Traditional Dupatta: दुपट्टा एक ऐसी चीज होती है, जिसे पारंपरिक तौर पर भारतीय महिलाओं द्वारा ओढ़ा जाता है। सच कहा जाए तो दुपट्टा सभी महिलाओं के वार्डरोब के लिए जरूरी है क्योंकि इसे सलवार कमीज, सलवार सूट, लहंगा, ब्राइडल आउटफिट, साड़ी, कैजुअल वियर, पार्टी वियर ड्रेस, कुर्ता पजामा, घाघरा चोली, अनारकली यहां तक कि नॉर्मल जींस और टी शर्ट के साथ भी कैरी किया जा सकता है। दुपट्टे बेहद खूबसूरत डिजाइन, पैटर्न और रंगों के साथ मार्केट्स में उपलब्ध हैं।

सबसे खास बात तो यह है कि दुपट्टा ओढ़ने से किसी भी महिला की खूबसूरती, एलीगेंस और ग्रेस कई गुना अधिक बढ़ जाता है। बनारसी दुपट्टा से लेकर फुलकारी दुपट्टा और चिकनकारी दुपट्टे के कई रूप हैं, जो आपकी ड्रेसिंग को नेक्स्ट लेवल तक ले जाने की क्षमता रखते हैं। तो फिर देर किस बात की आइए जानते हैं 5 ट्रेडिशनल हेवी दुपट्टों के बारे में और यह भी कि इन्हें किस तरह से कैरी किया जा सकता है। 

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Traditional Dupatta: फुलकारी दुपट्टा

फुलकारी दुपट्टा पंजाब का है, जो एक फोक एम्ब्रॉइडरी ट्रेडिशन है। इसकी इम्ब्रॉयडरी बहुत बारीक होती है और इसे कई डिजाइन और पैटर्न में बनाया जाता है। फ्लॉस सिल्क थ्रेड को वोवन कॉटन फैब्रिक, चंदेरी, शिफॉन और अन्य फैब्रिक पर इम्ब्रॉयडरी की जाती है। फुलकारी दुपट्टा अधिकतर हैंड एम्ब्रॉयडरी किये हुए होते हैं और इन्हें शादी, त्योहारों और फैमिली फंक्शन में पहना जाता है। फुलकारी दुपट्टे बहुत ब्राइट, बोल्ड, रंग बिरंगे और आकर्षक दिखने वाले होते हैं। बाग, थिरमा, दर्शन द्वार, सांची फुलकारी, वारी-दा-बाग, बावन बाग, चोप फुलकारी, पंचरंगा बाग, सतरंगा बाग और मॉडर्न डे फुलकारी जैसी कई प्रकार की फुलकारी एम्ब्रॉइडरी होती है। फुलकारी दुपट्टों को ‘पंजाब की शान’ भी कहा जाता है। 

चिकनकारी दुपट्टा

हर भारतीय महिला को सिम्पलिसिटी और एलीगेंस पसंद आता है। यही वजह है कि वह अपने ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ खूबसूरत एक्सेसरी कैरी करना पसंद करती है। इस खूबसूरत एक्सेसरी की लिस्ट में सबसे ऊपर दुपट्टे का नाम आता है और चिकनकारी दुपट्टे की बात किए बिना दुपट्टे का यह आर्टिकल भला कैसे पूरा होगा। चिकनकारी लखनऊ की खासियत है और इसे अमूमन हाथ से एम्ब्रॉइडरी करके बनाया जाता है। चिकन करी दुपट्टे की खासियत फ्लोरल मोटिफ हैं और इनमें पान और आम जैसे मोटिफ का भी काफी इस्तेमाल किया जाता है। जरी फिलामेंट के साथ जाली स्टिच का इस्तेमाल करके भी बेहद खूबसूरत लखनवी चिकनकारी दुपट्टे तैयार किये जाते हैं। चिकनकारी दुपट्टा को अमूमन कॉटन, ऑर्गेन्जा, सिल्क जैसे फैब्रिक बनाया जाता है, लेकिन आज कल मशीन चिकनकारी एम्ब्रॉयडरी वाले दुपट्टे सिंथेटिक मटेरियल में भी मिलने लगे हैं। हालांकि वे बहुत खूबसूरत नहीं दिखते हैं। 

लहरिया दुपट्टा

लहरिया राजस्थान, भारत में प्रचलित टाई डाई की एक पारंपरिक शैली है, जिसके परिणामस्वरूप विशिष्ट पैटर्न के साथ चमकीले रंग का कपड़ा होता है। इस तकनीक का नाम लहर के राजस्थानी शब्द से लिया गया है क्योंकि रंगाई तकनीक का इस्तेमाल अक्सर मुश्किल तरंग पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है। लहरिया की रंगाई पतले कॉटन या सिल्क फैब्रिक पर की जाती है, आमतौर पर दुपट्टे, पगड़ी या साड़ियों के लिए उपयुक्त लंबाई में। कपड़े को तिरछे ढंग से एक कोने से दूसरे छोर तक घुमाया जाता है, और फिर सही समय पर बांधा जाता है और रंगा जाता है। वेव पैटर्न रंगाई से पहले पंखों की तरह सिलवटें बनाई जाती हैं। पारंपरिक लहरिया में प्राकृतिक रंगों और कई तरह की धुलाई का इस्तेमाल किया जाता है और तैयारी के अंतिम चरण के दौरान इंडिगो या एलिज़रीन का इस्तेमाल किया जाता है।

कांथा दुपट्टा

कांथा वर्क वाले दुपट्टे को पश्चिम बंगाल के बोलपुर क्षेत्र की रूरल महिलाओं द्वारा बनाया जाता है। इन महिलाओं को कांथा एम्ब्रॉयडरी दुपट्टा के लिए किसी तरह की फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं मिली हुई होती है, लेकिन ये लोग घर पर इस कला को सीखते हैं और एक जनरेशन से दूसरी जेनरेशन में पास करते हैं। कांथा वर्क वाले दुपट्टे को अमूमन प्योर सिल्क, टसर सिल्क या कॉटन फैब्रिक पर बनाया जाता है और तभी इसकी खूबसूरती बाहर निकलकर आती है। कांथा एम्ब्रॉयडरी वाले दुपट्टे को प्योर सिल्क, टसर सिल्क या कॉटन फैब्रिक पर बनाने की एक और वजह यह भी है कि इन फैब्रिक के नेचुरल शेड्स बेहद खूबसूरत होते हैं और जब इन पर रंगीन धागों से पैटर्न बनाए जाते हैं तो ये उभरकर आते हैं। बेहद समृद्ध है और रंग बिरंगे धागों से दुपट्टा पर फ्लोरल मोटिफ बनाए जाते हैं। और कई बार तो ब्राइट कलर के दुपट्टे को बनाने के लिए फैब्रिक को डाई भी किया जाता है। कांथा वर्क वाले दुपट्टे पर टाई और डाई के पैटर्न भी देखने को मिल जाते हैं। 

बनारसी दुपट्टा

बनारसी दुपट्टा का उद्गम स्थल वाराणसी उत्तर प्रदेश को माना जाता है और अमूमन बनारसी दुपट्टा सिल्क फैब्रिक का ही होता है, जो एक बहुत ही खूबसूरत ट्रेडिशनल फेब्रिक है। बनारसी सिल्क दुपट्टा और कपड़ों को बहुत पहले सिर्फ राजा महाराजाओं के लिए बनाया जाता था और इन्हें बनाने के लिए सोने और चांदी के धागों का इस्तेमाल किया जाता था। यही वजह है कि बनारसी दुपट्टे को उनके डिजाइन और गोल्ड और जरी वर्क के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। न सिर्फ बनारसी सिल्क दुपट्टा बल्कि बनारसी साड़ियों पर किए गए डिजाइन भी बहुत कॉम्प्लेक्स और मुश्किल भरे फ्लोरल मोटिव के होते हैं। बनारसी पैटर्न को इंडिया में लाने वाले मुगल है। यही वजह है कि बनारसी दुपट्टे के डिजाइन मुगलों से प्रेरित रहते हैं। ये बनारसी सिल्क दुपट्टा काफी है लेकिन चमकदार, ब्राइट, ग्लैमरस और हेवी होने के साथ ही सॉफिस्टिकेटेड भी होते हैं।

स्पर्धा रानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज ने हिन्दी में एमए और वाईएमसीए से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। बीते 20 वर्षों से वे लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट लेखन में सक्रिय हैं। अपने करियर में कई प्रमुख सेलिब्रिटीज़ के इंटरव्यू...