रोकने में मदद करने के लिए पोषण देने के लिए उन्हें गोंद के लड्डू दिये जाते हैं।
गोंद के लड्डू वसा, फाइबर और कैलोरी से भरपूर होते हैं और इसलिए स्तनपान कराने वाली माताओं को उनकी इम्युनिटी मजबूत करने के लिए गोंद के लड्डू दिये जाते हैं, ताकि नई मां को स्तनपान कराते समय अतिरिक्त कैलोरी मिल सके और वह तेजी से ठीक हो और उसे प्रसव के बाद वापस अपनी ताकत हासिल करने के लिए पोषक तत्व मिल सके। गोंद को स्तन के दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है।
हालांकि इस दावे को साबित करने के लिए कोई शोध नहीं किए गए हैं लेकिन स्तनपान कराने वाली माताओं को इस अद्भुत प्राकृतिक गोंद से काफी लाभ होता है, इसमें कोई संशय नहीं है।
गोंद के लड्डू ठंड और मौसमी वायरस के खिलाफ हमारी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और हमें सर्दियों की बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं।
चूंकि गोंद के लड्डू आम तौर पर गोंद, साबुत गेहूं का आटा, घी और नट्स जैसे बहुत ही पोषक तत्व से बने होते हैं, इसलिए यह बच्चों को ऊर्जा प्रदान करने वाला एक आदर्श भोजन है। यह वयस्कों में शरीर की सहनशक्ति, ताकत और स्थिरता को बनाए रखने और बढ़ावा देने में मदद करता है।
कितना खाएं
चूंकि गोंद गर्मी पैदा करने वाला भोजन है, इसलिए सर्दियों के महीनों में इसका सेवन सबसे अच्छा है। इसके अलावा ये घी और नट मिलाकर बनाये जाते हैं, इसलिए ये कैलोरी से भरपूर होते हैं। एक लड्डू में 200 से अधिक कैलोरी होती हैं, इसलिए इसे कम मात्रा में लें। और चूंकि यह गर्मी प्रदान करने वाला खाद्य है इसलिए गर्भवती महिलाओं को एक दिन में एक से अधिक लड्डू नहीं लेना चाहिए। मेरा सुझाव है कि हर सुबह/सोने के समय दूध के साथ एक से दो गोंड के लड्डू खाएं और यदि आप कैलोरी को सीमित कर रहे हैं तब भी लें और पूरी सर्दियों के दौरान लें।
मिथक
गोंद के लड्डू खाने और इस तरह की कई पुरानी परंपराओं को लेकर नए जमाने की महिला को भ्रम होता है। लेकिन सदियों पुरानी परंपराओं में बहुत ज्ञान छिपा होता है और इनका पालन किया जाना चाहिए। बेशक इनमें संशोधन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए चीनी की जगह गुड़ या बेहतर मेपल सिरप का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो अपने एंटीऑक्सिडेंट गुण के कारण लड्डू को और अधिक स्वास्थ्यवर्द्धक बना देगा। यदि आप फैंसी मिठाई नहीं खाते हैं, तो आप मेथी दाना, सौफ, काली मिर्च, तिल और अजवाईन जैसी अन्य जड़ी-बूटियों के साथ भी गोंद को मिला सकते हैं।
दुष्प्रभाव
इसका कोई बड़ा दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन इसके अधिक सेवन से पेट में हल्की तकलीफ हो सकती है। यह भी सलाह दी जाती है कि यदि आप गोंद (किसी भी रूप में) का सेवन कर रहे हैं तो पेट को सामान्य रखने के लिए आपको बहुत सारा पानी पीना चाहिए।
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